Sher-o-Shayari

घर

अब घर भी नहीं घर की तमन्ना भी नहीं है मुद्दत हुई सोचा था कि घर जाएँगे इक दिन »

कारीगर

दिलों को सिलने वाला कारीगर ढूंढ निकाला, हार कर जितने वाला बाज़ीगर ढूंढ निकाला, »

इश्क़ की इलायची

कब इश्क़ की इलायची जिंदगी में घुलती है जिंदग़ी में महक तभी ताउम्र ठहरती है »

जात

लोग पूछते है मेरी जात क्या है, उन सबके लिए मेरी माँ का नाम ही काफी है। »

जब होगा दीदार रब का

जब होगा दीदार रब का तो पूछुंगी मैं की तेरी इबादत मोहब्बत में इतनी अड़चने क्यों हैं »

कोई क्या कहता है

कोई क्या कहता है परवाह किसे है आंखे जब मुहब्बत से रोशन है तो रातो दिन की फिक्र किसे है »

वही पुरानी तसल्ली

खूब निभाया था जिसने वो मुश्किल की बात थी मिला मुकद्दर मे जो मेरे meri औकात थी Rajjneesh »

हमारे हर लम्हे की कोशिश

हमारे हर लम्हे की कोशिश तुम्हारी रूह तक जाने की थी मगर अफ़सोस आप ही इससे अनजाने थे »

वही पुरानी तसल्ली

वो जो कमी थी मैं काबिल न हुआ, मेरे नसीब मे मुहब्बत कभी काबिल न हुआ। Rajjneesh »

वही पुरानी तसल्ली

तेरे मुहब्बत मे न जाने कितने तराने थे, मै आशिक था जब तेरे फ़साने थे। »

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