Sher-o-Shayari

दफ़न कर दूं

दफ़न कर दूं अब अहसासों को यही इक काम अब ठीक रहेगा »

yaad krte hai

Kabhi hum aahein bharte hai, kabhi fariyad karte hai… Tumhe aye bhulne wale hum ab tak yaad karte hai. »

लापता हूं

क्या ठिकाना है मेरा मुझे नहीं पता लापता हूं अरसे से खुद में कहीं »

हार

तेरे बाहों के हार में, सब कुछ हार जाऊं। तुझ पर अपना दिलो – जां मैं वार जाऊं। तुझ से हार कर भी जीत है मेरी ‘देव’, तेरे आगोश में, जन्नत का मैं करार पाऊं। »

आकांक्षाएं

अपनी आकांक्षाओं को, मैं पर देना चाहता हूं। खुले आसमान को, मुट्ठी में कर लेना चाहता हूं। कल्पनाओं को आकार देना इतना भी मुश्किल नहीं, बस अपनी सोच को, नई नजर देना चाहता हूं। देवेश साखरे ‘देव’ »

नया साल

दिल की कलम से ये पैगाम लिखता हूं। तुम्हारे हिस्से खुशियां तमाम लिखता हूं। खुशियों से रोशन हो हर राह तुम्हारा, नये साल का नया कलाम लिखता हूं।। »

नई इबारतें

लोग पुराने अफ़साने लिखते है मैं नई इबारतें लिखना चाहती हूं »

मैं मुझी में खो गई हूं शायद

खुद को अब किस जगह ढ़ूढ़ूं अब मैं मैं मुझी में खो गई हूं शायद »

एक यादृच्छिक विचार

तुम गणनों में जीते हो, हम गणों में जीते हैं। तुम सिफ़र में जीते हो, हम सफ़र में जीते हैं। »

दर्द के हर एक कतरे को

दर्द के हर एक कतरे को सहेज कर रखती हूं मैं कब जाने कौन सा कतरा तुम्हे मेरे करीब ले आये »

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