Other

आज फिर …

कुछ लिख कर आज फिर मिटा दिया, कुछ बना कर आज फिर बिगाड़ दिया, वो आज भी नहीं आएगा मालूम है हमे, पर फिर भी उसके आने के इन्तजार मे खुद को फिर सँवार लिया ! »

मुक्तक

जो यही सजा है मेरे गुनाह की तो यही सही , लेकिन सुनवाई का एक मौका तो दे ! (निसार) »

मुक्तक

दिल मे दर्द उतना ही रखना जितना आँखों मे समां सके क्योकि जो छलक गया वो लोगो की हंसी का हो गया ! (निसार) »

ख्वाब

कुछ ख्वाब ऐसे थे, कुछ ख्वाब वैसे थे, कुछ दिल के हिस्से थे, कुछ दर्द के किस्से थे, कुछ खुदा को समझाने थे, कुछ खुद को समझने थे, कुछ टूटकर रह गए, कुछ अश्क संग बह गए, कुछ आदत बन गए, कुछ भूल बन गए, कुछ ख्वाब ऐसे थे, कुछ ख्वाब वैसे थे! ( निसार) »

मौला….

मौला अपनी तू रहो मे, बैठे रहने दे छाओ मे एक दिन तो होगा कर्म ये भ्रम तो रहने दे ! चाहे सपनो को सपने रहने दे, लकिन अपने तो रहने दे शिकवे, शिकायत क्या करने है पर कुछ तो हक से कहने दे! »

खुदा से

जब दिल रोए पर अश्क ना हो , जब नफरत हो पर रश्क ना हो , जब सजदा हो पर दुआ ना हो , जब किस्सा हो पर बया ना हो , जब जिन्दा हो पर अहसास ना हो , तब कह दे ना खुदा से अब तू मेरे साथ और बदनाम ना हो ! ‘निसार’ »

खोया बचपन

खोया बचपन

बचपन के  शहर मे जाने , क्यों  ख़ाली से मकान पड़े है सयानेपन के हर जगह पर ऊँचे-ऊँचे बंगले खड़े है कुछ आधुनिकता की आड़ मे लूट गए कुछ को मजबूरियों न लूटा है महँगे खिलौनो की सौदेबाजी मे, बचपन को जाने किसने लूटा है! कहाँ गए जाने जो कागज की कश्ती बनाया करते थे, नन्हे-नन्हे हाथो से मिटटी के घर बनाया करते थे जो पत्थर के टुकड़ो से भी खेल बनाया करते थे ! कोई तो  उनको ढूंढ के ला दो , कोई तो  उनको खोजकर ला दो , मा... »

फूलों की खेती

चन्द्र मोहन किस्कु फूलों की खेती ********** दुनिया में अब बढ़ गया है हिंसा लोग मिलते ही लड़ते है झगड़ते है और हत्या के लिए हथियार हाथ में लेते है दुनिया में अब बढ़ रहा है बोम और हथियारों की संख्या बढ़ रहे है फैाज इसलिए तो फूलों पर कविता लिख रहा हूँ बोना शुरू किया है फूलों की बीज हँसी, हर्ष की स्वप्न, शान्ति की एक दिन बो दूँगा पुरे दुनिया में फूल ही फूल रंग -बिरंगे सुन्दर फूल हँसीवाले स्वप्न और गानेवाल... »

समझाऊँगी क्या मैं तुझको बतलाऊँगी क्या मैं तुझको ! कभी तो अपना जान तू मुझको कभी तो अपना मान तू मुझको ! बस इतना-सा वादा कर दे बस इतना-सा सच्चा कर दे ! मुझको तू अपने काबिल कर दे मुझको तू इतना कामिल कर दे ! »

क्यों मिली नहीं रहमत तेरी अब तक क्या मेरी कोई भूल तेरे दर मे गुनाह मुक़र्र हुई है ! »

Page 1 of 16123»