Sher-o-Shayari

वजीर

शतरंज की बिसात का वो मोहरा हूँ मैं, जो आखरी खाने पर पहुँच वजीर बन जाता है।। राही (अंजाना) »

डर

जीत और हार के डर से आगे निकल आया हूँ, मैं राही अपने ही सपनों से आगे निकल आया हूँ।। राही (अंजाना) »

सबूत

कोई गवाह कोई सबूत नहीं मिलेगा तुम्हें, मोहब्बत ख्वाबों में जो जवान हुई है मेरी ।। राही (अंजाना) »

कानून

किसी भी कानूनी दफा से बेख़ौफ़ हूँ मै, तेरी मोहब्बत ऐ हथकड़ी में कैद हूँ मैं।। राही (अंजाना) »

जंजीर

वक्त की जंज़ीर भला मुझे बांधेगी कैसे, मैं तो पानी हूँ पत्थर भी चीरे हैं मैने।। राही (अंजाना) »

ख़ामोशी

ख़ामोशी की कीमत एक दिन मुझे समझ तब आई, जब वो मुझसे कहती गई न हुई मेरी सुनवाई।। राही (अंजाना) »

जानवर

अपने ही अपनों को काटने को बैठे हैं, यहां इसांन जानवर से भी बड़े दांत लिए बैठे हैं।। राही (अंजाना ) »

दीपक

अँधेरे सभी मिटाने को अब दीपक स्वयं जलाने होंगे, मन के मैल मिटाने को अब प्रेम के रंग चढ़ाने होंगे।। राही (अंजाना) »

रिश्ते

रिश्ते

दोस्त तेरी दोस्ती की मस्ती ऐसी भाई हमें, के फिर किसी रिश्ते की डोर न बांध पाई हमें।। राही (अंजाना) »

उदास

पास रहकर भी पास नहीं रहती, तेरी याद मुझसे कभी उदास नहीं रहती।। राही (अंजाना) »

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