Hindi-Urdu Poetry

ज़िन्दगी ना- 1 थी

ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी पक्की छत ना थी सर पे हमारी, जैसी तुम्हारी »

जो हूँ मैं – 8

जो हूँ मैं वह जिंदा रंगों-छंदों मैँ, जो नहीं मैं वह दुनियावी धंधो में »

जो हूँ मैं – 7

जो हूँ मैं वह हर पल शिल्पकार है, जो नहीं मैं वह मुर्दा बेकार है »

जो हूँ मैं – 6

जो हूँ मैं वह अन्दर से हूँ सुंदर, जो नहीं मैं वह बाहर हूँ आडंबर »

जो हूँ मैं – 5

जो हूँ मैं वह है सबका सदा, जो नहीं मैं वह ना किसी का सगा  »

जो हूँ मैं – 4

जो हूँ मैं वह पूर्ण एह्सास हूँ, जो नहीं मैं वह शून्य का वास हूँ »

जो हूँ मैं – 3

जो हूँ मैं वह तो है मेरे सुकर्म, जो नहीं मैं वह थे मेरे दुष्कर्म जो हूँ मैं वह सबका मीत है, जो नहीं मैं वह ख़ुद का गीत है »

जो हूँ मैं – 2

जो हूँ मैं वह हूँ हवाओ में, जो नहीं था मैं वह है चिताओ में जो हूँ मैं वह है सब जगह, जो नहीं मैं उसकी ना कोई जगह »

जो हूँ मैं – 1

जो हूँ मैं वह है स्दीवि यहीं, जो नहीं मैं वह था कभी नहीं जो हूँ मैं बचा वह तो है असल, जो नहीं बचा वह था नकल »

पल – पल – 4

पल – पल बदलती–रचती–घटती इस दुनिया मॆं , मन कैसे कहे ,  तुझे पा ही लिया , है यूई जानता अब , था जो कल , है वोह आज नहीं , है जो आज , होगा वोह कल नहीं »

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