Hindi-Urdu Poetry

ज़िन्दगी ना थी – 6

ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी आँखों में ना थे सपने रंगीन हमारे, जैसे तुम्हारे »

ज़िन्दगी ना थी – 5

ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी बाज़ूओं को ना था कोई सहांरा, जैसा तुम्हारा »

ज़िन्दगी ना थी – 4

ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी बचपन ना था बचपन हमारा, जैसा तुम्हारा »

ज़िन्दगी ना थी – 3

ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी मजबूरियाँ थी अजब सबकी हमारी, ना जैसी तुम्हारी »

ज़िन्दगी ना थी – 2

ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी दीवारें थी कच्ची कमजोर हमारी, ना जैसी तुम्हारी »

ज़िन्दगी ना- 1 थी

ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी पक्की छत ना थी सर पे हमारी, जैसी तुम्हारी »

जो हूँ मैं – 8

जो हूँ मैं वह जिंदा रंगों-छंदों मैँ, जो नहीं मैं वह दुनियावी धंधो में »

जो हूँ मैं – 7

जो हूँ मैं वह हर पल शिल्पकार है, जो नहीं मैं वह मुर्दा बेकार है »

जो हूँ मैं – 6

जो हूँ मैं वह अन्दर से हूँ सुंदर, जो नहीं मैं वह बाहर हूँ आडंबर »

जो हूँ मैं – 5

जो हूँ मैं वह है सबका सदा, जो नहीं मैं वह ना किसी का सगा  »

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