Hindi-Urdu Poetry

मुक्तक 15

कहीं है दफ़्न  तुम्हारा ग़म हमारे दिल के कोने में, हमे भी मीर लाशो को बहुत रखना नहीं आता.. …atr »

मुक्तक 14

अभी   मुझमे  जरा  तू  है ,जरा  मैं  हूँ तेरे  दिल  में .. मगर  अब  अपने  अपने  में  जरा  सा  तू , जरा  मैं  हूँ .. …atr »

ए जीनेवाले सोच जरा….!

ए जीनेवाले सोच जरा….! मरने के लिए जीते हैं सब, फिर भी मर मर कर जीते हैं. यहाँ कभी न मन की प्यास बुझी, प्यासे ही सब रह जाते हैं. ए जीनेवाले सोच जरा, ऐसा जीना क्या जीना है, गर मर मर कर यूं जीना है, तो जीकर भी क्या करना है. जग जीवन के जन्जालों मे, ना समझ सका ख़ुद को मानव, चिंताओं व्यर्थ व्यथाओं की, गाथाओं मे खोया मानव. कुछ ऐसे दीवानेपन में, मेरे भी जीवन मे इक दिन, जागा जीवन का अर्थ नया, जब किस्मत से ... »

दिल क्यूँ मांगो “More” ….!

   दिल क्यूँ  मांगो “More” ….! दिल तुम्हरी नहीं मानेगे हम, क्यूँ तुम मांगो “More” “More” “More” ही दुःख का कारण, सुख ले जावे चोर…..! इतना सारा पास जो अपने, देख तो उसकी ओर, जो कुछ है, इसमे ही समाया समाधान संतोष….. ! भगवत्प्रेम और भक्तिभाव में होकर मन मदहोश, सुख है, जो है, उसका करना परिपूर्ण उपभोग, सुख है, जो है, उसका करना प्यार से सद्उपयोग …..! ये जीवन है प्रभु की पूजा, ठान ले तू हररोज, प्रभु ... »

पहली बारिश

शायद इस पहली बारिश में कल वो भी मेरी तरह नहाया होगा,, कामकाजी दौर में धुंधला चुकी कुछ यादो को यादकर वो भी मुसकराया होगा।।   हम उस वक्त बस ऐसे ही घास पर लेटे हुए थे,, ख़ामोश पड़े उस मंजर में नजरो से बोल रहे थे!! अचानक शरारती बादल गरजकर बरसने लग गए थे,, सिर्फ भीगने से बचने खातिर हम भाग खड़े हुए थे!! भागते भागते जब तुम्हारा पैर अचानक मुड गया था,, तब तुम्हे थामते- थामते मैं खुद नीचे गिर गया था!! तुम उस व... »

……….चाहत होती है!

पराये जज्बातों को अपना बनाने की चाहत होती है किसी की आहों में डूब जाने की चाहत होती है उम्र भर चलते रहे तनहाईयों के साथ हम उनके साथ चंद कदम चलने की चाहत होती है »

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर चले गये जो इकबार, फिर ना आयेंगे कभी »

मेरी कविता प्यारी मुझको ….!

मेरी कविता प्यारी मुझको…….! मेरी कविता प्यारी मुझको, औरों को ये सरदर्द है, समझ के भी आदत ना छूटे, जाने कैसा ये मर्ज है…….! फिर भी अर्ज है…! मेरी कविता प्यारी मुझको, औरों को ये सरदर्द है…..! कभी जो लब पर ये आ जाती, और कुछ पंक्ति मै लिख पाता, फिर जो कोई पास हो मेरे, पकड़ सुनाने उसको लगता, मचले मेरा दिल तब ऐसे, जैसे मेरा यही फर्ज है, मेरी कविता प्यारी मुझको,औरों को ये सरदर्द है, समझ के भी आदत ना छूटे,... »

छुअन

कल उसने दिल को कुछ ऐसे छुआ कि साँसे तो थम गई पर धडकनें दौड़ने लगी !!!! »

तुम्हे मालूम हो ..

तुम्हे मालूम हो … कुछ बाकी सा रह गया है तुम्हारे – मेरे दरम्यान… जिसे मैं बहुत कोशिश करने पर भी शब्द नहीं दे पाता, बस यूँही कभी महसूस कर लिया करता हूँ अकेले में, गोयाकि, कुछ फुसफुसाहटें, कुछ पहली बारिशें, कुछ अधपके से तुम्हरे साथ देखे ख्वाब, कुछ तुम्हारी सी छुअन, कुछ चुम्बन, कुछ अकेली-अकेली सी ढीठ शामें, कुछ आँखों-आँखों में काटी लम्बी रातें, कुछ करीने से सहेजे हुए तुम्हारे लैटर, ... »

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