Hindi-Urdu Poetry

ek khat likha tha tumhe..

Brso pehle ek khat likha tha tumhe,, jo tumhe mila hi nhi kbhi.. kuki humne bheja hi nhi kbhi.. kyu juda kru m ek khat ko b khudse jisme naam tumhara h jbse…   har ek baat ko har ek yaad ko ek ek aansu ko smbhal k rkha h mne.. kuki unme tum hi ho khin na khin »

Sitaare

उफ़! ये हमारे, अजीब से सितारे आज छत पे आये तो छुप गए हैं सारे रात जब सभी थे हम नींद ले रहे थे, आंख जो खुली तो वो पहुच से परे थे © piyushKAVIRAJ  »

ए मालिक

      ए मालिक क्यों ना कुछ कमाल हो जाए ,       ऐसा अपनी दुनिया में ध्माल हो जाए ,       हर शैतान इंसानीयत का कायल हो जाए I       द्वैत की उलझन सलट, सब अद्वैत हो जाए ,       यह दुआ जो विजय की कबूल हो जाए ,       तो हर नर तुझ्सा नारायण हो जाए I                                                  …… यूई विजय शर्मा »

Holi hai..!!

तुम विष हो , अनश्वर तुम से मिलकर जाना .. कि साधना सिर्फ अमृत की बूँद  के लिए ही नहीं , मृत्यु के  बाहुपाश के लिए भी की जाती है . तुम्हारा वरन करने के लिए बनाई है आंक के फूलों की माला देखो , मेरी ओर क्रोध से देखो और भस्म कर दो मुझे , फिर इस गहरे लाल भस्म को अपने अंग अंग में लपेटो . होली है !! »

बरसते सावन में कभी तो भीगती होगी वो

बरसते सावन में कभी तो भीगती होगी वो

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है, तो है |

यूँ तो है बेताब और भी कई, आशिक कई, तन्हा कई, पर दिल आज भी सिर्फ उसी के लिए बेकरार है, तो है | बहुत लिखा गया, बहुत पढ़ा गया, कुछ किया भी गया, प्यार, मुहब्बत, इश्क, जवानी सब लफ्फाज़ी है, तो है | वो 8 सालों से गाँव में अकेली रहती है, कभी न कोई ख़त न कोई तार, पर बूढी आँखों में बेटे से मिलने की आस, आज भी है, तो है | उसके सपने बांधे गए चांदी की जंजीरों से, सिसकियाँ दबा दी शहनाई की आवाज़ से, अब बाप के कंधो प... »

Hasratein..

Kal haal poocha maine anath bachhon se jaakar…… unhone kaha sab theek hai, bas hasratein dum tod deti hain, zuban ki dehleez tak aakar »

कैसे करें शिकवे गिले हम उनसे

कैसे करें शिकवे गिले हम उनसे

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खामोश जुबां से इक ग़ज़ल

रौनक-ए-गुलशन की ख़ातिर अज़ल लिख रहा हूँ ख्वाईश इन्किलाब की है मुसलसल लिख रहा हूँ। सब कुछ लूट चुका था बस्तियां वीराँ थी बेमतलब हुआ क्यूँ फिर दखल लिख रहा हूँ। आवाजों के भीड़ में मेरी आवाज़ गुम है अल्फाजों को मैं अपने बदल लिख रहा हूँ। बेबस आँखों में शोले से उफनते हैं अंधेरे में हो रही हलचल लिख रहा हूँ। उम्मीद इस दिल को फिर से तेरा दीदार हो ख्यालों में तेरे खोया हरपल लिख रहा हूँ। बेहद खौफ़नाक मंज़र है और ... »

देश बेहाल है

हर विभाग आज सुस्त और बेहाल है काम कुछ नही सिर्फ़ हड़ताल है । भ्रष्ट्राचार का तिलक सबके भाल है भेड़िये ओढे भेड़ की खाल है। उपरवाले तो तर मालामाल है हमारे खाते में आश्वासनों का जाल है। घोटालो से त्रस्त देश कंगाल है नेता बजा रहें सिर्फ़ गाल है। लोकतंत्र की बिगड़ी ऐसी चाल है ईमानदार मेहनती जनता फटेहाल है। चोर पुलिस नेता की तिकरी कमाल है राजनीति जैसे लुटेरों का मायाजाल है। »

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