Independence Day

आजादी

आजादी

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाये। गुलामी में भी हमारे दिल में देश की शान काफी थी, तोड़ देते थे होंसला अंग्रेजो का हममे जान काफी थी, पहनते थे कुर्ता और पाजामा खादी की पहचान काफी थी, गांधी जी के मजबूत इरादों की मुस्कान काफी थी, आजाद भारत देश को स्वतंत्र भाषा विचार को, लड़ कर मर मिट जाने की तैयार फ़ौज काफी थी, गुलामी की जंजीरों से जकड़े रहे हर वीर में, स्वतंत्र भारत माँ को देखने की तस्वीर काफी थी॥ राही (अंज... »

मेरे भारत का झंडा तब बिन शोकसभा झुक जाता है

देख तिरंगे की लाचारी कैसे हर्शाएं हम आजादी पर कैसे नांचे कैसे झूमे गायें हम   भारत माँ का झंडा जब पैरों के नीचे आता है और जहाँ अफ्जालों पर मार्च निकाला जाता है जिस देश में दीन-हीन कोई पत्ते चाटकर सोता है भूख की खातिर कोई यहाँ जब बच्चे बेच कर रोता है जहाँ अमीरों के हाथो से बेटिया नोची जाती हैं जब कोई सांसद संसद में महिला को गाली दे जाता है मेरे भारत का झंडा तब बिन शोकसभा झुक जाता है इस झंडे को... »

“भागीरथ जी प्रकट हो”

पाकिस्तान की औखात को देखकर ये भाव उठे, कोई गलती हो तो क्षमा करना — जल जला उठा वो सैनिक, जिसमें जान बाकी है, लहु से श्रंगार कर दुंगा, बस यही अहसान बाकी है, काफूर हो उठा हिमगिरी,यह जवां अविनाशी है, महक उठा ये कश्मीर, खुश हो रहा काशी है, किसको क्या फांसी दी,तुम ये क्युँ बतलाते हो, कईयों को मार दिया, क्युँ अब रूह जलाते हो, तुम क्या पाकिस्तानी गोदियों में पले-बढ़े हुए हो, जो ऐक याकूबी मुर्दे पर स... »

मैं आर देख रहा था, मैं पार देख रहा था…

मैं आर देख रहा था, मैं पार देख रहा था, बंद लतीफों की खड़े -खड़े मल्हार देख रहा था, सोचा था तंग आकर लिखूंगा ये सब,मगर ये क्या, कागज के टुकडों में दफन विचार देख रहा था, मैं आर देख रहा था, मैं पार देख रहा था, पग भारी है उनके, जिनके किस्सों की भरमार देख रहा था, मैं यहीं कहीं लड़की का चलता-फिरता बाजार देख रहा था, कोशिश मत करो तुम सरकार-ए-आलम बात छुपाने की, जब तुम्हारी ही कली को, बागों में शर्मसार देख र... »

तिरंगा।

तिरंगा। वस्त्र का टुकडा़नहीं, अस्मिता का मान है। ये तिरंगा विश्व में निज गर्व की पहचान है। केसरी ये रंग पराक्रम शौर्य है स्वाभिमान है। श्वेत वर्णी शान्ति की ये साधना का ध्यान है। ये हरित समृद्धि पट्टी ऐश्वर्य का परिधान है। और चक्र नीला चौबीस घंटे  कराता ज्ञान है। दिलों से ऊंचा सदा ही स्थान इसको चाहिए। ये सुरक्षा चादरीबाहों से न नीचा होना चाहिए। नीचे न झुक जाए येे सूचक बने अपमान का। शीश पर धारे फिर... »

तिरंगा

तिरंगा

आजादी की शान तिरंगा। तोड़ तिलस्म अंग्रेजों की , लेकर आया नवविहान तिरंगा। शमां ए वतन की लौ  पर कुर्बान तिरंगा । हर हिन्दूस्तानी की जान तिरंगा। आजादी के इस पावन पर्व पर आओ मिल कर सब गाए मेरी आन बान शान तिरंगा।   किशोर कुमार झा। मुखर्जी नगर, दिल्ली -110009     »

जश्न-ए-आजादी में “इन भारतीयों” को न भूलना…

यहाँ जिस्म ढकने की जद्दोजहद में… मरते हैं लाखों..कफ़न सीते सीते… जरा गौर से उनके चेहरों को देखो… हँसते हैं कैसे जहर पीते पीते… वो अपने हक से मुखातिब नहीं हैं… नहीं बात ऐसी जरा भी नहीं है… उन्हें ऐसे जीने की आदत पड़ी है… यहाँ जिन्दगी सौ बरस जीते जीते… कल देश में हर जगह जश्न होगा… वादे तुम्हारे समां बांध देंगे… मगर मुफलिसों की बड़ी भीड़ कल भी… खड़ी ही रहेगी तपन सहते सहते… -सोनित »

वो हिन्द का सपूत है..

लहू लुहान जिस्म रक्त आँख में चड़ा हुआ.. गिरा मगर झुका नहीं..पकड़ ध्वजा खड़ा हुआ.. वो सिंह सा दहाड़ता.. वो पर्वतें उखाड़ता.. जो बढ़ रहा है देख तू वो हिन्द का सपूत है.. वो दुश्मनों पे टूटता है देख काल की तरह.. ज्यों धरा पे फूटता घटा विशाल की तरह.. स्वन्त्रता के यज्ञ में वो आहुति चढ़ा हुआ.. जो जल रहा है देख तू वो हिन्द का सपूत है.. वो सोचता है कीमतों में चाहे उसकी जान हो.. मुकुटमणि स्वतंत्रता माँ भारती की श... »

गाथा आजादी की

गाथा आजादी की

लहू के हरेक बूँद से लिखी हुई कहानी है I मेरे हिन्द की आजादी की गाथा जरा निराली है II विश्वास की नदियाँ यहा, निश्छल सा प्यार था कभी रहते खुशी से सब यहा, न द्वेष लेशमात्र भी कुछ धूर्त आ गए यहा, कपटी दोस्त की तरह इस देश को बेच दिया, हृदय हीन गुलामो की तरह कैद कर दिया हमें अपने ही परिवेश में कुंठित हुआ है जन जन ,देखो आज इस तरह जिस्म पे हुए हरेक जुल्म की निशानी है I मेरे हिन्द की आजादी की गाथा जरा निरा... »

कुर्बानी के दम पे मिली है आजादी

कुर्बानी के दम पे मिली है आजादी •~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~• उनसे ज्यादा है किसी का कोई तो सम्मान बोलो जिसके आगे झुक गया है सारा हिन्दूस्तान बोलो मुक्ति के जो मार्ग पर निकले थे ले अरमान बोलो आखरी वही साँस तक लड़ते हुये बलिदान बोलो मातृभूमि पर जो न्योछावर हो गये, वही प्राण थे भारतमाता के राजदुलारे वही तो प्रिये संतान थे जान की बाजी लगाकर काट बन्धन दासता के बेड़ियों से मुक्त माँ को करने में ही हुये कुर... »

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