Hindi-Urdu Poetry

Ati hai yad bachpan ki

आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप करना, आती है याद बचपन की….. वो बालू मिट्टी से मस्त होकर खेलना, फिर दोस्तों संग लुकाछिपी खेलना, आती है याद बचपन की….. वो मां की गोद में छुप जाना, कंधों पर पिताजी के झुलना, आती है याद बचपन की….. वो दादी अम्मा से... »

यादें

तेरी बेहिसाब यादें हैं मेरी जागीरें हैं, मुझसे ज्यादा अमीर कोई होगा क्या।। @chandani »

दर्द

फिर बेवा आँखे रोईं हैं कोई ख्वाब जरूर जला होंगा ।। #चाँदनी »

पराया

कुछ अपने अपनों को ही पराया कहने लगे, दिल को धड़कन का मानो साया कहने लगे।। जो गवांते रहे घर का हर इक कोना रात दिन, गैरों की महफ़िल में ही सब कमाया कहने लगे।। हर कदम पर साथ साथ चलने वाले भी देखो, आज संग बीते हुए वक्त कोही ज़ाया कहने लगे।। राही अंजाना »

नारी सब पर भारी

सत्य है नारी, सब पर है भारी। अब मलेरिया को ही देख लो, नर एनाफिलीज की, नहीं है औकात। ये तो है मादा एनाफिलीज की सौगात। दुनिया होती, भगवान को प्यारी। सत्य है नारी, सब पर है भारी। सुन्दरता की गर बात करें तो, मोरनी ने भले, सुन्दर पंख नहीं पाया। परन्तु मोर को, स्वयं के लिए नचाया। मूक जीव भी, नारी पर बलिहारी। सत्य है नारी, सब पर है भारी।। विश्वामित्र जैसे तपस्वी भी, अछूते ना रहे, कामदेव के काम वार से। बच... »

अहंकार

क्या मिलेगा तुमको हम बेजुबानों से उलझकर , इतना ही हौसला है तो खुदा से दो दो हाथ करो ..।। #chandani »

मज़हब

कोई करतब कोई जादू नहीं दिखना होता है, बस मज़हबी दीवारों से बाहिर आना होता है, मुश्किल ये नहीं के बस दायरें बाँधे हैं दरमियाँ, हमें खुद के ही दिल को तो समझाना होता है, खुदा रब भगवान के आँगन की तो नहीं कहता, पर माँ के दर पे राही सबको सर झुकना होता है।। राही अंजाना »

Ek budhi lachar wah

एक बूढ़ी थी लाचार वह, थी भुख से बेचैन वह , बैठी थी सड़क किनारे वह, लिए हाथों में कटोरा वह, इस आस में कि पसीजे, दिल किसी का और देदे कटोरे में दो चार रु वह, पर अचंभा तो देखो , कि हो ना सका ऐसा , लोग आते रहे, लोग जाते रहे, पलट कर किसी ने देखा भी नहीं उसे , अजीब विडंबना है ईश्वर तेरी, कहीं दी इतनी गरीबी तूने तो कहीं दी जरूरत से ज्यादा अमीरी……. »

माँ

मेरी साँसों में उसके आंचल की खुशबू महकती है। तुम गौर से देखो मुझमें मेरी मां झलकती है।। Chandani »

ज़िंदगी सतत संग्राम

ज़िन्दगी सतत संग्राम हैं यारों यहां हर चीज़ की लड़ के हासिल होती है कोई हमे रास्ता नहीं देता खुद ही रास्ता बनाने की कोसिस करनी होती है हार मान लेने से लक्ष्य को पाने में मौत को गले लगाना कही बेहतर हैं क्यों कि हारे हुए और मरे हुए कोई भेद नहीं होता ज़िन्दगी सतत संग्राम हैं यारों यहां हर चीज़ की लड़ के हासिल होती है »

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