Hindi-Urdu Poetry

इश्क किया तूने खुद कान्हा–1

क्या अजब दिन था वो, क्या गजब था जहाँ, मैं था बहती नदी, वो था सागर समां! यूं तो इश्क किया तूने खुद कान्हा, अब तू ही बता तेरी क्या हैं सलहा!! मेरे दिल की यही, तमन्ना रही, आँखें कभी भी किसी से, लडे ही नहीं, पर जब तुम मिले, नैना तुमसे से भिड़े, ऐसे उलझते गए, फिर सुलझ ना सके! मन की गंगोत्री से, प्रीत की गंगा , स्वयं ही बहने लगी, मैं रोकता रहा!! यूं तो इश्क किया तूने खुद कान्हा, अब तू ही बता तेरी क्या है... »

तुम ही हो

कैसी कशिश हैं तुम्हारी आँखों में, पल में छपा दिल में अक्स तेरा,, मुझसे जुदा अगर हो जाएगा तो रब से भी छीन लाऊंगा सदा,, Because you are the one, Only you are the one, My destiny is only you are the one,, Tell a way,, I wanna rule your heart,, As you seem to be my dream one.. तू हैं मेरी,, मैं हूँ तेरा,, कुछ भी और हमारा नहीं,, ये मेरा दिल भी हैं घर तेरा,, जिसमे गम भी तुम्हारा नहीं,, तेरे होठों की हर-... »

उसे मालूम था मुझको————-

‘उसे मालूम था मुझको जरुरत है बहुत उसकी, इसी खातिर मेरी नाराजगी में भी, वो घर आता रहा।’ …..सतीश कसेरा »

बाद मुद्दत के मिला तो—–

‘बाद मुद्दत के मिला तो लिपट—लिपट के ​मिला, रोज मिलने से तो ये मिलना बडा अच्छा लगा।’ …..सतीश कसेरा »

‘मैं दूर तक भी आ गया……….^

‘मैं दूर तक भी आ गया, पर वो वहीं पे खडा रहा ये उसको कैसे था पता, मैं मुड के देखूंगा जरुर।’ ……….सतीश कसेरा »

इतना लंबा तो नहीं होता है चिट्ठी का सफर…………

हरे-भरे से थे रस्ते पहाड़ होने लगेनदी क्या सूखी, इलाके उजाड़ होने लगे।कौन से देवता को खुश करें कि बारिश होरोज चौपाल में ये ही सवाल होने लगे। लकीरे खिंचने लगी रिश्तों में तलवारों से जमीं के टुकड़ों को लेकर बवाल होने लगे। इतना लंबा तो नहीं होता है चिट्ठी का सफर कि आते-आते महीने से साल होने लगे। कमर के साथ लचकती थी और छलकती थी प्यासी उस गगरी में मकड़ी के जाल होने लगे। नाम तक लेता नहीं है कभी उतरने का... »

सोचता हूं अभी पाजेब बजी है उसकी………..

सोचता हूं अभी पाजेब बजी है उसकी……….. दूर अपने से उसे होने नहीं देता हूं मैं ख्यालों में उसके साथ-साथ रहता हूं। मैने दीवार पे टांगें हुए हैं फ्रेम कई उसको मैं सोच के तस्वीर लगा लेता हूं। खोल देता हूं कई बार खिड़कियां सारी किसी झोंके में हवा के उसे पा लेता हूं। कमरे में आती हुई धूप की चुटकी लेकर उसकी तस्वीर पे बिंदिया सी सजा देता हूं। सोचता हूं अभी पाजेब बजी है उसकी फिर कई चाबियां ... »

घुल गया उनका अक्स

घुल गया उनका अक्स

घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरेआईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदरनिखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहा हमारी मोहब्बत पर दिखाए मौसम ने ऐसे तेवरन वो बहार-ए-बारिश रही, न वो गुल-ए-गुलजार रहा भरी बज्म2 में हमने अपना दिल नीलाम कर दियाकिस्मत थी हमारी कि वहां न कोई खरीददार रहा तनहाईयों में अब जीने को जी नहीं करतादिल को खामोश धडकनों के रूकने का इंतजार र... »

कितनी दूर है

कितनी दूर हैं अंबर धरती, क्या प्यार कभी कम होता हैं,, गर सीने में हो दर्द धरा के, छुप छुप कर आसमां रोता हैं!! कभी फव्वारे, कभी फिर पानी, कभी पत्थर दिल होता हैं, पाकर नवीन सा सूक्ष्म प्यार, धरा का मन गदगद होता हैं, हजारों फ़ोन कॉल्स सुनने पर भी एक नंबर का इंतज़ार होता हैं, मेरी नज़र में ओ दीवानों प्यार यही बस होता हैं!! अगर हो तकरार भूमि गगन में, भू भी कहाँ खुश रहती होगी,, कहीं पर बंजर, कहीं पर जंगल, ... »

फिर किताबों की याद आने लगी…..

जिन्दगी जब जरा घबराने लगी फिर किताबों की याद आने लगी। कितना जागा हुआ था रातों का अब किताबें मुझे सुलाने लगी। उसकी तस्वीर अचानक निकली तो वो किताब मुस्कराने लगी। धूल का रिश्ता था किताबों से जब उड़ाई, वहीं मंडराने लगी। फूल सूखा हुआ मिला लेकिन उसी खुश्बू की महक आने लगी कुछ किताबें थी जिंदगी जैसी जरा सा खोला तो कराहने लगी। थूक से पन्ने कुछ ही पलटे थे जुबां लफ्जों को गुनगुनाने लगी। मैली जिल्दों सी जिंदग... »

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