Sher-o-Shayari

मुझको पिलाओ यारो…..

आज फिर जी भर के मुझको पिलाओ यारो, मैं तो झूमा हूँ, मुझे और झुमाओ यारो.. आज इतनी पिलाओ कि फिर होश न रहे, अब तो साकी से मुझे और दिलाओ यारो.. रात आधी है बंद है मयकदा, मेरे जीने के लिए इसको खुलाओ यारो.. पी पी के मरने में वक़्त लगेगा मुझे; आज ही बंद करके मय न जलाओ यारो. फिर कभी याद में उसकी न धुआं दिल से उठे , इसलिए दिल में लगी आग बुझाओ यारो… आज फिर जी भर के मुझको पिलाओ यारो.. …atr »

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें जब मेरे शानों पे बिखरती है सुलझ सी जाती है मेरी उलझी हुई जिंदगी »

न उस रात चांदनी होती

न उस रात चांदनी होती

न उस रात चांदनी होती न वो चांद सा चेहरा दिखता न मासूम मोहब्बत होती न नादान दिला ताउम्र तडपता »

मैं तो सन्नाटा हूं

ये तो मुमकिन नही यूं ही फ़ना हो जाऊं मैं तो सन्नाटा हूं फैलूं तो सदा हो जाऊं »

सलाखें ग़ज़ल गाती हैं

अब तो उनके घर से सदायें आती हैं ,जो कभी मेरे न थे उनकी भी दुआएं आती हैं … सुना है उन मकानों में हज़ारो कत्लखाने हैं , जहाँ दिल चूर होते हैं , सलाखें ग़ज़ल गाती हैं… …… …atr »

…पुरानी नजरों से

उनको हर रोज नये चांद सा नया पाया हमने मगर उन्होने हमें देखा वही पुरानी नजरों से »

शागिर्द ए शाम

जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करें जुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें »

कैसे करें शिकवे

कैसे करें शिकवे गिले हम उनसे उनकी हर मासूम खता के हम खिदमतगार है »

ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त

ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त है जो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहीं रब्तः संबंध   »

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