Hindi-Urdu Poetry

मैं आइना हूँ……

न मैं उसके जैसा हूँ ,न मैं तेरे जैसा हूँ , जो देखेगा मुझे जैसा ,यहाँ मैं उसके जैसा हूँ.. न मेरी जाति है कोई ,न मज़हब से है मेरा नाम, न मंदिर की मुझे चिंता ,न मस्जिद से मुझे है काम. मैंने देखा है उसे प्यार की रंगीन मुद्रा में, मगर मैं फिर भी कहता हूँ , न कहता हूँ मैं गैरों से.. मैंने प्यार की अटखेलियां दोनों की देखीं है, मगर अब चाह बस मेरी यही इतनी सी बाक़ी है, मैं चाहता हूँ कि मैं बस प्यार देखूं ,न ... »

आज फिर कोई रो रहा है….

आज फिर कोई रो रहा है… फिर कहीं किसी किसी गली से आवाज़ आ रही है, फिर आज कोई बैठा समंदर पिरो रहा है.. आज फिर कोई रो रहा है…. फिर कहीं कोई कसक नैनों में आ गयी, फिर वादो की टूटी माला कोई पिरो रहा है, आज फिर कोई रो रहा है.. आँखों से उमङा सागर दीदार प्रिया का पाकर , फिर कोई प्रणयनी का आँचल भिगो रहा है, आज फिर कोई रो रहा है….. प्रीति की लपट से फिर झुलस गया कोई , फिर तीर से हो लथपथ दिल को... »

एक प्रश्न

आँखों से झरते आंसू ने थमकर पूछा आखिर सजा क्यों मिली मुझे ख़ुदकुशी की? दिल रो पड़ा पुराना जखम फिर हरा हुआ, कहा, गुनाह उसी ने किया जिस छत से तू गिरा .. ..atr »

मंज़िलें नज़दीक है…

सफर शुरू हुआ है मगर मंज़िलें नज़दीक है… ज़िंदगी जब जंगलोके बीच से गुजरे, कही किसी शेर की आहट सुनाई दे, जब रात हो घुप्प ,चाँद छिप पड़े, तब समझ लेना मुसाफिर मंज़िलें नज़दीक है.. जब सावन की बदली तुम्हारी ज़िंदगी ढक ले, पड़ने लगे बूंदे रात में हौले हौले, हो मूसलाधार जब बरस पड़े ओले, तब समझ लेना मुसाफिर मंज़िले नज़दीक है.. . हो घना कुहरा के आँखे देख न पाये, जब पड़े पाला ,रात में स्वान चिल्लाएं, अचानक तीव्र त... »

बस प्यार चाहिए

हथियार न बन्दूक न तलवार चाहिए , इंसान से इंसान का बस प्यार चाहिए. है बंद गुलिस्ता ये मुद्दतो से मीर, इस में फकत गुल ओ बहार चाहिए. नेकी की राह बड़ी बेरहम है ना, नेकी के मुसाफिर को तलबगार चाहिए. न भीड़ हो अन्धो की,गूंगो की,और बहरों की यहाँ, जो हो शरीफ उनका मुश्कबार चाहिए. ये इश्क की सजा है या तूणीर का कहर , ये तीर इस जिगर के आर पार चाहिए. ग़मगीन जो समां हो मेरा नाम लेना मीर , चेहरे पे ख़ुशी और दिल में प... »

इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं

इन परों में वो आसमान, मैं कहॉ से लाऊं इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं   (कफ़स  = cage) हो गये पेड सूने इस पतझड के शागिर्द में अब इन पर नये पत्ते, मैं कहॉ से लाऊं जले हुए गांव में अब बन गये है नये घर अब इन घरों में रखने को नये लोग, मैं कहॉ से लाऊं बुझी-बुझी है जिंदगी, बुझे-बुझे से है जज्बात यहॉ इस बुझी हुई राख में चिन्गारियॉ, मैं कहॉ से लाऊं पथरा गयी है मेरे ख्यालों की दुनिया अब इस दुनिया में ... »

…पुरानी नजरों से

उनको हर रोज नये चांद सा नया पाया हमने मगर उन्होने हमें देखा वही पुरानी नजरों से »

शागिर्द ए शाम

जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करें जुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें »

अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा

अब न चांदनी रही न कोई चिराग रहा राहों में रोशनी के लिए न कोई आफताब रहा उनकी महोब्बत के हम मकरूज़ हो गए उनका दो पल का प्यार हम पर उधार रहा वेवफाई से भरी दुनिया में हम वफा को तरस गए अब तो खुद पर भी न हमें एतबार रहा शम्मा के दर पर बसर कर दी जिंदगी सारी परवाने को शम्मा में जलने का इंतजार रहा उन्हे देख देख कभी गज़ल लिखा करते थे हम अब न वो गजल रही और न वो हॅसी गुबार रहा »

कैसे करें शिकवे

कैसे करें शिकवे गिले हम उनसे उनकी हर मासूम खता के हम खिदमतगार है »

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