Hindi-Urdu Poetry

शिक्षा

हम सबकी तरफ से हर-एक अध्यापक-गुरुजन  को सादर नमन   हैं पावन दिवस आज, करते हैं हम उनको प्रणाम, जो ज्ञान की लौ जला कर मन अलौकिक करते रहते। जन्म दिया माँ–बाप ने और राह दिखलाई हैं सबने, सबके आशीर्वाद से ही हम हैं आगे बढ़ते रहते॥   जिन्दा रहने का असल अंदाज सिखलाया इन्होने। ज़िन्दगी हैं ज़िन्दगी के बाद बतलाया इन्होने। खुद तो तप की अग्नि में जल कर हैं बनते रहते कोयला, पर जहाँ को कोहिनूर मिला सदा इनकी ... »

मुक्तक 13

चला जाता है कोई दूर ,दिल के पास रहता है , वही यादें ,वही खुशबू ,वही एहसास रहता है . फ़कत इतना फरक है प्रेम के इन दो मिलापो में , की जब वो दूर होते है तो ग़म ये साथ रहता है .. …atr »

मुक्तक 12

खत को मेरे संभाल के रखा जो होता मीर, हर हर्फ़ मेरे प्यार की दास्ताँ कहते . करे अब किस जगह रोशन गुलिश्ता ए जिगर को यार , यहाँ तो आशियाँ ही लुट गया है मीर तूफां में . …atr »

मैं सूरज को किसी दिन……………….

मोहब्बत करके पछताने की खुद को यूं सजा दूंगा तुम्हें यादों में रक्खूंगा मगर दिल से भूला दूंगा। रहो बेफ्रिक तूफानों तुम्हारा दम भी रखना है किनारा आने से पहले मैं कश्ती को डूबा दूंगा। ऐ लंबी और अकेली रातों इतना मत सताओ तुम मैं सूरज को किसी दिन वक्त से पहले उगा दूंगा। यूं ही घुट—घुट के रोने की मुझे आदत नहीं यारो किसी दिन टूट कर बरसूंगा, सब आंसू बहा दूंगा। कहानी कहने में भी हुनर की होेती जरुरत है यूं अ... »

मुक्तक 11

किया है खून रिश्तो का , तुम्हे कातिल कहूँ या भ्रम , जला कर प्रेम का दीपक , अँधेरा कर दिया कायम . …atr »

मुक्तक 10

न देखोगे मुझे अब तुम , न अब संवाद होगा .. जो कल था ,आज तक जो था , न इसके बाद होगा .. …atr »

गीत मेरे..

नैनो के सूखे मेघो से मैं आज अगर बरसात करूँ , हल करुँ ज़मीन ए दिल में मैं नीर कहाँ से मगर भरूँ? है सूख चुका अब नेत्र कूप न मन का उहापोह बचा , न मेघ रहा न सावन है ,मिट गया जो कुछ था पास बचा . एक बार हौसला करके मैंने बीज प्रेम के बोये थे , न मौसम ने रखवाली की ,सावन ने पात न धोये थे . अब न मन है , न मौसम है ,न उर्वर क्षमता धरती की , न नैनो में अब पानी है ,न दिल में इच्छा खेती की . रोते है मेघ और कूप सभ... »

मुक्तक 9

लहरा रहा है सामने यादों का समंदर , जो डूबना भी चाहूँ तो किस किनारे से.. मेरे इश्क़ की दास्ताँ बस इतनी है, तलाश हमसफ़र की थी मुकाम तन्हाई का मिला. …atr »

मुक्तक 8

मुद्दत से तेरी आँखों में नमी नहीं देखी, लगता है तुमने मुझमे कोई कमी नहीं देखी .. यादों की लहरों पर किया है प्यार का सफर , हमें है राब्ता उनसे उन्हें नहीं मेरी खबर.. …atr »

मुक्तक 7

आँखों से झरते आंसू ने थमकर पूछा, आखिर सजा क्यों मिली मुझे ख़ुदकुशी की? दिल रो पड़ा पुराना जखम फिर हरा हुआ, कहा, गुनाह उसी ने किया जिस छत से तू गिरा .. ..atr »

Page 476 of 484«474475476477478»