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हाथों की कलम

हुँ मै तेरी हाथों की कलम गढ़ ले तु गीत नया जोगन। हर शब्द हो तीर लक्ष्य भेदी, मुक्त हो प्रेम का अटुट बंधन। आँखो के कोरो मे बसा ले, बना प्रित का स्वच्छ अंजन। मधुर चमन खिले पाक ईश्क का बागवां मे दहके सूर्ख सुमन। मन मन्दिर मे बसुं बन मुरत, खुशियों मे झुमे तेरी मुदित नयन। हुँ मै तेरी हाथों की कलम। गढ़ ले तु गीत नया जोगन योगेन्द्र कुमार निषाद,घरघोड़ा (छ.ग.) »

मुक्तक

मुक्तक

मुझे तेरे प्यार की आदत नहीं रही! तेरे इंतजार की आदत नहीं रही! जबसे देख लिया है बाँहों में गैर की, तेरे ऐतबार की आदत नहीं रही! रचनाकार- #मिथिलेश_राय »

कविता

धधकते लावा है मेरे सीने मे, जिसमे सेक रही हो रोटी कई महीने से। क्यॉ अब तक पकी नही ,तेरी तंदुरी, क्यॉ बाकी है अब भी ……, हवस की चाह तक पहुचने की दुरी। छोड यह छिछोली नही बस की तेरी। नही हर उस नजर को अधिकार, जिसकी आँखो में है हवस की खुमार। जानते है गर्म होता है जब बदन…… समझ लिया करो उनको है हवस की बुखार। नाजुक दिल मे होता है, भडकते ज्वाला लिये वही बन जाती है एक दिन घातक देखा जा... »

मुक्तक

तेरी आरजू मुझे सोने नहीं देती! तेरे सिवा गैर का होने नहीं देती! धड़कनों में दौड़ती है तेरी तमन्ना, तेरे प्यार को कभी खोने नहीं देती! #महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं »

Dil ki aavaz

Dil… dhadakta Hai sirf…..tumhare liye… Pata nahi wo din kab aayega… Ki jab …wo kahenge …hame bhi Pyar ….he Sirf tumhare… love you…. »

मुक्तक

तेरी कभी दिल से ख्वाहिश नहीं जाती! तेरे ख्यालों की नुमाइश नहीं जाती! जाती नहीं हैं यादें मेरे जिगर से, तेरे दर्द की पैदाइश नहीं जाती! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

हम सभी मरते हैं लेकिन जीते नहीं सभी! जाम को हाथों में लेकर पीते नहीं सभी! हर रोज ढूंढ लेते हैं यादों में दर्द को, अपने जिगर के जख्मों को सीते नहीं सभी! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय »

ik chirag

Ik chirag fr se Jala.. Meri zaat ko raushan krne…. Mjhe fr se wakti zndagi dene.. Lkn mjhe.. Dr lgta hai us Roshni SE.. Chahti Hun Roshni ke saye se b dur rhna Dr lgta hai fr se mchlti ummid se.. Chahti Hun andhere me khojana.. Jise wo chirag b na Roshan kr ske.. Khud bi andhere ka wajood bn Jana. Wo Andhera…. Jise fr ujale ki pyas na ho.. Jise koe wakti lamha Zar Zar na krsake.. Jise ... »

ik chirag

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ik chirag

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