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मुक्तक

कभी-कभी चाहत जंजीर सी लगती है! कभी-कभी सीने में तीर सी लगती है! जब कभी भी होती है यादों की आहट, दर्द की हाथों में लकीर सी लगती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

क्या कर पाया मैं और क्या कर जाऊंगा? तेरे बिना मैं तो यूँ ही मर जाऊंगा! जब कभी तुम देखोगे आईना दिल का, तेरे ख्यालों में तन्हा बिखर जाऊंगा! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

अब चाहतों के हमको नजारे नहीं मिलते! अब ख्वाहिशों के हमको इशारे नहीं मिलते! हर वक्त ढूंढ लेती है तन्हाई दर्द की, अब हौसलों के हमको सहारे नहीं मिलते! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

हर शख्स जमाने में बीमार जैसा है! ख्वाहिशों का मंजर लाचार जैसा है! सहमी हुई तकदीरें हैं इंसानों की, आदमी सदियों से बाजार जैसा है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मेरे दिल की किताब मे मत पुछ क्या लिखा है।

मेरे दिल की किताबों मे मत पुछ क्या लिखा है, धड़कन के हर एक पन्ना मे तेरा नाम लिखा है।। नई जिन्दगी मिला है,तेरे हर मिस्काँल से, अब वही मिस्काँल मेरे जिन्दगी का सबुत बन गया, तेरे — मेरे नाम की। तेरे बिना एक पल भी जीना मेरा मुश्कील है, क्योकि बनकर तेरे नाम की लहूँ मेरे रग मे बह रहा है।। (अब तु–ही बता क्या तेरा फैसला है। ।) ज्योति मो न० 9123155481 »

दिल तोड़के जालिम मत मुस्कुराया करो।

दिल तोड़कर जालिम मत मुस्काराया करो, मेरे प्यार को इतना मत अजमाया करो। तुमको ही देखने आता हूँ ,तेरे गलियों के पान दुकान पर, मुझे देखकर खुद को छुपाया ना करो— कैसे समझाँऊ प्यार, महोब्बत की बात होते अकेले मे— सखियो के संग मिलने मत आया करो। देखकर तुझे कोई फिदा ना हो जाय, इतना सज-धज के काँलेज मत जाया करो!! सीधा ही दिया करो मेरे सवालो का जबाब, बातो मे फँसाकर मेरे मजबुरी का फायदा मत उठाया करो,... »

मुक्तक

कभी चाहत जिंदगी में मर नहीं पाती! कभी दौरे–मुश्किलों से डर नहीं पाती! हर वक्त नाकामी का खौफ़ है लेकिन, कभी आरजू ख्याल से मुकर नहीं पाती! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मैने -हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा

मैने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा, पैसे के लिए आदमी को बदलते देखा। वो जो चलती थी, झनझनाहट की होती अवाज, आज उनकी झनझनाहट की अवाज के लिए कान को तरसते देखा। जिनकी परछाई को देखकर रूक जाते थे हम— आज वो दुसरे के हाथ मे हाथ डालकर मै जाते देखा।। जिनके अवाज मे अपना –पन था, आज वही जुबाएँ ,वही अवाज मे, बिजली जैसे कड़कने की अवाज को देखा। पहले हाथो की इशारो से रूक जाती थी वो– आज चिल्लाने के... »

मुक्तक

आज फिर हाँथों में जाम लिए बैठा हूँ! तेरे..दर्द का पैगाम लिए बैठा हूँ! वस्ल की निगाहों में ठहरी हैं यादें, तेरा फिर लबों पर नाम लिए बैठा हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

मुक्तक

आज फिर हाँथों में जाम लिए बैठा हूँ! तेरे..दर्द का पैगाम लिए बैठा हूँ! वस्ल की निगाहों में ठहरी हैं यादें, तेरा फिर लबों पर नाम लिए बैठा हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

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