Hindi-Urdu Poetry

कहीं हमको भी जाना है..

तू ही दौलत मेरे दिल कि तू ही मेरा खज़ाना है, मेरे दिल में मेरे साक़ी तेरा ही गुनगुनाना है. चलो अब देखते है फिर मुलाक़ातें कहाँ होंगी , कहीं तुमको भी जाना है कहीं हमको भी जाना है.. ….atr »

मुझको पिलाओ यारो…..

आज फिर जी भर के मुझको पिलाओ यारो, मैं तो झूमा हूँ, मुझे और झुमाओ यारो.. आज इतनी पिलाओ कि फिर होश न रहे, अब तो साकी से मुझे और दिलाओ यारो.. रात आधी है बंद है मयकदा, मेरे जीने के लिए इसको खुलाओ यारो.. पी पी के मरने में वक़्त लगेगा मुझे; आज ही बंद करके मय न जलाओ यारो. फिर कभी याद में उसकी न धुआं दिल से उठे , इसलिए दिल में लगी आग बुझाओ यारो… आज फिर जी भर के मुझको पिलाओ यारो.. …atr »

तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है

तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है

तुझसे रुबरु हो लूं मेरे दिल की आरजू है तुझसे एक बार मैं कह दू, तू मेरी जुस्तजु है भॅवरा बनकर भटकता रहा महोब्बत ए मधुवन में चमन में चारो तरफ फैली जो तेरी खुशबु है जल जाता है परवाना होकर पागल जानता है जिंदगी दो पल की गुफ्तगु है दर्द–ए–दिल–ए–दास्ता कैसे कहे तुझसे नहीं खबर मुझे कहां मैं और कहां तू है शायर- ए- ग़म तो मैं नहीं हूं मगर मेरे दिल से निकली हर गज़ल में बस तू है »

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें जब मेरे शानों पे बिखरती है सुलझ सी जाती है मेरी उलझी हुई जिंदगी »

न उस रात चांदनी होती

न उस रात चांदनी होती

न उस रात चांदनी होती न वो चांद सा चेहरा दिखता न मासूम मोहब्बत होती न नादान दिला ताउम्र तडपता »

मैं तो सन्नाटा हूं

ये तो मुमकिन नही यूं ही फ़ना हो जाऊं मैं तो सन्नाटा हूं फैलूं तो सदा हो जाऊं »

सलाखें ग़ज़ल गाती हैं

अब तो उनके घर से सदायें आती हैं ,जो कभी मेरे न थे उनकी भी दुआएं आती हैं … सुना है उन मकानों में हज़ारो कत्लखाने हैं , जहाँ दिल चूर होते हैं , सलाखें ग़ज़ल गाती हैं… …… …atr »

मैं आइना हूँ……

न मैं उसके जैसा हूँ ,न मैं तेरे जैसा हूँ , जो देखेगा मुझे जैसा ,यहाँ मैं उसके जैसा हूँ.. न मेरी जाति है कोई ,न मज़हब से है मेरा नाम, न मंदिर की मुझे चिंता ,न मस्जिद से मुझे है काम. मैंने देखा है उसे प्यार की रंगीन मुद्रा में, मगर मैं फिर भी कहता हूँ , न कहता हूँ मैं गैरों से.. मैंने प्यार की अटखेलियां दोनों की देखीं है, मगर अब चाह बस मेरी यही इतनी सी बाक़ी है, मैं चाहता हूँ कि मैं बस प्यार देखूं ,न ... »

आज फिर कोई रो रहा है….

आज फिर कोई रो रहा है… फिर कहीं किसी किसी गली से आवाज़ आ रही है, फिर आज कोई बैठा समंदर पिरो रहा है.. आज फिर कोई रो रहा है…. फिर कहीं कोई कसक नैनों में आ गयी, फिर वादो की टूटी माला कोई पिरो रहा है, आज फिर कोई रो रहा है.. आँखों से उमङा सागर दीदार प्रिया का पाकर , फिर कोई प्रणयनी का आँचल भिगो रहा है, आज फिर कोई रो रहा है….. प्रीति की लपट से फिर झुलस गया कोई , फिर तीर से हो लथपथ दिल को... »

एक प्रश्न

आँखों से झरते आंसू ने थमकर पूछा आखिर सजा क्यों मिली मुझे ख़ुदकुशी की? दिल रो पड़ा पुराना जखम फिर हरा हुआ, कहा, गुनाह उसी ने किया जिस छत से तू गिरा .. ..atr »

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