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मुक्तक

बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

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बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

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बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

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बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

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बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

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मौत हासिल होती है इंसान के मरने पर! मिलता है अंधेरा उजालों के गुजरने पर! क्यों खौफ-ए-नाकामी है हर वक्त जेहन में? जब दर्द ही रहबर है खुशियों के मुकरने पर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

अरे, ओ जिन्दगी से निऱाश आदमी सुनो।

अरे ,ओ जिन्दगी से निऱाश आदमी सुनो— सड़क पर भटकते हो क़्यो सुनो। कुछ तो कर्म करो—– अपने स्थिति को देखो कुछ तो शर्म करो।। कब –तक कोसते रहोगे,अपने भाग्य को, अंधकार से निकलने का कुछ तो कर्म को करो । अपने आप को समझों कुछ तो प्रयत्न करो, अपने आप को समझो,उठाओ कदम मत रूकना जब तक ना मिले सफलता। देखना मिट्टी भी हो जाएगी सोना !!! »

मेरा इस दुनिया मे कोई ना रहा !

मेरा इस दुनिया मे कोई ना रहा , मै बेसहारा हो गया। जो मुझे रास्ते दिखा रहे थे , वही पराया हो गया।। कैसे चलुँ,—–कैसे चलूँ मै तो बेसहारा हो गया, ऐ जमाने ना हँसों मेरी गरीबी की रूख से तुझे ही तो चाहा तु ही पराया हो गया।। ज़्योति मो न० 9123155481 , »

मुक्तक

टूटते ख्वाबों के अफसाने बहुत से हैं! चाहत की शमा के परवाने बहुत से हैं! एक तू ही नहीं है आशिक पैमानों का, जामे‍‌-मयकशी के दीवाने बहुत से हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

दर–दर ठोकर खाया हूँ।

दर–दर ठोकर खाया हूँ, जीवन से भी मै हारा हूँ। दे–दे सहारा —- तेरे पास मै आया हूँ।। नही मंजिल मिली नही किनारा,मुझे दे–दे सहारा, मेरा कोई नही ठिकाना है! मै हूँ बेसहारा– मुझे दे– दे सहारा कुछ भी इंसान हूँ, दुनिया ने शिर्फ दी रूसवाई है, तेरे दर पर सुना होती सुनवाई है। एहसान करो मुझ पर मै दर दर ठोकर खा़या हूँ, तेरी ये मतलबी दुनिया मुझे हराया है, दर–दर ठोकर दिलवा... »

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