Poetry on Picture Contest

KISAN

DESH KI AAN,BAN,SHAN KISAN KITNA PRESHAN KHET KI JAN,PHCHAN,ARMAN KISAN KITNA PRESHAN MEHNT KI JUBAN,MUKAN,PRWAN KISAN KITNA PRESHAN FASAL KE NA MILE DAM MHGAI KI MAR PED PR LTKA JMI PR BIKHRE ARMAN KISAN KITNA PRSHAN »

अन्नदाता कहलाता हूं

अन्नदाता कहलाता हूं पर भूखा मैं ही मरता हूं कभी सेठ की सूद का तो कभी गोदाम के किराये का इंतजाम करता फिरता हूं बच्चे भूखों मरते है खेत प्यासे मरते है अब किसकी व्यथा मैं दूर करूं मैं ही हरपल मरता हूं अन्नदाता कहलाता हूं »

खामोश किसान

खामोश किसान

जवाब देने में हाज़िरजवाब बताये गए हम, के अपने ही घर में खामोश कराये गए हम, ज़िन्दगी बनाने को कितनी ही जगाये गए हम, के अपनी ही चन्द सांसों से दूर कराये गये हम, हर मौसम से क्यों सामने से भिड़ाये गये हम, के सूखी धरती पे ही सूली पर चढ़ाये गए हम।। राही (अंजाना) »

किसान की व्यथा

किसान की व्यथा

पसीना सूखता नहीं धूप में। किसान होता नहीं सुख में।। अतिवृष्टि हो या फिर अनावृष्टि। प्रकृति की हो कैसी भी दृष्टि। किसानों के परिश्रम के बिना, कैसे पोषित हो पाएगी सृष्टि। संसार का पोषण करने वाला, क्यों रह जाता है भूख में। पसीना सूखता नहीं धूप में। किसान होता नहीं सुख में।। इनके परिश्रम का मूल्यांकन, हमारी औकात नहीं। ना मिल पाए उचित मूल्य, ऐसी भी कोई बात नहीं। मौसम की मार और सर पर कर्ज का भार, क्यों ... »

बेटी से सौभाग्य

बेटी है लक्ष्मी का रुप, मिलतीं है सौभाग्य से, घर का आंगन खिल जाता है, उसकी पायल की झन्कार से। बेटी ही तो मां बनकर, हमको देती नया जनम, सम्मान करें हर बेटी का, यह है हर मानव का धरम, जनम न दोगे बेटी को तो, संसार ये रुक जाएगा, बिन बेटी के, बेटे वालो, बेटा न हो पाएगा। »

सिर्फ़ बोझ न समझ मुझे

सिर्फ़ बोझ न समझ मुझे

जीना चाहती हूं मैं भी इस दुनिया को देखना चाहती हूं मां तेरे आंचल में सर रखकर सोना चाहती हूं बापू तेरी डाट फ़टकार प्यार पाना चाहती हूं मां मैं तेरा ही हिस्सा हूं तेरा अनकहा किस्सा हूं तू मुझे अलग कर क्या जी पायेगी इस दुनिया की भीड़ में तू भी अकेली पड़ जायेगी इक मौका तो दे मुझे बापू को अपने हाथ से रोटी बनाकर खिलाऊंगी कक्षा में प्रथम आकर मैं सबको दिखलाऊंगी बड़ी होकर जब अधिकारी बन घर आऊंगी बापू के सर को म... »

बेटी घर की रौनक होती है

बेटी घर की रौनक होती है बाप के दिल की खनक होती है माँ के अरमानों की महक होती है फिर भी उसको नकारा जाता है भेदभाव का पुतला उसे बनाया जाता है आओ इस रीत को बदलते है एक बार फिर उसका स्वागत करते है »

बेटियाँ

पैदा होने से पहले मिटा दी जाएँगी बेटियाँ, बिन कुछ पूछे ही सुला दी जाएँगी बेटियाँ, गर समय रहते नहीं बचाई जाएँगी बेटियाँ, तो भूख लगने पर रोटी कैसे बनाएंगी बेटियाँ, जहाँ कहते हैं कन्धे से कन्धा मिलायेंगी बेटियाँ, सोंच रखते हैं एक दिन बोझ बन जाएँगी बेटियाँ, चुपचाप गर यूँही कोख में छिपा दी जाएँगी बेटियाँ, तो भला इस दुनियां को कैसे खूबसूरत बनायेंगी बेटियाँ॥ राही अंजाना »

चुनावों के इस मौसम में

चुनावों के इस मौसम में फिजा में कई रंग बिखरेंगे अगर कर सके हम अपने मत का सही प्रयोग हम नये युग में नयी रोशनी सा निखरेंगे »

वोट डालने चलो सखी री

वोट डालने चलो सखी री

वोट डालने चलो सखी री लोकतंत्र के अब आयी बारी एक वोट से करते हैं बदलाव नेताजी के बदले हम हाव-भाव ! सही उम्मीदवार का करते है हम चुनाव, बेईमानों को नहीं देंगे अब भाव ! आपका वोट है आपकी ताकत लोकतंत्र की है ये लागत सुबह सवेरे वोट दे आओ वोटर ID संग ले जाओ ! »

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