Hindi-Urdu Poetry

कभी कभी, तुम राहें भूल कर…! (गीत )

  कभी  कभी, तुम  राहें  भूल  कर……! (गीत ) कभी  कभी,   तुम  राहें  भूल  कर, मेरी  गलियों  मे  आया  करो…. कभी  कभी  तुम  ख़ुद  को  भूल  कर, ज़रा  नजरें  मिलाया  करो…………! ख़ुद  में  इतने  खोये  हो, न  तुझको  कुछ  ख़बर, काम  के  सिवा, न  तुझको  आता  कुछ  नज़र, कभी  कभी,   सारे  काम  भूल  कर, ज़रा  दुनिया  को  देखा  करो….. कभी  कभी,   बेवजह  ही  सही, दुनिया को निहारा  करो…… कभी  कभी,   तुम  राहें  भू... »

आँखों का ग़रूर

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कसम ख़ुदा की

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चाहतों की दुनिया से अब उकता गये है

चाहतों की दुनिया से अब उकता गये है सब दिखता है यहां, मगर कुछ मिलता नहीं »

“तुमसे गले मिले हुए” #2Liner-56

ღღ__यूँ तो अरसा हुआ है साहब, तुमसे गले मिले हुए; . पर जिस्म मेरा आज भी, इत्र-सा महकता है !!……#अक्स . »

घर और खँडहर

घर और खँडहर

घर और खँडहर   ईटों और रिश्तों   मैँ गुंध कर मकान पथरों का   हो जाता घर   ज्यों बालू , सीमेंट और पानी जोड़ें ईट से ईट त्यों भरोसा, जज़्बात और प्यार जोड़ें रिश्तों में मीत   चूल्हे में भखती ईटें माँ की याद दिलाती है जो ख़ुद के तन पे आग जला सबकी भूख मिटाती है   नींव में दफन ईटें दादा-दादी की याद दिलाती है ख़ुद पे सारा बोझ लदा घर की मंजिलों को बनाती हैं   छत में लगी यह ईटें बाप की याद दिलाती हैं ख़ुद प... »

तेरा मेरा रिश्ता

तेरा मेरा रिश्ता

तेरा मेरा रिश्ता यूई की आंखों से बहते आँसुओं को रूह की नजर से देख यह आँखें मेरी हैं पर आँसू तेरे हैं इन आंसुओं में जो बहता है वोह पानी मेरा है पर धारा तेरी है यह धारा जिस दिल से निकली वोह दिल मेरा है पर उसकी धड़कन  तेरी है यह धड़कन जिस जिस्म में धड़कती वोह जिस्म मेरा है पर उसकी रूह तेरी है यह रूह जिस खुदा से निकली वोह खुदा मेरा है और वोही खुदा तो तेरा है यही रिश्ता है तेरा मेरा जो तेरा है वोह मेरा है... »

MAANAVTAA KI SAHI KAHAANI HOGI

Chhtpataa rahi insaaniyat haivaaniyat ke quaid mei- sisak…rahaa bhaaichaaraa bddniyatee ke aeib mei. khoon ki qeemat nhi…(?) wo to, bss dikhne mei laal hai hrr koi ek-duze ko jhhpattne ki saazisho mei hi bss behaal hai tohfaa biawasghaat ka — bddniyatee ki bazaar se lete prem viheen maahaul,mei dekho hrr koi sirf laachaar se hai dikhte hrrpnaa–hrrppnaa–aurr hrrppnaa m... »

“याद” #2Liner-55

लो आ ही गयी साहब, उनकी याद, आज फिर आखिर; . और वो आज फिर नहीं आये, इतने इंतज़ार के बाद !!…..‪#‎अक्स‬ »

कागज़ और कलम

जब आसपास की खट पट खामोशी में बदलती है। जब तेज़ भागती घडी की सुइंया धीरे धीरे चलती है।।   दिनभर दिमाग के रास्तों पर विचारों का जाम होता है। मन रूपी मेरी तकती पर नजाने किस किस का नाम होता है।।   जब विचारों का ये जाम हौले हौले  खुल जाता है। और सर सर करते पंखे का शोर भी कानो में घुलता जाता है। तब अचानक कल्पनाओं का इंद्रधनुष खिल जाता है।।   कागज़ और कलम की बातें तब सुनने में आती हैं। कागज़ ... »

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