Sher-o-Shayari

मुक्तक 31

दिल  के आइने में मीर तेरा अक्श देखूंगा , कभी सोचा नहीं था तुमपे इतना प्यार आएगा . …atr »

मुक्तक 30

तेरे  जाने  से सब  ये सोचते  है मैं अकेला  हूँ  , उन्हें  शायद खबर न हो कि तेरी याद  बाक़ी है . मैं तनहा कैसे समझूँ मीर इन ख़ाली मकानों को , तेरे और मेरे प्रेम का वो सहज संवाद बाक़ी है. . …atr »

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे उमडने को आतुर है ज़ज्बात मिरे वो तो अल्फ़ाज़ हैं कि कहीं खोये हुए है नहीं तो इक नज़्म लिख देते अश्क मिरे »

मुक्तक 28

जवां दिल था , जवां धड़कन , जवां सांसे , जवां मन था , मगर बस मीर इतना था, जहाँ वो थी वहां मन था .. …atr »

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना, दिल तो कल भी रेगिस्तान था और आज भी है »

एक अरसे से

एक अरसे से उनसे नजर नहीं मिली जमाना गुजर गया किसी को देखे हुए   »

सच जो लिक्खा, तो———————

‘सच जो लिक्खा, तो ये मुमकिन है कि फंस जाओ तुम, मुकरना चाहो, तो हर बात जुबानी  करना।’ ………सतीश कसेरा »

उसे मालूम था मुझको————-

‘उसे मालूम था मुझको जरुरत है बहुत उसकी, इसी खातिर मेरी नाराजगी में भी, वो घर आता रहा।’ …..सतीश कसेरा »

बाद मुद्दत के मिला तो—–

‘बाद मुद्दत के मिला तो लिपट—लिपट के ​मिला, रोज मिलने से तो ये मिलना बडा अच्छा लगा।’ …..सतीश कसेरा »

‘मैं दूर तक भी आ गया……….^

‘मैं दूर तक भी आ गया, पर वो वहीं पे खडा रहा ये उसको कैसे था पता, मैं मुड के देखूंगा जरुर।’ ……….सतीश कसेरा »

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