Hindi-Urdu Poetry

जो आज है वो कल न होगा

जो आज है वो कल न होगा! गमों का पल हरपल न होगा! मिलेगी रोशनी कदमों को, दर्द का कोई सकल न होगा!     तुम्हारे लब पर नाम मेरा जब आएगा! गुजरा हुआ मंजर तुमको नज़र आएगा! #बिखरे हुए अफसाने घेरेंगे इसतरह, दर्द का समन्दर पलकों में उतर आएगा! Written By #महादेव »

“वो कोई नादान थोड़े है!”……….

ღღ_हर लम्हा, हर लफ्ज़, बस एक ही आरजू; अरे, दुनिया में बस वही, एक इंसान थोड़े है! . याद करते रहते हो, रात-रात भर उसको; अरे, सुबह को उसके बारे में, इम्तिहान थोड़े है! . गर दूर जा रहा है वो, तो जाने भी दो साहब; अरे, एक शख्स ही तो है, पूरा जहान थोड़े है! . जो भी किया है उसने, जानबूझकर किया है; आखिर दर्द से तेरे, वो कहीं अंजान थोड़े है! . दर्द देता है वो बेशक, पर मज़ा भी तो देता है; अरे मासूम है वो साहब, कोई... »

इज़हार ए तसव्वुर

  इस वीराने में अचानक बहार कहां से आ गयी गौर से देखा तो ये महज़ इज़हार ए तसव्वुर था »

कुछ कमाल हो जाए

कुछ कमाल हो जाए

      ए मालिक क्यों ना कुछ कमाल हो जाए ,       ऐसा अपनी दुनिया में ध्माल हो जाए ,       हर शैतान इंसानीयत का कायल हो जाए        द्वैत की उलझन सलट, सब अद्वैत हो जाए ,       यह दुआ जो यूई की कबूल हो जाए ,       तो हर नर तुझ्सा नारायण हो जाए                                                      …… यूई »

ख़ता दर ख़ता

ख़ता दर ख़ता

सोच कर यह , ख़ता दर ख़ता किए जा रहे हम , प्यार में तो वोह मिलने से गए , सजा देने ही शायद आ जाएँ लौट कर                                                           …… यूई »

तेरी यादों के कागज को

तेरी यादों के कागज को

तेरी यादों के कागज को ,   छुपा रखा है ,   अपनी पलकों से थोड़ा पीछे ,   कहीँ सालों से बह्ते आँसू ,   इनको गीला कर ,   धुँधला ना कर दे I                                   …… यूई »

गम-ए-इशक

गम-ए-इशक

गम–ए–इशक में डूब कोई        मरीज–ए–मोहब्बत ना बच पाया रफ्ता रफ्ता सरकती मौत देखी        यूई ना मर पाया ना जी पाया                                                                                …… यूई »

मेरा हमसफर जबसे दूर हो गया है

मेरा हमसफर जबसे दूर हो गया है! ख्वाब हसरतों का मजबूर हो गया है! घेरती हैं मुझको #तन्हाईयाँ मेरी, आईना उम्मीद का चूर हो गया है! Written By #महादेव »

जब भी तेरी यादें पलक खोलती हैं

जब भी तेरी यादें पलक खोलती हैं! कश्तियाँ ख्वाब की साँसों में डोलती हैं! लफ्ज़ तोड़ देते हैं खामोशी अपनी, #मंजिलें भी तेरा ही नाम बोलती हैं! »

मुझे चाहतों का मिल गया ईनाम है

मुझे चाहतों का मिल गया ईनाम है! डरा-डरा सा हर ख्वाब का पैगाम है! अरमान कुचल रहे हैं दर्द के कदम से, किसी की याद में मयकशी हर शाँम है!     तेरी चाहत का गुनाहगार हूँ मैं! हर लम्हा तेरा ही तलबगार हूँ मैं! हरवक्त नज़र आता है ख्वाब तेरा, तेरी तमन्ना का दर्द-ए-इजहार हूँ मैं! »

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