Hindi-Urdu Poetry

गीत कहूँ कैसे अब मैं.

गीत कहूँ कैसे अब मैं.

गीत लिखूँ कैसे अब मैं, गीत कहूँ कैसे अब मैं. सब शब्द तुम्हारे प्रेमी है,हर कविता तेरी दासी है, हर वाक्य तुम्हारा वर्णन है, हर हर्फ़ तेरा अभिलाषी है, फिर इन दीवाने लोगो को अब कहु, गढ़ूं   कैसे अब मैं, गीत लिखूँ कैसे अब मैं, गीत कहूँ कैसे अब मैं.   जो सृजन तुम्हारा दीवाना ,है दूर बहुत जाता मुझसे, उत्पत्ति मुग्ध है अब तुम पर , है नाता तोड़ चुकी मुझसे , फिर इन परदेशी लोगो को , सुनूँ , कहूँ कैसे अब म... »

मुक्तक 19

चलो अब देर से तुम सो सकोगे , हमारी नींद तुमको लग गयी है.. …atr »

मुक्तक 18

बढ़ी है तीरगी रूश्वाईयों  में  , ज़रा अपनी नज़र तुम बंद रखना.. …atr »

मुक्तक 17

करोगे क़त्ल क्या हमको दरिंदो , हमारे हर्फ़ रूहानी, हमारी बात रूहानी.. …atr »

मुक्तक 16

कभी मेरी निगाहों को जहाँ दिखता था तुझमे मीर , मगर अब दौर ऐसा है , खुदी पुरज़ोर हावी है .. …atr »

मुक्तक 15

कहीं है दफ़्न  तुम्हारा ग़म हमारे दिल के कोने में, हमे भी मीर लाशो को बहुत रखना नहीं आता.. …atr »

मुक्तक 14

अभी   मुझमे  जरा  तू  है ,जरा  मैं  हूँ तेरे  दिल  में .. मगर  अब  अपने  अपने  में  जरा  सा  तू , जरा  मैं  हूँ .. …atr »

ए जीनेवाले सोच जरा….!

ए जीनेवाले सोच जरा….! मरने के लिए जीते हैं सब, फिर भी मर मर कर जीते हैं. यहाँ कभी न मन की प्यास बुझी, प्यासे ही सब रह जाते हैं. ए जीनेवाले सोच जरा, ऐसा जीना क्या जीना है, गर मर मर कर यूं जीना है, तो जीकर भी क्या करना है. जग जीवन के जन्जालों मे, ना समझ सका ख़ुद को मानव, चिंताओं व्यर्थ व्यथाओं की, गाथाओं मे खोया मानव. कुछ ऐसे दीवानेपन में, मेरे भी जीवन मे इक दिन, जागा जीवन का अर्थ नया, जब किस्मत से ... »

दिल क्यूँ मांगो “More” ….!

   दिल क्यूँ  मांगो “More” ….! दिल तुम्हरी नहीं मानेगे हम, क्यूँ तुम मांगो “More” “More” “More” ही दुःख का कारण, सुख ले जावे चोर…..! इतना सारा पास जो अपने, देख तो उसकी ओर, जो कुछ है, इसमे ही समाया समाधान संतोष….. ! भगवत्प्रेम और भक्तिभाव में होकर मन मदहोश, सुख है, जो है, उसका करना परिपूर्ण उपभोग, सुख है, जो है, उसका करना प्यार से सद्उपयोग …..! ये जीवन है प्रभु की पूजा, ठान ले तू हररोज, प्रभु ... »

पहली बारिश

शायद इस पहली बारिश में कल वो भी मेरी तरह नहाया होगा,, कामकाजी दौर में धुंधला चुकी कुछ यादो को यादकर वो भी मुसकराया होगा।।   हम उस वक्त बस ऐसे ही घास पर लेटे हुए थे,, ख़ामोश पड़े उस मंजर में नजरो से बोल रहे थे!! अचानक शरारती बादल गरजकर बरसने लग गए थे,, सिर्फ भीगने से बचने खातिर हम भाग खड़े हुए थे!! भागते भागते जब तुम्हारा पैर अचानक मुड गया था,, तब तुम्हे थामते- थामते मैं खुद नीचे गिर गया था!! तुम उस व... »

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