Sher-o-Shayari

सुनने वाला

जब बोलते रहे तो कोई सुनने वाला न मिला, जब खामोश हो गए तो बहुत सुना गया हमें।। राही (अंजाना) »

Sabera

मान लिया था हमने हर सबेरा है अपना, फिर कुछ यूँ हुआ के कभी रात हि ना गुजरी… —विद्या भारती — »

सपने

तुझको अपने सिरहाने रख सोता हूँ, मैं तुझ संग ही अपने सपने बोता हूँ।। राही (अंजाना) »

इंतज़ार

इंतज़ार के बाद मिलने का मज़ा आ गया, सुबह दरवाजे पर मेरे उसका तार आ गया।। राही (अंजाना) »

रंग

बारिश में नहाये तो हम सभी थे मगर, जिनके उतरने थे सारे रंग उतर गए।। राही (अंजाना) »

आईना

उसके चेहरे को देखकर मैं दीवाना हो गया, मेरी छोड़ो आइना भी उसका दीवाना हो गया।। राही (अंजाना) »

दुआ

कोई दवा कोई दुआ काम न आई, आँख जब बन्द की तो सामने माँ आई।। राही (अंजाना) »

दवा

यार इसमें तो मज़ा ही नहीं, कोई हमसे खफा ही नहीं, इश्क है मर्ज़ है दोस्त, इसकी कोई दवा ही नहीं।। राही (अंजाना) »

लकीरें

हाथों की लकीरों में तेरा नाम नही देखा तो, लेकर कलम हाथों में खुद ही तेरा नाम लिख लिया।। राही (अंजाना) »

सैनिक

मोहरे बड़े होकर भी पीछे खड़े रहते हैं, बिसात पर सैनिकों का ओहदा ज़रा हटके है।। राही (अंजाना) »

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