Hindi-Urdu Poetry

बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है

बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है

बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है, चोटी की हर गुथ में वो मेरे गम बुहारा करती है।। राही (अंजाना) »

न दूध न रोटी के वो टुकड़े नज़र आते हैं

न दूध न रोटी के वो टुकड़े नज़र आते हैं

न दूध न रोटी के वो टुकड़े नज़र आते हैं, मेरे शहर में पाव और पीज़ा के रगड़े नज़र आते हैं, न मेरे गाँव की हवा न वो छप्पर छावँ नज़र आते है, ऊँची मीनारों के नीचे दबे संस्कृति के पाँव नज़र आते हैं।। राही (अंजाना) »

किसी को साधन नहीं, दो रोटी क्या दामन नहीं

किसी को साधन नहीं, दो रोटी क्या दामन नहीं

किसी को साधन नहीं, दो रोटी क्या दामन नहीं, कोई बस्ती में है बचपन से मस्ती के पैमानों की, बहुत बदल गई है दुनियाँ रस्में रीत गुनाहों की, तोड़ दीवारें लुट जाती हैं अस्मत यहां कुवारों की।। राही (अंजाना) »

मुक्तक

तेरा नाम कागज़ पर बार-बार लिखता हूँ। तेरे प्यार को दिल में बेशुमार लिखता हूँ। टूटेगा न सिलसिला तेरी तमन्नाओं का- तेरे ख़्यालों पर गमें-इंतज़ार लिखता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

सरहद के पहरेदार

मीठी सी है वो हँसी तेरी, आँसू तेरा भी खा़रा है, उन उम्र-दराज़ नज़रों का तू ही तो एक सहारा है। मेंहंदी से सजी हथेली भी करती तुझको ही इशारा है, कानों में गूँजी किलकारी ने पल-पल तुझे पुकारा है। ये सारे बँधन छोड़ के तू ने रिश्ता एक निभाया है, सरहद के पहरेदार तुझे पैगा़म सरहद से आया है। जब-जब धरती माँ जलती है, संग-संग तू भी तो तपता है; सर्द बर्फ़ के सन्नाटे में मीलों-मील भी चलता है। दूर ज़मीं से, नील गगन मे... »

Guftagu Band Na Ho

Guftagu Band Na Ho

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Kya Kare Koi

Kya Kare Koi

…..………………….Just A Few Lines……………….. उसकी खुशबू से महकी हैं सारी फ़िज़ाये गुलों के रंग भी यूँ फीके पड़ जाए न मय न मय-खाना ये जादू कर पाए उसका नशा यूँ, कोई क्या ही कर पाए…. जो बीते है हम पर कोई उनको बतलाये दिल हैं संभालें पर धड़कन ना आये आफत-ए-इश्क़ वो हमको समझाएं पर होवे दोबारा, कोई क्या ही कर पाए…. – पीयूष न... »

आंखे नम है

आज फिर तेरी आँखे नम है पता नहीं किस बात का तुझे गम हैं ज़िन्दगी के पल कुछ कम हैं नहीं तोह हाल ऐ दिल पगली हम भी पूछते ज्यादा ना सही थोड़ा ख्याल हम भी रखते »

Tera Khyal

Tera Khyal

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मुख पर हँसी और दिल में दर्द लिए बैठे हैं

मुख पर हँसी और दिल में दर्द लिए बैठे हैं, कुछ लोग इसी तरह हमें गुमराह किये बैठे हैं, रहते हैं साथ मगर खुद से दूर किये बैठे हैं, कुछ लोग जलकर भी रौशनी किये बैठे हैं।। राही (अंजाना) »

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