Hindi-Urdu Poetry

ग़ज़ल

अक्सर खुशी का रिश्ता ग़म से होता है इसीलिए हँसी में भी आँख नम होता है   मेरे हाल पर हँसने वालों ज़रा गौर करो वक़्त ही तो है हरदम बदल रहा होता है सुना है दर्द हद से गुज़रे तो लफ्ज़ होता है तो लिखो किताब यहां पूरी ग़ज़ल होता है जिंदगी के फ़लसफ़े से गुजरे तो जाना जिंदगी है,खेल इसका भी अजीब होता है   हर दिल मे कोई न कोई ग़म होता है खैर छोड़ो सबका अपना राज़ होता है “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~ &... »

अपने ही सूरज की रोशनी में

अपने ही सूरज की रोशनी में मोती–सा चमकता औस का कतरा है आज़ वो जो कल तक था अंधेरे में जी रहा।   कितनो की आँखों का तारा है आज़ वो जो कल तक था अज़नबी बनकर जी रहा।   दूसरो के कितने ही कटे जख्मों को  है वो सी रहा लेकिन अपने ग़मों को अभी भी वो खुद ही है पी रहा।     कितनी ही बार जमाने ने उसे गिराया लेकिन वो फिर–फिर उठकर जमाने को ही सँवारने की तैयारी में है जी रहा।   अपने दीया होने का उसने कभी घमण्... »

ख़ुशी क्या है ?

क्या सिर्फ चेहरे पर बनी कुछ लकीरें तय करती हैं ख़ुशी ? या फिर किसीके पूछने पर ये कह देना “मैँ खु़श हूँ” इससे ख़ुशी का पता लग सकता है ?   — KUMAR BUNTY »

ख्वाब

कुछ ख्वाब जिन्दगी में हमेशा अधूरे रह जाते हैं। अरे दूसरों को क्या समझाऊ मैं, अपने ही समझ नहीं पाते हैं। अरे हमसे भी तो पूछ कर देखो, हम क्या चाहते हैं। “सुखबीर” जो अपने विचार प्रगट नहीं करते, वह जीते ही, मर जाते हैं। »

तू तो नही पर तेरी कहानी याद आयी सबको भूले पर तेरी जफ़ा याद आयी तेरे लिक्खे सब ख़तों को जला दिए पर तुझपे लिखी वो ग़ज़ल याद आयी “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~ »

मुक्तक

गुमशुम,मदहोश,खामोश कहाँ रहते हो वो क्या कहते है,हाँ मोहब्बत में रहते हो वो सुर्ख होंठ,क़ातिल नज़र बला की अदा एक दीद में क़त्ल का सामान रखते हो “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~ »

ग़ज़ल

वो लोग भी एक खास ही जगह रखते है जो वक़्त पर मेरे सामने आईना रखते है   कोई क्या लगाएगा मेरे वफ़ा का अंदाज़ा हम तो दिल भी किसी के पास रखते है   गर देखना हो कभी अश्क़ों की सुनामी तो दरिया क्या हम समंदर भी आँख में रखते है   तुझे लिखने का गुनाह तो अब कर दिया है सज़ा दो कदमो में तेरे पूरी ग़ज़ल रखते है “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~ »

क्या लिखूँ ?

दिन–रात लिखूँ हर बात लिखूँ दिल के राज़ लिखूँ मन के साज़ लिखूँ।   अपने वो दिन बेनाम लिखूँ लेकिन नहीं हुआ बदनाम लिखूँ कितना बनकर रहा गुमनाम लिखूँ इतना कुछ पाने पर भी बनकर रहा मैं प्राणी आम लिखूँ।   मन तो मेरा कहता है कि लगातार लिखूँ और दिल भी पुकारता है कि सबके सामने सरेआअम लिखूँ।       कितनों ने दिया साथ और कितनों ने दिखाया खाली हाथ क्या वो भी लिखूँ।   वक़्त केसे पड़ गया कम होते हुए भी मन में समु... »

तू ही बता दे जिंदगी

कुछ खो गया है मेरा या फिर मैं खुद ही लुटा रहा हूँ जिंदगी कहीं चल तू ही बता दे जिंदगी आज़ नहीं तो कल किसी और मोड़ पे सही मुझे कोई जल्दी नहीं लेकिन तुम इतनी भी देर मत करना कि खो चुका हूँ मैं खुद को ही कहीं।                                                                                                                                                                                         —̵... »

जीने की ख्वाहिश न मरने का गम है!

जीने की ख्वाहिश न मरने का गम है! है अधूरी कहानी जख्म ही जख्म है !! . न तुमने कहा कुछ न हमने कहा कुछ! बढी फिर भी दूरी ये वहम ही वहम है‌‌‍!! . कहीं तिरगी है और कहीं तन्हा राते ! कहीं पर है महफिल जश्न ही जश्न है!! . न वक़्त तुमको मिला न हमको मिला! जो दिल मे थी बातें दफ्न की दफ्न है!! . सदिया है गुजरी ना है आहट ही कोइ! ना साहिल को ही कोई ‌रंज ओ गम है!! @@@@ RK@@@@   »

Page 3 of 37112345»