Hindi-Urdu Poetry

Nature

Love is natural law, no body can avoid it. »

कविता बहती है

कविता बहती है कविता तो केवल व्यथा नहीं, निष्ठुर, दारुण कोई कथा नहीं, या कवि शामिल थोड़ा इसमें, या तू भी थोड़ा, वृथा नहीं। सच है कवि बहता कविता में, बहती ज्यों धारा सरिता में, पर जल पर नाव भी बहती है, कविता तेरी भी चलती है। कविता कवि की ही ना होती, कवि की भावों पे ना चलती, थोड़ा समाज भी चलता है, दुख दीनों का भी फलता है। जिसमें कोरी हीं गाथा हो, स्वप्निल कोरी हीं आशा हो, जिसको सच का भान नहीं, वो कोरे श... »

साया

तुम अपना न सही तो पराया ही कह दो, के मुझे झूठे मुँह अपना साया ही कह दो, इससे पहले के बन्द हो न जाएँ ये आँखे, था मुझे तुमने दिल में बसाया ही कह दो, न किसी ख्वाब न किसी रात में हम मिले, पर ढाई अक्षर तुम्हींने सिखाया ही कह दो, कहो कुछ भी जो तुमको कहना हो तो, मगर मुझसे तुम सच छिपाया ही कह दो।। राही अंजाना »

कुछ बीते पलों की बात थी

कुछ बीते पलों की बात थी उनसे हुई पहली मुलाकात थी रुक तो गया था वह शमां क्योंकि झुकी हुई पलकों की वो पहली शुरुआत थी कुछ बीते पलों की बात थी…. दीदार का वह एक हसीं आलम था पहली बार उनके लिए दिल मेरा गुलाम था आया तो था वहाँ पढ़ने लिखने लेकिन…. मेरी किताबों में तो बस उसका ही नाम था क्या बताऊं अब यहीं तो एक प्यार कि शुरुआत थी कुछ बीते पलों की बात थी …. पहले तो कॉलेज जाने पर ही चीड़ सा ज... »

मरता किसान

जमीं को खोदकर अपना आसमान ढूंढते है पसीने की हर एक बूँद से अनाज उगाते है सबके मोहताज होने के बाद भी यह किसान हम सब की भूख मिटा जाते है सूखापन जमीं के साथ-साथ इनके जीवन में भी आ जाता मेघ के इंतजार में यह जवान कभी बुढ़ा भी हो जाता अपना स्वार्थ कभी न देखकर यह हमारी भूख मिटाकर खुद भूखा ही मर जाता पानी की याद में यह अपनी नैना मूंदते है जमीं को खोदकर अपना आसमान ढूंढते है धरती का सीना चीर यह जीवन उगाते है... »

हम खुद काम जल्दी कराने के लिये रिश्‍वत देते है

“हम खुद काम जल्दी कराने के लिये रिश्‍वत देते है फिर देश मे भ्रष्‍टाचार बहुत है ये सोच कर हमे बुरा क्यो लगता है…………. हम होटलो मे बढी ही शानसे छुटु को आवाज़ देते है फिर बाल मजदूरी की बात करते समय हमे बुरा क्यो लगता है…………. हमने कभी अपने एरिया , मोहल्ले,कॉलोनी की सफाई के बारे मे नही सोचा तो स्‍वछता रॅंकिंग मे हमारा शहर पीछे है ये जानकर हमे बुरा क्... »

सांसों की आवाज़

सांसों की आवाज़ एक दूजे को सुनाई जाती है, होटों पर अक्सर ही ख़ामोशी दिखाई जाती है, एक चेहरे पर एक चेहरा कुछ इस कदर चढ़ता है, के जिस्म पर जैसे किसी कोई रूह चढ़ाई जाती है, किसमे कौन कहाँ कैसे समाया पता नहीं चलता है, जख्मों पर जब मोहब्बत की दवाई लगाई जाती है।। राही अंजाना »

पहचानी सी है

फिज़ा में खुशबू, पहचानी सी है। छिपी कहां, मुझमें तू सानी सी है। ढूंढे उसे जो खुद से अलग हो , मैं जिस्म और तू रूहानी सी है। सूखी, बंजर जिंदगानी थी पहले, मैं तपता सहरा, तू नीसानी सी है। तेरे बगैर कुछ भी नहीं वजूद मेरा, मेरी जिंदगी में, तू शादमानी सी है। तूने छुआ तो, मैं फिर से जी उठा, लगता परियों की, तू कहानी सी है। कोई शक नहीं, तू ‘देव’ के लिए बनी, खुदा की नेमत, तू निशानी सी है। देवेश स... »

हसीनों की वादियों में

हसीनों की वादियों में बदसूरतों को भी रहने दीजिए, दर्द कितना है फ़िज़ाओं में ज़रा हमें भी सहने दीजिए ! जानते हैं वक़्त है आपका पर हमें भी थोड़ी पनाह दीजिए, मारना है तो फिर मार डालना बस कुछ पल तो जीने दीजिए ! हसीनों की वादियों में …………………………………………………………… बहुत हुआ दीदार अब तो ज़रा सरमा दीजिए, नहीं बन पड़ रहा तो अनायास ही मुस्करा दीजिए ! आए हैं मेहमान आपके नज़रें तो उठा लीजिए, इतने भी बुरे नहीं ज़रा द... »

गफलत

जो भी जी में आए फेकिए जनाब तवा पे अपनी रोटी सेकिए जनाब गाय के नाम पे इंसानों को बाँटिए फिर तमाशा गौर से देखिए जनाब बाकी सब को भुला दीजिए आप बस खुद का नाम लिखिए जनाब गधों की रेस है हर पाँचवे साल आप सबसे तेज़ रेंकिए जनाब बड़ा मुश्किल है बिना इसके जीना कब्र पे भी एक कुर्सी टेकिए जनाब सलिल सरोज »

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