Poetry on Picture Contest

dahej ek chori

Ye sansaar nahi choro ka ek baajar h Dahej ladki ko gira Dene vala ek hathiyar h Dena padega Hume apni Ladki ki shadi me dahej Or magege ladke ki shadi me Chandi ki kursi or sone ki mej Yahi soch le kar kuch log Aage badh rage h Na jaane phir bhi khud par Kyu itna akad rahe h Kya itna b inko nahi Aa rha hai samaj Ki is soch se ladkiyon Ki jindgi gyi h ulajh Khud ki jarurat ka bhi Dekho maang rahe ... »

dahej ek chori

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दहेज

दहेज

मेरे माथे को सिंदूर देके मेरे विचारों को समेट दिया मेरे गले को हार से सजाया पर मेरी आवाज़ को बांध दिया मेरे हाथों मे चूड़ियों का बोझ डालके उन्हें भी अपना दास बना दिया मैं फिर भी खुश थी मुझे अपाहिज किया पर थाम लिया मेरे पैैरों में पायल पहनाई और मेरे कदमों को थमा दिया मैं फिर भी खुश थी कि मेरा संसार एक कमरे में ला दिया पर आज मुझे मेरा और मैं शब्द नहीं मिल रहे शायद वो भी दहेज में चले गये… »

चील कौवो सा नोचता ये संसार

चील और कौवो सा नोचता रहता संसार है, ये कैसा चोरों का फैला व्यापार है, दहेज के नाम पर बिक रही हैं नारियाँ कैसे, ये कैसा नारियों को गिरा कर झुका देने वाला हथियार है, न चाह कर भी बिक जाती है जहाँ अपनी ही हस्ती, ये मोल भाव का जबरन फैला कैसा बाज़ार है॥ राही (अंजाना) »

संसार के बाजार में दहेज

संसार के बाजार में दहेज

इस जहांँ के हाट में , हर  चीज की बोली लगती है, जीव, निर्जीव क्या काल्पनिक, चीजें भी बिकती हैं, जो मिल न सके वही , चीज लुभावनी लगती है, पहुँच से हो बाहर तो, चोर बाजारी चलती है, हो जिस्म का व्यापार या, दहेज लोभ में नारी पर अत्याचार, धन पाने की चाहे में, करता इन्सान संसार के बाजार में, सभी हदों को पार, दहेज प्रथा ने बनाया, नारी जहांँ में मोल-भाव की चीज, ढूँढ रही नारी सदियों से, अपनी अस्तित्व की थाह, ... »

रंग गुलाल

रंग गुलाल के बादल छाये रंगो में सब लोग नहाये देवर भाभी जीजा साली करें ठिठोली खेलें होली बोले होली है भई होली खायें गुजिया और मिठाई घुटे भांग और पिये ठंडाई गले मिलें जैसे सब भाई भांति भांति के रंग लुभावन प्रेम का रंग सबसे मन भावन प्रेम के रंग में सब रंग जाएँ जीवन को खुशहाल बनाएँ उ खेलें सभी प्रेम से होली बोलें सभी स्नेह की बोली मिलें गले बन के हमजोली ऐसी है अनुपम ये होली »

होली है रंगों का खेल

होली है रंगों का खेल होली है रंगों का खेल आवो खेले मिल के खेल देखो खेल रही है होली ये आसमा ये धरथी हमारी   आवो मिल के रंग चुराये सबको मिल के रंग लगाए रंग सच्चाई का आसमा से लाए रंग खुसी का हरयाली से चुराये रंग चेतना का सूर्य मे पाये रंग प्यार का फूलों से भर आए रंग सादगी का चाँद से ले आए आवो मिल रंग चुयारे सबको मिल के रंग लगाए मैं रंग जाऊँ तेरे रंग मैं तू मेरा रंग हो जाओ ओड़ तुझे मैं तन मन मे रंग दूँ... »

होली की टोली

होली पे मस्तों की देखो टोली चली, रँगने को एक दूजे की चोली चली, भुलाकर गमों के भँवर को भी देखो, आज गले से लगाने को दुनीयाँ चली, हरे लाल पिले गुलाबी और नीले, अबीर रंग खुशयों के उड़ाने चली, भरकर पिचकारी गुब्बारे पानी के, तन मन को सबके भिगाने ज़माने के, हर गली घर से देखो ये दुनियां चली॥ राही (अंजाना) »

आओ रंग लो लाल

आओ रंग ले एक दूसरे को, बस तन को नहीं मन को भी रंग ले…. हर भेदभाव जात-पात को रंग ले धर्म के नाम को रंग ले। मिला ले सबको एक रंग में वो रंग जो है मेरे तेरे प्यार का हर सरहद से पार का धरती से ले कर उस आकाश का रंग दो सबको उस रंग में।। सिर्फ अपना नही उस नन्ही परी का मुँह मीठा कराओ उस गरीब के घर तक भी रंग को पहुचाओ उस माँ के खाली दामन में भी ख़ुशी थोड़ी तुम डाल आओ।। सिर्फ अपनों को नहीं सबको रंग दो हर... »

आओ तन मन रंग लें

आओ तन मन रंग लें

चली बसंती हवाएँ , अल्हड़ फागुन संग, गुनगुनी धूप होने लगी अब गर्म, टेसू ,पलाश फूले, आम्र मंज्जरीयों से बाग हुए सजीले, तितली भौंरे कर रहे , फूलो के अब फेरे , चहुंँ दिशाओं में फैल रही, फागुन की तरूणाई, आओ तन मन रंग लें, हम मानवता के रंग , भेद-भाव सब भूल कर, आओ खेलें रंगों का ये खेल , प्रेम , सौहार्द के भावों से, हो जाए एक-दूजे का मेल, होली पर्व नहीं बस रंगो का खेल, प्रेम , सौहार्द के भावों का है ये म... »

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