Sher-o-Shayari

मुक्तक 18

बढ़ी है तीरगी रूश्वाईयों  में  , ज़रा अपनी नज़र तुम बंद रखना.. …atr »

मुक्तक 17

करोगे क़त्ल क्या हमको दरिंदो , हमारे हर्फ़ रूहानी, हमारी बात रूहानी.. …atr »

मुक्तक 16

कभी मेरी निगाहों को जहाँ दिखता था तुझमे मीर , मगर अब दौर ऐसा है , खुदी पुरज़ोर हावी है .. …atr »

मुक्तक 15

कहीं है दफ़्न  तुम्हारा ग़म हमारे दिल के कोने में, हमे भी मीर लाशो को बहुत रखना नहीं आता.. …atr »

मुक्तक 14

अभी   मुझमे  जरा  तू  है ,जरा  मैं  हूँ तेरे  दिल  में .. मगर  अब  अपने  अपने  में  जरा  सा  तू , जरा  मैं  हूँ .. …atr »

……….चाहत होती है!

पराये जज्बातों को अपना बनाने की चाहत होती है किसी की आहों में डूब जाने की चाहत होती है उम्र भर चलते रहे तनहाईयों के साथ हम उनके साथ चंद कदम चलने की चाहत होती है »

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर चले गये जो इकबार, फिर ना आयेंगे कभी »

छुअन

कल उसने दिल को कुछ ऐसे छुआ कि साँसे तो थम गई पर धडकनें दौड़ने लगी !!!! »

कौन कहता है

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है वो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है (ख़लिश = चुभन, वेदना) रूह को शाद करे, दिल को जो पुरनूर करे हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है (शाद = प्रसन्न), (पुरनूर = प्रकाशमान, ज्योतिर्मय), (तनवीर = रौशनी, प्रकाश) ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोकें दिल में जो बात हो आँखों से अयाँ होती है (ज़ब्त-ए-... »

कहने को तो बस

कहने को तो बस      मेरे दिल ने , तेरे दिल पे              कुछ भरोसे ही तो किए थे  शिकायत भी किस कचहरी करूँ                 तेरे आस्मानी वादों की रसीदी टिकट पे                             अरमानो के लहू से दस्तखत जो नही किए थे                                                                                                                           …… यूई विजय शर्मा »

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