Hindi-Urdu Poetry

हालत को समझा है मैंने

खामोशियोँ को मेरी कमजोरी ना समझ हालत को समझा है मैंने,  हारा नही   ….. यूई »

सिमटा हूँ ख़ुद में

मैं खामोश हूँ खामोश ही रह्ने दो सिमटा हूँ ख़ुद में सिमटा ही रह्ने दो     ….. यूई »

खामोशियोँ की चादर

जब सब शोरो-ओ-गुल से खेला लिए तब खामोशियोँ की चादर ओड़ा लिए   ….. यूई »

खामोशियाँ ही इसकी पहचान होती है

ख़्वाहिशें दिल में ही दफन होती हैं कह्ते हैं दिल की भी ज़ुबान होती है यह कभी ना बोल के बयाँ होती है खामोशियाँ ही इसकी पहचान होती है   ….. यूई »

क्यों इतने दुःख सह्ता तूं

कह्ते हैं सब में रह्ता तूं क्यों इतने दुःख सह्ता तूं क्या इससे बेहतर काम नही या हममें तुझको मान नही   ….. यूई »

कैसे तेरी पहचान करूँ ?

कोई कहता तू ऐसा है कोई कहता तूं वैसा है मिल जाऊँ कभी तुमसे तो कैसे तेरी पहचान करूँ ?   ….. यूई »

क्या मैं तेरे जैसा नही

मैं इतने जो पाप करूँ क्यों मैं इतना नीचे गिरूँ क्या मैं तेरे जैसा नही या तेरा मैं वो रुप नही     ….. यूई »

तू सबके दुःख हर जाता है

मुझे ख़ुद की लगी रहती है तुझे सबकी पड़ी रहती है मैं ख़ुद के समेट ना पाता हूँ तू सबके दुःख हर जाता है   ….. यूई »

सबके अन्दर बसता है

मैं सोच ही ना पाता हूँ कैसे तू यह सब करता है सबके अन्दर बसता है सबको ख़ुद में रखता है   ….. यूई »

तुझसे आगे ना सोच पाया

ख़ुद का करके सब देख् लिया ख़ुद का चाह के भी देख् लिया अंत में जब सबको जोड़ पाया पाया तुझसे आगे ना सोच पाया   ….. यूई »

Page 438 of 588«436437438439440»