Sher-o-Shayari

माँ

मेरी साँसों में उसके आंचल की खुशबू महकती है। तुम गौर से देखो मुझमें मेरी मां झलकती है।। Chandani »

फ़िक्र

जब कभी भी वो मेरा कहीं ज़िक्र करता है, मुझे लगता है वो बेशक मेरी फ़िक्र करता है।। राही अंजाना »

अंताक्षरी

तेरे प्यार की अंताक्षरी में राही हार कर, बैठा है जंग शब्दों से अक्षरी जीत कर।। राही अंजाना »

इश्क- विश्क से दुर रहो!!

मन को समझाया था मैने..इस इश्क विश्क से दूर रहो पर ये मन,मन ही मन मै अपनी मन मानी कर बैठा____!!!! »

इश्क- विश्क से दुर रहो!!

मन को समझाया था मैने..इस इश्क विश्क से दूर रहो पर ये मन,मन ही मन मै अपनी मन मानी कर बैठा____!!!! »

बुझते चराग

बुझते चराग है हम, हवा न दो सारा शहर जला देंगे खुद को शेर समझने वाले, कभी लड़कर देखो तुम्हे गीदड़ बना देंगे है शक्ति इतनी मुझमें की, तुम कहो तो कांटो के शहर में फूल सजा देंगे बुझते चराग है………… »

कहां कह पाती हूँ मैं कुछ तुमसे

कहां कह पाती हूँ मैं कुछ तुमसे अल्फ़ाज जज्बातों का साथ ही नही देते। »

तन्हाई

कभी किताबो का सहारा लिया, कभी भीड में शामिल हो गए, तन्हाई मगर तुझको जुदा कर न सके। »

Mansoobe

Yeh jo kismat ke mansube jane kya ye soch rahe hain Akele milu jo inse kabhi mai lagta hai ye noch rahe hain Raah badi thi lambi yaaron mar mar kar ye kaat rahe hain Humbhi kuch sapne lekar jiwan rekha jaanch rahe hain »

मजबूरी

मजबूरियों से भरे कटोरे के चुल्लू भर पानी को देख, समन्दर भी हार कर एक दिन आंसुओं में डूब गया। राही अंजाना »

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