Hindi-Urdu Poetry

नवसंवत्सर को नज़राना

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Meri Manzil

Meri Manzil

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यादें

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खुदा मेरा भी अपना होता

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खुदा मेरा भी अपना होता

खुदा मेरा भी अपना होता

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कच्ची पेंसिल

कच्ची पेंसिल

आज कल के महंगे बॉलपेन से , मेरी कच्ची पेंसिल अच्छी थी || बॉलपेन की रफ़्तार से , मेरी पेंसिल की धीमी लिखावट अच्छी थी || गलती पर रब्बर पेंसिल का साथ , होता गुरु शिष्ये का आभास || गुरु की डाट पर वो रब्बर से मिटाना , लिखे पर फिर से पेंसिल घुमाना , सिखने तक ये सब दोहराना , वो बचपन की सीख सच्ची थी || बॉलपेन के स्थाईत्व से , मेरे बचपन की हर गलती अच्छी थी || आज कल के महंगे बॉलपेन से , मेरी कच्ची पेंसिल अच्... »

तेरे न होने का वज़ूद

एक तू ही है जो नहीं है बाकि तो सब हैं लेकिन… तेरे न होने का वज़ूद भी सबके होने पे भारी है मुझे भी जैसे तुझे सोचते रहने की एक अज़ीब बीमारी है। नहीं कर सकता आंखे बंद क्योंकि तेरा ही अक्ष नज़र आना है उसके बाद तब तक जब तक मैं बेखबर न हो जाऊ खुद के होने की खबर से और अगर आंखे खुली रखूँ तो दुनिया की फ्रेम में एक बहुत गहरी कमी मुझे साफ नज़र आती है जो बहुत ही ज्यादा चुभती चली जाती है क्योंकि उस फ्रेम में... »

SHAYARI

उसके चुप रहने का अंदाज़ बहुत कुछ कहता है इशारो की बातें हैं कोई लफ्ज़ भी इतने सलीखे से नहीं कहता है। »

कुछ भी नहीं

कुछ भी नहीं

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“Darta Hun Kahin Kho Na Dun”- अपने अधुरे प्यार को एक बार जरूर सुनना…,

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