Sher-o-Shayari

लफ़्जों का सहारा

अच्छा हुआ जो लफ़्जों का सहारा मिल गया वर्ना अकेले हो गये थे हम महोब्बत से मिल कर »

kabhi kabhi yad ati h teri ruswaiya, dil  udas ho jata h yad jane se pahle, sochta hu waqt bura h ya tum. tumne chhoda tha mughe jis mod par, ab bhi khada hu usi mod par. teri intajar me. ab chahe tu aye ya maut aye, sab kuch chhod diya kismat ke hath me. A LOVER   »

गुजर गये

दिन कुछ लम्हों आड़ में गुजर गये हम आपके इश्क की आड़ में गुजर गये »

दुआ …

एक सुबह दे दे ऐसी , जो मेरा इंसाफ क़र दे! एक शाम बीता दे ऐसी , जो मेरे गुनाह माफ़ कर दे ! तमाशा बहुत हो गया बनने और बिगड़ने का, अब तो कोई ख्वाब अपनी अमानत समझकर अदाकर दे ! »

SHAYARI

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तुझसे  मिलने का  मुझे कोई  आसार भी नहीं दिखता। लेकिन इंतज़ार तेरा करते–करते मैं फिर भी नहीं थकता। »

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उसके जैसी कोई लडकी नहीं मिली कभी आजतक। लेकिन  वो भी तो  मुझे  नहीं मिली कभी आजतक।। उससे मिलके  अनजाने में ही  सँवरे थे हम  लेकिन, बिगडने की कोई वजह भी न मिली कभी आज़तक। »

क्या बतायें

क्या बतायें क्या हो गया है हमें तुम ही बताओ कि क्या बतायें हम »

हर तरफ काँटों का जाल बिखरा है , उसे बचना हो तो कह दो साथ में रहे ! सज धज के आयी है आज महबूबा मेरी, चाँद को कह दो अपनी औकात में रहे !! »

खुद पर तरस आ रहा है।

खुद पर तरस आ रहा है साहिल हमे। अभी तो बाकि है जिंदगी और भी।। »

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