Hindi-Urdu Poetry

शागिर्द ए शाम

जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करें जुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें »

अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा

अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा राहों में रोशनी के लिए न कोई आफताब रहा उनकी महोब्बत के हम मकरूज़ हो गए उनका दो पल का प्यार हम पर उधार रहा वेवफाई से भरी दुनिया में हम वफा को तरस गए अब तो खुद पर भी न हमें एतबार रहा शम्मा के दर पर बसर कर दी जिंदगी सारी परवाने को शम्मा में जलने का इंतजार रहा उन्हे देख देख कभी गज़ल लिखा करते थे हम अब न वो गजल रही और न वो हॅसी गुबार रहा »

कैसे करें शिकवे

कैसे करें शिकवे गिले हम उनसे उनकी हर मासूम खता के हम खिदमतगार है »

वो आये कभी पतझङ कभी सावन की तरह

वो आये कभी पतझङ कभी सावन की तरह जिंदगी हमें मिली हमेशा बस उनकी तरह फूलों के तसव्वुर में भी हुआ उनका अहसास आये वो मेरी जिंदगी में खिलती कली की तरह जब से दी जगह खुदा की उनको दिल में हमने याद करना उनको हो गया इबादत की तरह डूब गया दिल दर्द ए गम ए महोब्बत में बहा ले गयी हमें साहिल ए इश्क में लहरो की तरह हुई जब रुह रुबरु उनसे जिंदगी ए महफिल में समा गयी वो मेरी रुह में सांसो की तरह »

ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त

ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त है जो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहीं रब्तः संबंध   »

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