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मुक्तक

तेरा ख्याल मुझको तड़पाकर चला गया! अश्कों को निगाहों में लाकर चला गया! नींद भी आती नहीं है तेरी याद में, करवटों में दर्द को जगाकर चला गया! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय »

मुक्तक

दर्द तन्हा रातों की कहानी होते हैं! तड़पाते हालात की रवानी होते हैं! कभी होते नहीं जुदा यादों के सिलसिले, दौरे-आजमाइश की निशानी होते हैं! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय »

मुक्तक

कोई रोके लाख मगर सवेरा नहीं रुकता! सामने उजालों के अंधेरा नहीं रुकता! हम रोक लेंगे हिम्मत से तूफाने-सितम को, जुल्मों के खौफ से कभी बसेरा नहीं रुकता! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय »

Tum bin

Na nind aati tum bin, Na khana khate tum bin, Na kuch or acha lgta tum bin. Viraan ho gye tum bin, smj nhi aata kon h hum tum bin, Na jee skenge tum bin, #devil »

मुक्तक

मुक्तक

तेरी याद कभी-कभी मुस्कान देती है! तेरी याद कभी-कभी तूफान देती है! टूटी हुई चाहत भी जुड़ जाती है कभी, कभी-कभी हर आलम सूनसान देती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

तेरी आज भी मुलाकात का असर है! तेरे ख्यालों की हर बात का असर है! नींद उड़ जाती है यादों की चोट से, तड़पाते लम्हों की रात का असर है! मुक्तककार-#मिथिलेश_राय »

मुक्तक

मैं क्या भरोसा कर लूँ इस ज़हाँन पर? डोलता यकीन है टूटते इंसान पर! हर किसी को डर है तूफाने-सितम का, आदमी जिन्दा है वक्त के एहसान पर! रचनाकार -#मिथिलेश_राय »

बदलते हुए

चलते हुए कदमो के निशां को बदलते हुए देखा हमने। हर रिस्ते नातों को आज बदलते हुए देखा हमने। जो कभी टूट कर चाहा करती थी जमाने हमें, आज उसे ही छोड़ जमाने , जाते देखा हमने। मौसम तो वही है जो था फिजाओं मे कभी, पर मौसम का तेवर आज बदलते देखा हमने। कहते है ख्वाब ऊची रख्खों तो मंजिल भी ऊची होगी, पर अक्सर नींद संग ख्वाब टुटते देखा हमने। देख ली सारी जिन्दगी ,देख ली “योगी” कि दिल के अरमा को सरे राह... »

कविता

कविता ***************************** ये जीवन सरिता ,तुम युं ही बहते रहना। कल कल कर मधुर नांद सै बहते रहना। गर.. लाख मुस्किलें हो राहो मे पर भी, एक लक्ष्य बना ,और आगे बडते रहना । गर ठहरे पल भर को कहीं, रह जाओगें बंध कर वही कें वही। ठान लो समय अनुरुप बढ़ना है आगे, सोच, यही मंजिल तो होगी कही न कही। तुम सघर्ष से घबराकर, कही पथ भ्रष्ट न हो जाना। यह सघर्ष ही जीवन है, इससे तुम कभी न डर जाना। निर्भय होकर स... »

एैसा श्रंगार कर

कुन्दन सा बदन को एैसा श्रृंगार कर । जो भाये पिया मन एैसा श्रृंगार कर । सरगम पे सुर नया कोई झंकार कर, जो गुंज उठे हर मन के द्वार द्वार पर। रीझाती सपनों को अपना सकार कर, जो तु बना सके बना ले जीत या हार कर। तारूण्य मन झुमे एैसा नयन वार कर, तडफे हर मन एैसा वशी मंत्र संचार कर। सावन बन प्रेम का रिमिझम फुहार कर, दु:ख का बोझ हो तो चल यही उतार कर। हुक की सरीता हो ह्रदय में फिर भी प्यार कर, यही सुरम्य है जी... »

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