Sher-o-Shayari

m kb tanha hui

m kb tanha hui “jnab” meri  to masrufiyat hi tumse h??? »

roj mera katal

  rojj mera katal hota h roj m smbhal jati hu.. jiddi tum bhut ho.. jiddi km hum b nhi »

” कुछ ऐसा लिखूँ “

कुछ ऐसा लिखूँ , की पढ़ने वाले को लगे … मेरा एक – एक  अल्फ़ाज , गहरा हैँ … खों जाये वो मेरे अल्फाज़ो की महफ़िल में .. लगे उसे , मानो आज वक़्त , ठहरा हैं.. यादगार हों जाये उसके लिए , मेरी हर इक सुखनवरी …. एहसास हो , जैसे….. रौनक के पहरे से रोशन उसका , चेहरा हैं ..   पंकजोम ” प्रेम “ »

” सुराही – ए – मोहब्त “

दिल बेचैन हुआ , तो उसके दीदार का दिया दिलासा हैं ….. जाने वाले कल चले गए , लेकिन आज भी उनके लौट आने की …. छोटी सी आशा हैं ….. अब कोई तो बने सुराही – ए – मोहब्त …. क्योंकि ये सुख़नवर बहुत , प्यासा हैं ….   पंकजोम ” प्रेम “ »

” वक़्त लगता हैँ यहाँ “

वक़्त लगता हैं यहाँ , इंसान को इंसान समझने में ……. वक़्त लगता हैं यहाँ , पत्थर को भगवान समझने में …… आधी उम्र बीत जाती हैँ सोचने सोचने में .. क्योंकि वक़्त लगता हैं यहाँ , जीने के अरमान समझने में …..   पंकजोम ” प्रेम “ »

“अजनबी” #2Liner-18

ღღ__हमको सताने के मौके, वो छोड़ते नहीं हैं “साहब”; . कल ख़्वाब में भी आए, तो अजनबी बनकर !!…….‪#‎अक्स . www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/ »

na hum barbaad hue

Na hum barbaad hue, Na hum aabad hue Jane kaise “janbaaj” hue??? »

दिल की बात

मैं अल्फ़ाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ, मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ, कब पूछा मैने की क्यूं दूर हो मुझसे, मैं दिल रखता हूँ तेरे हलात समझता हूँ…! »

समझों तो यहीँ मोहब्त हैं

ये अल्फाज़ , अल्फ़ाज़ ही नहीं , दिल की ज़ुबानी हैं ….. इन्होंने ज़न्नत को , जो जमीं पर लाने की ठानी हैं … साथ देने को कई मरतबा भीग जाती हैं पलकें ….. समझों तो यही मोहब्त हैँ , ना समझों तो पानी हैं…..   पंकजोम ” प्रेम “ »

“इन्तजार”

“इन्तजार” ! बहुत ‘मतलबी’ लफ्ज़ है ना ‘साहब’ ?? ღღ__रख लो तो अमानत, दे-दो तो इक ज़मानत; . ღღ__चाहो तो मोहब्बत, सोचो तो सिर्फ नफ़रत, काट तो दो तो इक उम्र, और जी लो तो ज़िन्दगी !!……‪#‎अक्स »

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