Sher-o-Shayari

वही पुरानी तसल्ली

सो जाते हैं जो सोचकर, उन्हे ख्वाब नहीं मिलता। जिनकी परछाइ होती है मुहब्बत, उन्हे जवाब नहीं मिलता। »

वही पुरानी तसल्ली

हुई थी खता हमसे, हमारा ही वो नजर था रखा था कदम जिस गली मे, वो गली ही उनका शहर था। By Rajjneesh »

वही पुरानी तसल्ली

देखते हो उस शख्स को तुम, By जिसे तुम शाद करते हो। नाम मुहब्बत रहता है बस , Rajjneesh बाकी तुम बर्बाद करते हो। »

वही पुरानी तसल्ली

बहती है हवा रातों को, तो कभी चमकता सितारा होता है। होती है मोहब्बत जिसे बार बार, उसे बेवफ़ाई का सहारा होता है। By Rajjneesh »

वही पुरानी तसल्ली

फ़ुर्सत मिले तो पढ़ लिया करो 2 लाइने मेरे शायरी की, ये वो शायरी है जो कभी गलत नहीं होती। »

वही पुरानी तसल्ली

चलाता रहता हूँ बैठ के साख पे अपनी mobile, गर्मी है साहब पसीने से भीगना नहीं चाहता। Shayar Rajjneesh kann »

वही पुरानी तसल्ली

मुहब्बत है मुहब्बत का अंजाम बता दो, जिसे शायरी पसंद है वो अपना नाम बता दो। Shayar Rajjneesh kann »

वही पुरानी तसल्ली

खाक हुआ मेरा, तेरे फसाने मे। मै पागल हुआ, तेरी तस्वीर बनाने मे। Shayar Rajjneesh kann »

वही पुरानी तसल्ली

ज़मीन मुझको समझ कर खुद आसमान लिखा था उसने, मैं था परिंदा वगैर परवाला खुद को उड़ान लिखा था उसने, मौत को देखा है मैं करीब से अपने मुझको पुतला खुद में Jaan लिखा था उसने, मुझे सूखा Patra कह कर खुद को जहान लिखा था उसने , अरे Bewafa हूं मैं ऐसा सोच कर हाथों पे किसी और का Naam लिखा था उसने, Please contact me for any show or function at this number 6393465662 Shayar Rajjneesh kann »

वही पुरानी तसल्ली

रोशनी दिन मे थी अंधेरी शाम लिखा था उसने, वाकिब मैं था जैसे खुद को अंजान लिखा था उसने, नज़रे पलट ली निगाहों से अपने मुझको मिट्टी खुद को शान लिखा था उसने, अरे बेवफा हूँ ऐसा सोच कर अपने हाथों पे किसी और का नाम लिखा था उसने।। Please contact me for any show or function at this number 6393465662 Shayar Rajjneesh kann »

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