Hindi-Urdu Poetry

कितने मुश्किल सफर

कितने मुश्किल सफर तय किये है मुड़ के तो देख अब रूक क्यों गया है फिर चल के तो देख राजेश’अरमान’ »

मुट्ठी में अपने आकाश

मुट्ठी में अपने आकाश, भरने का इरादा रखता हूँ तारों को हथेलिओं में ,सजाने का इरादा रखता हूँ किसी गिरी हुई इमारत की बस इक ईट सही , बुलंद इमारत फिर भी ,बनाने का इरादा रखता हूँ राजेश ‘अरमान’ »

किसी सेहरा की रेत

किसी सेहरा की रेत पे लिखा कोई गीत नहीं हूँ समुन्दर की लहरों पे सजा कोई संगीत नहीं हूँ हर खेल मैंने खेले , अपने ही उसूलों -कायदों से , किसी शतरंज की बाज़ी की कोई हार-जीत नहीं हूँ राजेश’अरमान ‘ »

होली, रुत पर छा गयी है

होली, रुत पर छा गयी है

होली, रुत पर छा गयी। मस्तों की टोली आ गयी।। लाज़ शरम तुम छोड़ो। आज मुख मत मोड़ो।। दिल को दिल से जोड़ो। झूम कर अब बोलो॥ होली, रुत पर छा गयी है। मस्तों की टोली आ गयी है।। यार को गले लगा लो। रंग गुलाल उड़ा लो।। मनमीत को बुला लो। प्रीत से तुम नहा लो।। फागुन में मस्ती छा गयी है। होली, रुत पर छा गयी है। बैठ के फाग गा लो । आज नंगाड़ा बजा लो।। गोरी को भी बुला लो। गालों पे रंग लगा लो। उसकी बोली भा गयी है। ... »

कुछ ख्वाब के

कुछ ख्वाब के पत्थर सिर पे लगे है, खून रिसता नहीं बस जम सा गया है हर लम्हा जैसे बस थम सा गया है राजेश ‘अरमान ‘ »

इन रास्तों पे

इन रास्तों पे कोई कितना यकीं करें इन रास्तों के भी कितने मोड़ होते है राजेश’अरमान’ »

डूबती कश्तियों को

डूबती कश्तियों को किनारा मिल भी जाएँ , नाखुदा की नीयत भी कुछ मायने रखती है राजेश’अरमान ‘ »

कभी ख़ामोशी बंद

कभी ख़ामोशी बंद संदूक की देखना सामान सब भरा पर फिर भी गुमसुम राजेश’अरमान’ »

ग़ुम हुए इंसा

ग़ुम हुए इंसा की तलाश क्या ग़ुम ही रहेगा जहाँ रहेगा राजेश’अरमान’ »

गिरगिट की सभा

गिरगिट की सभा नया गुरु चुनने के लिए कई बुजुर्ग गिरगिट , दावेदार बने पर किसी पर न , बन सकी सहमति युवा गिरगिटों की मांग सूची में पहली और आखरी मांग आजकल रंग बदलने के नए नए तरीके आ गए है हम अब तक पुरानी प्रथा चला रहे है हमें गुरु ऐसा चाहिए जो हमारे रंग बदलने का आधुनिकीकरण करें सब देखने लगे इधर उधर, सभी युवा गिरगिटों ने एक स्वर में कहा अब हमें गुरु गिरगिट नहीं , इंसान चाहिए राजेश’अरमान’ »

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