Poetry on Picture Contest

चाय का बहाना

आओ बैठो संग मेरे एक एक कप चाय हो जाए, फिर से बीते लम्हों की चर्चा खुले आम हो जाए, कह दूँ मैं भी अपने दिल की, कहदो तुम भी अपने दिल की, और फिर तेरे मेरे दिल का रिश्ता सरेआम हो जाए, वैसे तो हर रात होती रहती है ख़्वाबों में मुलाक़ात तुझसे, चल आज चाय की चुस्की के बहाने नज़ारा कुछ ख़ास हो जाए॥ राही (अंजाना) »

आज कुछ चाय पे चर्चा हो जाये|

आज कुछ चाय पे चर्चा हो जाये|

आज कुछ चाय पे चर्चा हो जाये दिल के राज जो छुपे बैठे है अरसे से उनसे कुछ गुफ़्तगू हो जाये इससे पहले उम्र ए दराज धोखा दे ले ले कुछ लफ्जों का सहारा कहीं लाठी का सहारा ना हो जाये आज कुछ चाय पे चर्चा हो जाये| »

कितने ही दिन गुज़रे हैं पर, ना गुजरी वो शाम अभी तक; तुम तो चले गए पर मैं हूँ, खुद में ही गुमनाम अभी तक! . तुम्ही आदि हो,…तुम्ही अन्त हो,…तुमसे ही मैं हूँ, जो हूँ; ये छोटी सी बात तुम्हें हूँ, समझाने में नाकाम अभी तक! . कैसे कह दूँ, …तुम ना भटको, …मैं भी तो इक आवारा हूँ; शाम ढले मैं घर न पहुँचा, है मुझपे ये इल्ज़ाम अभी तक! . प्यार से, ‘पागल’ नाम दिया था, तूने जो इक रोज़ मुझे; तु... »

चुस्की चाय की

वही चाय के दो कप और एक प्लेट लौटा दे, कोई तो तेरे साथ बीते पलों को वापस लौटा दे, एक चाय के कप का बना कर झूठा बहाना, वो तेरा रोज रोज मेरे घर चले आना लौटा दे, तेरे साथ बैठ कर वो नज़रें मिलाना, वो चाय की चुस्की वो वक्त पुराना लौटा दे॥ राही (अंजाना) »

महफ़िल-ए-चाय

मैं मान लेती हूँ, की तुम्हे मेरी याद नहीं आती , पर वो महफ़िल-ए-चाय तो याद आती होगी ! वो शाम की रवानगी , वो हवा की दिवानगी, वो फूलो की मस्तांगी , याद न आती हो , पर वो चाय की चुस्की की आवाज तो याद आती होगी ! याद ना आती हो तुमको गूफ्तगू-ए-महफिल , पर निगाहों की शरारते तो याद आती होगी ! मैं मान लेती हूँ , की तुम्हे मेरी याद नहीं आती , पर वो महफिल-ए-चाय तो याद आती होगी ! हर शाम चाय के साथ अखबार पढ़ना , आद... »

चाय की प्याली

तेरे साथ बिताई मस्ती और चाय की वो चुस्की याद आई है, लो आज फिर से बीते लम्हों की एक बात याद आई है, तेरे साथ बैठ कर जो बनाई थी बातें, उन बातों से फिर से दो कपों के टकराने की आवाज आई है, छोड़ दी थी चाय की प्याली कभी की हमने, मगर आज फिर से तेरे साथ चाय पीने की इच्छा बाहर आई है॥ राही (अंजाना) »

चंद पलों का चुनिंदापन

जैसे उम्मीद की प्याली से चुस्की लेकर मानों मंज़िल की तरफ कोई सरिता बह जाती है वैसे ही मेरे चंद पलों का चुनिंदापन मुझे मिलते ही मेरे मन की विचार–शक्ति कविता बनकर कुछ कह जाती है।                                      – कुमार बन्टी   »

Heroes of nation

Ek rang ki chah  thi Ek daman ki chhav thi Khusub mitti ki Mere mathe ki shan thi Ek armano ki sham thi Ek riste ki sougat thi Door man mera  dol gya Jab khabar aayi ki vo gujar gya HVA ka rukh bhi badal  gya Na Jane vakat kyu ther  gya Tirnge ke liye fir ek jvan shhid ho gya Kyu kisi ke mathe ki bindiya ujad gyi  kyu kisi bahan se uska bhai chhot gya  kyu ma ke  keleje ka tudka aaj tirnge ke kafa... »

मिट्टी से जुड़े सैनिक

आंधी और तूफानों में भी डटे रहते हैं, हम वो हैं जो हर मौसम में खड़े रहते हैं, उखड़ते हैं तो उखड़ जायें पेड़ और पौधे जड़ों से, हम तो वो हैं जो देश की ज़मी से जुड़े रहते हैं, आजाद दिख जाते हैं उड़ते परिंदे कभी, तो कभी बिगड़े हालात नज़र आते हैं, पर हम तो वो हैं जो हर हाल में तिरंगे की शान बने रहते हैं, धुंधली नज़र आती है जहाँ से सरहद के उस पार की धरती, उसी हिन्दुस्तान की मिटटी से हम हर पल जुड़े रहते हैं॥ राही (अं... »

Veer Jawan

Bhhanp leti hain ye aankhe aane vala hr khatra Iski hr saans desh k naam, desh ko samarpit hai khoon ka hr katra Ye mehaz banduk nahi hai iske paas , hr pal ka saathi hai Isike hone se hi to hum aam logo ko roz chain ki need aati hai Naa koi swarth hai naa koi abhiman hai Ye koi aur nahi hindustan ka Veer Jawan hai Ye jo vardi iske tan pr nazar aati hai Mehaz vardi nahi iski shaan ko darshati hai ... »

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