Sher-o-Shayari

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे उमडने को आतुर है ज़ज्बात मिरे वो तो अल्फ़ाज़ हैं कि कहीं खोये हुए है नहीं तो इक नज़्म लिख देते अश्क मिरे »

मुक्तक 28

जवां दिल था , जवां धड़कन , जवां सांसे , जवां मन था , मगर बस मीर इतना था, जहाँ वो थी वहां मन था .. …atr »

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना, दिल तो कल भी रेगिस्तान था और आज भी है »

एक अरसे से

एक अरसे से उनसे नजर नहीं मिली जमाना गुजर गया किसी को देखे हुए   »

सच जो लिक्खा, तो———————

‘सच जो लिक्खा, तो ये मुमकिन है कि फंस जाओ तुम, मुकरना चाहो, तो हर बात जुबानी  करना।’ ………सतीश कसेरा »

उसे मालूम था मुझको————-

‘उसे मालूम था मुझको जरुरत है बहुत उसकी, इसी खातिर मेरी नाराजगी में भी, वो घर आता रहा।’ …..सतीश कसेरा »

बाद मुद्दत के मिला तो—–

‘बाद मुद्दत के मिला तो लिपट—लिपट के ​मिला, रोज मिलने से तो ये मिलना बडा अच्छा लगा।’ …..सतीश कसेरा »

‘मैं दूर तक भी आ गया……….^

‘मैं दूर तक भी आ गया, पर वो वहीं पे खडा रहा ये उसको कैसे था पता, मैं मुड के देखूंगा जरुर।’ ……….सतीश कसेरा »

शागिर्द ए शाम

जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करेंजुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें »

मुक्तक 29

ढूंढा जिसे गली में, शहरा में शाम में , दीदार उसका हो गया बस एक ज़ाम में. …atr »

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