Sher-o-Shayari

तालीम

तालीम कुछ गिनती की यूँ काम आई बस जाती सांसों को गिनता रह गया राजेश’अरमान’ »

सच ने जब

सच ने जब भी तोडा है दम झूठ ने ही उसे अग्नि दी है राजेश’अरमान’ »

था वो गुलाब

था वो गुलाब के मानिंद नज़र बस तेरी काटों पे गड़ी मैंने भी महसूस किया कैक्टस को नज़रे जो कभी फूलों पे पड़ी राजेश’अरमान’ »

जब अपनी ही

जब अपनी ही साँसें एहसान जताने लगे समझ लो साँसें भी अपनी हो गई है राजेश’अरमान’ »

कीमत

धर्म की दूकान सदियों से चल रही है , कीमत तो चुकाई पर सामान नहीं मिला राजेश’अरमान’ »

बिखरी जा रही

बिखरी जा रही ज़िंदगी कुछ तेज रफ़्तार से कोई मोहलत नहीं कुछ भी दुरुस्त करने को राजेश’अरमान’ »

तेरी बेरुखी

तेरी बेरुखी इस कदर काम कर गई बेवज़ह वक़्त को बदनाम कर गई रिश्तों पे पड़ी धूल जब जमने  लगी ख़ामोशी के राज़ सरेआम  कर गई राजेश’अरमान’ »

काफिला

हर फैसले मेरे तेरे क़दमों में थे तूने क़दमों का फ़ासला कर लिया न हो दरम्यां सांसें भी अपनी लेकिन , तूने ज़ख्मों का काफिला चुन लिया राजेश’अरमान’ »

अजैविक गम

अजैविक गम की खाद से ख़ुशी हो गई बोन्साई राजेश’अरमान’ »

होठों पे

होठों पे ख़ामोशी की लहरें ढूंढ़ती है लफ़्ज़ों के समुन्दर राजेश’अरमान’ »

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