Sher-o-Shayari

दास्तान

इक दास्तान है दबी दिल में कहीं कोई सुने तो हम सुनाये कभी| »

किताब हो जाओ

नेट के इस ज़माने में ऐ ” प्रेम ” ख़ुद ही तुम इक किताब हो जाओ …. पंकजोम ” प्रेम “ »

पहरेदार

मेरे हर ख़्वाब पर तेरा ही पहरा है। अब कोई और इनका पहरेदार नहीं।   »

Safai kisi ko dena nahi

Jo log mujhe samhte hai, Unhe mujhse safai chahiye nahi…. Or jo log mujhe samjhte hi nahi, Unhe safai dene ka koi fayda bhi nahi…. »

वो परछाईं सा साथ चलता रहा है

वो परछाईं सा साथ चलता रहा है, कभी दिखता तो कभी छिपता रहा है, दिन के उजाले की शायद समझ है उसको, तभी अंधेरे में ही अक्सर मिलता रहा है, कभी चाँद सा घटता तो कभी बढ़ता रहा है, हर हाल में वो मुझसे रुख करता रहा है॥ – राही (अंजाना) »

जिंदगी

गुजरती जाती है जिंदगी चुपके से लम्हो में छुपकर बहुत ढूढता हूं इसे, मगर कभी मिलती ही नहीं »

इक फरियाद

इक फरियाद थी मेरे दिल की आरजू थी इक दबी दबी सी सब अधूरी ही रह जायेंगी कह कर गया था वो अभी »

प्यास अधूरी

सारा का सारा सागर हो , फिर भी , प्यास अधूरी । अगर भाग्य में प्यास लिखी , यह.किस्मत की मजबूरी। जानकी प्रसाद विवश »

तेरी आँखों के बिस्तर पर अपने प्यार की चादर बिछा दूँ क्या?

तेरी आँखों के बिस्तर पर अपने प्यार की चादर बिछा दूँ क्या? तेरे ख़्वाबों के तकिये के सिरहाने मैं सर टिका लूँ क्या? कर दूँ मैं मेरे दिल के जज़्बात तेरे नाम सारे, दे इजाज़त के तेरी आँखों से मेरी आँखें मिला लूँ क्या? अच्छा लगता है मुझे तेरी पलकों का आँचल, तू कहे तो खुद को इस आँचल में छुपा लूँ क्या? – राही (अंजाना) »

प्यार की कैद

प्यार की कैद से रिहाई रव करे न कभी । इश्क की रिहाई से ,मौत भली होती है । – जानकी प्रसाद ‘विवश’ »

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