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आज की नारी पड़ गयी भारी।

आज की नारी पड़ गयी भारी, कोई ना पार पाए ऐसी करती होशियारी। जीवन इसका WhatsApp पर व्यस्त रहता , चल जाए भाड़ मे दुनिया सारी। आज की नारी– फैशन की बात इससे ना पुछो वरना दिख वा देगी दुनिया सारी– और बेचवा देगी जमीन सारी आज की नारी। साँस — ससुर की सेवा की ना छेड़ो वरना किचन मे टुट जाएगी बर्तन सारी। भुल कर भी इसके मायके वाले के कुछ ना कहना वरना घर मे हो जाएगी महाभारत भाड़ी। आज की नारी पड... »

मुक्तक

तेरी याद मुझसे भुलायी न गयी! तेरी याद दिल से मिटायी न गयी! चाहत जल रही है सीने में मगर, आग़ तिश्नगी की बुझायी न गयी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

यहीं पर सब कुछ छोड़कर जाना है।

छोड़कर सब कुछ यहीं पर एक दिन जाना है, लगा एक अजीब सा सदमा। आज तक जो किया कुछ ना हो सका अपना।। अगर यही हकीकत है,तो क्यो खुनी रात खेलते है,हम। तो क्यो खेत की आड़ी के लिए लर जाते है,हम— तो क्यो आँगन मे दिवार पर जाते है-क्यो।। जो भाई साथ मे खाना खाते क्यो पराये बन जाते है, माँ अजनबी बन जाती है, पत्नी आँख के तारे बन जाती है -क्यो।।। »

मुक्तक

आओ करीब तुम नूरानी रात हुई है! चाहत की फिर से दीवानी रात हुई है! तोड़कर जमाने की जंजीर-ए-रस्म को, आओ करीब तुम मस्तानी रात हुई है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

जब–जब देखा ।

मैने उसको, जब-जब देखा । सजते देखा, धजते देखा, संभलते देखा !! मैने उसको, गलियो मे सदियो से किसी का इंतजार करते देखा। मैने उसको जब– जब देखा हाथो मे पत्थर देखा।। ये जमीन तुने छीन लिया मेरे जमीं को बस चिल्लाते देखा।। जब– जब देखा ज्योति मो-न०9123155481 »

हुअा वहुत अत्याचार

हुआ बहुत अत्याचार —– अब हर घर से भगत सिह , सुखदेव निकलना चाहिए। रोज जो चेहरे बदलते है,लिबाजो कि तरह अब उसको फाँसी पर चढ़ाना चाहिए।। भगत, सुखदेव तुझ पर बहुत हुए अत्याचार, अब उस गद्देदार को खुले आसमान मे सिर–धर से अलग कर देना चाहिए, मेरे मालिक,मेरे देश पर बहुत हो रहे अत्याचार। अब हर घर से भगत,सुखदेव निकलाना चाहिए।। ज्योति मो न०9123155481 »

मुक्तक

मैं कैसे कह दूँ तुमसे प्यार नहीं रहा! तेरी गुफ्तगूं का इंतजार नहीं रहा! हर वक्त खिंचती हैं जब तेरी अदाऐं, मैं कैसे कह दूँ दिल बेकरार नहीं रहा! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

कुछ टाइम निकालकर याद कर लेना मुझे भी।

कुछ टाइम निकालकर याद कर लेना मुझे भी।

कुछ टाइम निकालकर याद कर लेना मुझे भी। पिछले कल तक साथ रहा तेरा हमारा। आज के ही दिन डोली सजी थी, और माँग मे सितारा। चाँद की रोशनी सभी को रास आते है, पर दिये की रोशनी पर हक हमारा ।। मुबारक हो चाँद की रोशनी तुझे भी। हो सके तो याद कर लेना उस रात मुझे भी।। भले दुध के ग्लास मे हक नही हमारा, पर दिया गया तुम्हारा तोफा दिये की ऱोशनी पर हक हमारा तुम्हारा। समाने खड़ी है तुम्हारे मंजिल की गाड़ी , क्यो मुझको इ... »

मुक्तक

तुम जो मुस्कुराती हो नजरें बदलकर! नीयत पिघल जाती है मेरी मचलकर! चाहत धधक जाती है जैसे जिगर में, हर बार जुस्तजू की आहों में ढलकर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

मैं कबतलक तेरा इंतजार करता रहूँ? मैं कबतलक तुम पर ऐतबार करता रहूँ? मुझे खौफ सताता है तेरी बेरुखी का, मैं कबतलक खुद को बेकरार करता रहूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

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