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पतझड़

शाखों से टूटकर पते पतझड़ की निशानी दे गए! कल थे शान जिन दरख्तों की आज कदमो तले रुंद गए ! साए देते थे जो मोसफिरों को धूप मे आज अपने सहारो को भी छोड़ गए ! दरख्तों का लिबास थे कल तक आज अपना लिहाज भी भूल गए ! पतझड़ आया है तो बहार भी आएगी नई बहार के साथ , नई कोंपले फिर आ जाएगी ! पतझड़ मे जो दरख्ते कहलाए है , फिर पेड कहलाएगे! »

इश्कबाज

इश्कबाज पसंद है मुझे, चाहे इश्क़ में ना पड़ा हूँ कभी, अल्फाज बह जाते है आशिकी देखकर चाहे आशिक़ ना बना हूँ कभी #पंकज »

मौसम

चल रही है ठंडी हवाएं ,आँखों से बादल बरसेगा रात के आगोश में . मेरा मेहताब पिघलेगा मुद्दतों बाद फेंका है एक नजर का टुकड़ा उसने पतझड़ के मौसम में भी , अब तो गुलशन महकेगा @पंकज गर्ग »

बैरन बारिश

बैरन बारिश

Aj Barish fer se beran ban gayi, tanha dil ko fer se mahfil mil gayi, moti gire boondno ke jab balkha ke, kisi anjan chehre ki fer tasveer ban gayi… chupaye rakha armano ko ab tak, band tha dil ka tahkhana, toofan se pahle sannae jesa, dil ka bhi hal tha veerana ghiri ghanghor ghata kali, kesa ye boondno ka itrana, dil ke badal bhi garaj uthe, harkat hui fer bachkana lagi jhadi jab saavan ki... »

badal

बादलों बरसने को आँखें तरस गई है तुम तो न बरसे पर आँखें बरस गई है राजेश “अरमान ” »

निसार

निसार होना आसान नहीं , किसी का होना आसान नहीं आस हो जो ना की कुछ भी आसान नहीं , और जब ना और हां का बन्धन ना हो तो निसार होना मुश्किल नहीं ! »

पहचान

रिवाजो से हटकर जो अपनी राह बना ले, जिन्दा वही है , जो अपनी पहचान बना ले ! »

BEST

BEST

Best food= Thoughts Best teacher= Experience Best dress= Smile Best hobby= Service (surplus time) Best medicine= Laughter Best sport= Duty Best lesson= Patience Best book= Life Best student= Attempt Best relation= Love »

जज्बा

जज्बा

एक बार ठान ले तो एक पर्वत  है तू जो अगर यूँ ही बीत जाने दे , तो रेत जो एक आकार दे खुद को , तो एक मूरत है तू जो बस यूँ ही छोड दे , तो गीली मिट्टी जो तू चाहे तो खुद को रंगों में ढाल के इंद्रधनुष बन जा जो बारिश के साथ बह जाये, तो मटमैला कर दे सब तेरी किस्मत तेरे खुद के जज्बे से है जज्बा रहा तो जिन्दादिली भी रहेगी नहीं तो जिंदगी बिना जीवन सी रहेगी.. »

समर्पण…

समर्पण…

बाती की इक रोज ,दीए से लड़ाई हो गयी मगरूर हुई बाती खुद पर, लगी दीए पर भड़कने मैं जलकर खाक हो जाती हूँ, और तारीफे बटोरता है तू , नहीं जलूंगी तेरे साथ अब ओर तय कर लिया मैंने , तू ढूंढ ले कोई ओर अब नहीं रहना संग तेरे ! चुप-चाप सुनता हुआ दिया अब बोल उठा तू जलकर खाक हो जाती है तेरी कालस तो मैं ही समेटता हूँ तू जलती है जब-जब तेरी तपिस तो मैं ही सहता हूँ ! कैसे ढूंढ लू कोई ओर मुझे कोई और मिलेगा नहीं , तुझे... »

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