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छोटी सी बात

छोटी सी बात

दिल की जुबां »

अच्छाई नहीं मिलती

झूठों की नगरी है साहब, यहाँ सच्चाई, नहीं मिलती…. बुराई के हैं अनगिनत किस्से, पर अच्छाई, नहीं मिलती…. आधे घंटे मे पहुँच जाता है, लोगों के घरों मे पिज़्ज़ा जनाब, लेकिन वक़्त पर मरीज़ों को फिर भी दवाई, नहीं मिलती…. सर्द रातों मे सड़कों पे ठिठुर रहें हैं इंसान यहाँ पर, सुकून की नींद तो वो भी सो जाए, पर रज़ाई, नहीं मिलती…. यूँ तो हर रोज़ हर गली हर नुक्कड़ पर होते है दंगे यहाँ,, ... »

अच्छाई नहीं मिलती

झूठों की नगरी है साहब, यहाँ सच्चाई, नहीं मिलती…. बुराई के हैं अनगिनत किस्से, पर अच्छाई, नहीं मिलती…. आधे घंटे मे पहुँच जाता है, लोगों के घरों मे पिज़्ज़ा जनाब, लेकिन वक़्त पर मरीज़ों को फिर भी दवाई, नहीं मिलती…. सर्द रातों मे सड़कों पे ठिठुर रहें हैं इंसान यहाँ पर, सुकून की नींद तो वो भी सो जाए, पर रज़ाई, नहीं मिलती…. यूँ तो हर रोज़ हर गली हर नुक्कड़ पर होते है दंगे यहाँ,, ... »

मुक्तक

मुक्तक

मुझसे किसलिए तुम रिश्ता तोड़ गये हो? मेरी चाहत को तन्हा छोड़ गये हो! यादों की आहट रुला देती है मुझको, #साँसे_जिस्म को गमों से जोड़ गये हो! #महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं »

ठण्डी के बिगुल

शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के, मौसम ने यूं पलट खाया, शीतल हो उठा कण-कण धरती का, कोहरे ने बिगुल बजाया!! हीटर बने हैं भाग्य विधाता, चाय और कॉफी की चुस्की बना जीवनदाता, सुबह उठ के नहाने वक्त, बेचैनी से जी घबराता!! घर से बाहर निकलते ही, शरीर थरथराने लगता, लगता सूरज अासमां में आज, नहीं निकलने का वजह ढूढ़ता!! कोहरे के दस्तक के आतंक ने, सुबह होते ही हड़कंप मचाया, शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के मौसम ने यूं पलटा खा... »

ठण्डी के बिगुल

शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के, मौसम ने यूं पलट खाया, शीतल हो उठा कण-कण धरती का, कोहरे ने बिगुल बजाया!! हीटर बने हैं भाग्य विधाता, चाय और कॉफी की चुस्की बना जीवनदाता, सुबह उठ के नहाने वक्त, बेचैनी से जी घबराता!! घर से बाहर निकलते ही, शरीर थरथराने लगता, लगता सूरज अासमां में आज, नहीं निकलने का वजह ढूढ़ता!! कोहरे के दस्तक के आतंक ने, सुबह होते ही हड़कंप मचाया, शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के मौसम ने यूं पलटा खा... »

ख्वाबों की बेवफाई

ख्वाबों की बेवफाई

हम तो ख्वाबों की चौखट पर बैठे थे , लेकर हसीन ख्वाब … प्यारी आँखों के परदे पर || ख्वाबों को ख्वाब बनाने , आया एक मुसाफिर , रख दिया ख्वाबों को , उसने जलती आग पर || कोशिश बहुत की , ख्वाबों की नमी जोड़ने की , पर मेरे ख्वाब भी मनचले निकले , चल दिए ……. सवार हो धुएं पर || अफ़सोस, धुआँ भी तो आग का है , ना उम्मीद है बादल की , ना ही उम्मीद है बारिश की , अब इस बंजर जमीं पर || उठ … चल दि... »

मुक्तक

कोई नहीं है मंजिल न कोई ठिकाना है! हरपल तेरी याद में खुद को तड़पाना है! मैं कैसे रोक सकूँगा नुमाइश जख्मों की? जब शामे-तन्हाई में खुद को जलाना है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

मुक्तक

मुझको याद फिर तेरा जमाना आ रहा है! मुझको याद फिर तेरा फसाना आ रहा है! चाहत की मदहोशी से जागी है तिश्नगी, मुझको याद तेरा मुस्कुराना आ रहा है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

अनसुलझी पहेली “रहस्य “देवरिया

अनसुलझी पहेली “रहस्य “देवरिया

Dosto गोरखपुर में हो रहे मासूम बच्चों की मौत बहुत ही दूखद हैं मेरे चार शब्द उन बच्चों नाम (( plz god sef the all children’s )) एक एक कर जिन्दगीया निगलती जा रही हैं ये , एक अनसुलझी पहेली बनती जा रही हैं ये ,, ” खिले थै बड़ी मन्नतो से जिनके ऑगन में फूल, उन माँओ की गोद सूना करती जा रही हैं ये , ” रहा करती थी हर पल खुशियाँ जिनके घरों में , वाहा गमों का सागर भरती जा रही हैं ये ,, ̶... »

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