Poetry on Picture Contest

रंग नहीं महज़ ये तीनो……..

रंग नहीं महज़ ये तीनो……..

रंग नहीं महज़ ये तीनो हमारे हिंदुस्तान की शान है झंडा है ये हमारे देश का तिरंगा इसका नाम है सर से भी ऊँचा रखेंगे हम इसको जब तक जिस्म में जान है हर पल देते है सलामी दिल से के ये हमारी पहचान है दुश्मन क्या समझेगा इसकी ताकत अभी वो बहुत अनजान है पूछो जा कर उन लोगो से जिनकी ज़िन्दगी तिरंगे के बिना वीरान है मर मिटेंगे इसके खातिर हम के ये हमारा गुमान है अशोक चक्र से सुसज्जित है ये हर फौजी को इसका ध्यान है ... »

गणतंत्र

गणतंत्र

राजा-शासन गया दूर कही, गणतंत्र का यह देश है | चलता यहाँ सामंतवाद नहीं, प्रजातंत्र का यह देश है | दिया गया है प्रारब्ध देश का, प्रजा के कर में; किन्तु है राजनीति चल रही यहाँ सबके सर में | तोड़ते है और बाँटने है प्रजा को अपने धर्म से, विमुख करने देश की प्रजा को निज कर्म से | यद्यपि है शक्ति आज भी प्रजा के साथ, यदि मिल जाए समस्त भारतीयों के हाथ; जोड़ी जा सकती है शक्ति एक मुष्टि में, बज सकता है डंका अपन... »

मुठ्ठी में तकदीर

मुठ्ठी में तकदीर

मुठ्ठी में तकदीर है मेरी, मेरे वतन की कर ले कोई कितनी भी कोशिश मिटा नहीं सकता| क्या करेगा वो इन्सान आखिर जो देश का राष्टगान भी गा नहीं सक्ता|| »

कचरेवाली

कचरेवाली

इक कचरेवाली रोज दोपहर.. कचरे के ढेर पे आती है.. तहें टटोलती है उसकी.. जैसे गोताखोर कोई.. सागर की कोख टटोलता है.. उलटती है..पलटती है.. टूटे प्लास्टिक के टुकड़े को.. और रख लेती है थैली में.. जैसे कोई टूटे मन को.. इक संबल देकर कहता है.. ठुकराया जग ने दुःख मत कर.. ये हाथ थम ले..तर हो जा.. इक कचरेवाली रोज दोपहर.. कचरे के ढेर पे आती है.. जहाँ शहर गंदगी सूँघता.. वहाँ वही जिंदगी सूँघती.. कूड़े की संज्ञा में... »

कूड़े का ढेर

कूड़े का ढेर

जिसे कहते हो तुम कूड़े का ढेर; वह कोई कूड़ा नहीं! वह है तुम्हारी, अपनी चीजो का ‘आज’ | जिसे खरीदकर कल तुमने बसाया था घर में; उन्ही चीजो का है यह ‘आज’ | जिस जगह तुम उड़ेल देते हो अपना कल; उसी कूड़े के ढेर में खोजते है कुछ लोग अपना आज | जिन्हें ‘बेकार’ कहकर फैंक देते हो तुम कचरे में, उसी अपव्यय में तलाशते है कुछ लोग अपना बहुमूल्य रजत-कंचन | उनके थैलो में भरी हुई बासी, ... »

बचपन

बचपन

जो बेबसी देख रहे हैं हम आज उनके चेहरो में , वो ढूंढेंगे दो वक्त की रोटी कूड़े पड़े जो शहरों में ! जात,पात,दुनियादारी उन्हें इन सबसे मतलब क्या, पेट की आग बुझाने को वो चल पड़ते हैं अंधेरों में !! शिक्षा,प्यार,खिलौना आदि ये शब्द वो जाने भी कैसे, जिनकी जिंदगी बीत जाती है इन कूड़ों की ढेरों में !! जिंदगी उनकी भी सुधरनी चाहिये ये सच तब होगा, उन्हें अपना बचपन मिल जाये एक नए से सवेरों में !! @नितेश चौरसिया  »

बचपन

बचपन

  जो बेबसी देख रहे हैं हम आज उनके चेहरो में , वो ढूंढेंगे दो वक्त की रोटी कूड़े पड़े जो शहरों में ! जात,पात,दुनियादारी उन्हें इन सबसे मतलब क्या, पेट की आग बुझाने को वो चल पड़ते हैं अंधेरों में !! शिक्षा,प्यार,खिलौना आदि ये शब्द वो जाने भी कैसे, जिनकी जिंदगी बीत जाती है इन कूड़ों की ढेरों में !! जिंदगी उनकी भी सुधरनी चाहिये ये सच तब होगा, उन्हें अपना बचपन मिल जाये एक नए से सवेरों में !! @नितेश चौर... »

jud dai

mere pass bhi khab hai tu pankh jud dai mere pass bhi dil hai, dhadkan jud dai mere pass bhi sai hai ruh jud dai mere pass bhi himat hai junun jud dai mere pass bhi lakirai hai kismat jud dai mere pass boot hai khuda  jud dai mere pass bhi khab hai pankh jud dai »

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है बीन कर कचड़ा सब्र कर रहे है ज़िन्दगी सिर्फ अमीरों की नहीं है ये तो तोहफा है खुदा का, ये गरीबों की भी है क्यों करते हो नफरत तुम इन सब को देख कर ये हम जैसों की ज़िन्दगी को सरल कर रहे है जब आते है गली मे, कुत्ते भोंकते है इन पर सब देखते है इनको शक की नज़र से कभी झाँक कर देखो इन सब के घर और आंगन मे ये अपनी ज़िन्दगी का क्या हस्र कर रहे है अक्सर हम फैंक देते है कचरे को यू... »

कचरे में खोयी जिंदगी

कचरे में खोयी जिंदगी

चुन कर कचरे से कुछ चन्द टुकड़ों को, जिंदगी को अपनी चलाते हुए, अक्सर देखे जाते हैं कुछ लोग थैलो में जीवन जुटाते हुए॥ थम जाती है जहाँ एक पल में साँसों की डोरी, वहीं बच्चों को अक्सर चुपाते हुए, दो रोटी को कचरा उठाते हुए॥ अक्सर देखे जाते हैं कुछ लोग थैलो में जीवन जुटाते हुए॥ जहाँ बन्द होती है आँखे हमारी, जहाँ भूल कर भी हम रुकते नहीं हैं, लगाते हैं खुद ही जहाँ ढ़ेर इतने, एक लम्हा भी जहाँ हम ठहरते नहीं है... »

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