Sher-o-Shayari

मैं अमन पसंद हूँ

मैं अमन पसंद हूँ, मेरे शहर में दंगा नहीं शांति रहने दो..!! लाल और हरे में मत बांटो, मेरी छत पर तिरंगा रहने दो..!! ??जयहिन्द??✍वाहिद »

बातें बड़ी बनाने लगे, हम शहर में पाँव जमाने लगे

बातें बड़ी बनाने लगे, हम शहर में पाँव जमाने लगे

बातें बड़ी बनाने लगे, हम शहर में पाँव जमाने लगे, दिन में सोया करते थे, हम रातों को साथ जगाने लगे।। राही (अंजाना) »

बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है

बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है

बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है, चोटी की हर गुथ में वो मेरे गम बुहारा करती है।। राही (अंजाना) »

Guftagu Band Na Ho

Guftagu Band Na Ho

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मुख पर हँसी और दिल में दर्द लिए बैठे हैं

मुख पर हँसी और दिल में दर्द लिए बैठे हैं, कुछ लोग इसी तरह हमें गुमराह किये बैठे हैं, रहते हैं साथ मगर खुद से दूर किये बैठे हैं, कुछ लोग जलकर भी रौशनी किये बैठे हैं।। राही (अंजाना) »

Harkat

Ek hasin harkat hai, esa ho jana tumhari ankhon main chalna aur kho jana… »

चाहतों की चाह में बहुत आगे निकल आये

चाहतों की चाह में बहुत आगे निकल आये, कुछ लोग देखो अपनों से आगे निकल आये।। राही अंजाना »

उसको चाहा तो मोहब्बत की तकलीफ नजर आई

उसको चाहा तो मोहब्बत की तकलीफ नजर आई ! वरना इस मोहब्बत की बस तारीफ़ सुना करते थे..!!?Wahid✍ »

तिरंगा

तिरंगा

सरहद के मौसमों में जो बेरंगा हो जाता है, तिरंगे से लिपट कर एक दिन वो तिरंगा हो जाता है।। राही (अंजाना) »

उम्र

उम्र तो बस तेरी कोख में बढ़ रही थी, अब तो हर पल जिंदगी घटटी नज़र आती है।। राही (अंजाना) »

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