Sher-o-Shayari

निशानी ऊँगली पर पहन कर मेरी छुपाते हुए

निशानी ऊँगली पर पहन कर मेरी छुपाते हुए

निशानी ऊँगली पर पहन कर मेरी छुपाते हुए, वक्त-वक्त पर वक्त का गिनना तेरा अच्छा लगा, कहा बहुत कुछ ख़्वाबों में हर रात तुमने मुझसे, और मुझे तेरा मुझसे नज़रें चुराना अच्छा लगा।। – राही (अंजाना) »

बारिश

बारिश भी कहीं भी कभी भी हो जाती है सूखे मन को नम कर से ऐसा कोई नहीं »

किस से सिकवा करू

किस से सिकवा करू, किस से सिकायत करू ; जब अपना समझा ही नही तो किस से दिल की बात कहूँ। ज्योति। »

फूलों से फूल कर अक्सर कुप्पा हो जाते हैं

फूलों से फूल कर अक्सर कुप्पा हो जाते हैं

फूलों से फूल कर अक्सर कुप्पा हो जाते हैं, चन्द शब्द मेरे तुमसे जब चुप्पा हो जाते हैं।। – राही (अंजाना) »

बेमोल थे जो झूठे बाज़ार में

बेमोल थे जो झूठे बाज़ार में

बेमोल थे जो झूठे बाज़ार में, वो सारे साहूकार बिक गए, मैं अनमोल ही था सच है,जो मेरा कोई मोल न लगा।। – राही (अंजाना) »

सरहद के मौसमों में जो बेरंगा हो जाता है

सरहद के मौसमों में जो बेरंगा हो जाता है, तिरंगे से लिपट कर एक दिन वो तिरंगा हो जाता है।। राही (अंजाना) »

मैं अमन पसंद हूँ

मैं अमन पसंद हूँ, मेरे शहर में दंगा नहीं शांति रहने दो..!! लाल और हरे में मत बांटो, मेरी छत पर तिरंगा रहने दो..!! 🇮🇳जयहिन्द🇮🇳✍वाहिद »

बातें बड़ी बनाने लगे, हम शहर में पाँव जमाने लगे

बातें बड़ी बनाने लगे, हम शहर में पाँव जमाने लगे

बातें बड़ी बनाने लगे, हम शहर में पाँव जमाने लगे, दिन में सोया करते थे, हम रातों को साथ जगाने लगे।। राही (अंजाना) »

बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है

बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है

बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है, चोटी की हर गुथ में वो मेरे गम बुहारा करती है।। राही (अंजाना) »

Guftagu Band Na Ho

Guftagu Band Na Ho

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