Hindi-Urdu Poetry

मुक्तक

अपनी यादों को मिटाना बहुत कठिन है। अपने गम को भूल जाना बहुत कठिन है। जब राहे-मयखानों पर चलते हैं कदम, होश में लौट कर आना बहुत कठिन है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

चाहत

चाहत

इस मतलबी शहर को छोड़कर भाग जाने का ” दिल चाहता”; लेकिन भाग कर कहाँ जाऊँ—– कही भी जाना होगा मतलबी शहर मे जाना होगा । लग रहा इसी” नरक” मे जीवन बीताना होगा; बार–बार होती है ऐसी चाहत मौत के सिवा कोई ना मिला “रास्ता” दुसरा चाह। ज्योति »

औजार

कलम की स्याही से शब्दों के औजार बनाकर, कल्पनाओं के चित्रों को मैने सरेआम ठोक दिया।। राही (अंजाना) »

हल

मैं ही हल हूँ उस उलझे सवाल का, जिसे किसीने अब तक पूछा नहीं।। राही (अंजाना) »

चल आज तू……

चल आज तू मुझे अपना रहनुमा बना दे, इसी बहाने मेरी ज़िन्दगी भी खुशनुमा बना दे…….!! -Dev Kumar »

चल आज तू

चल आज तू मुझे अपना रहनुमा बना दे, इसी बहाने मेरी ज़िन्दगी भी खुशनुमा बना दे…….!! -Dev Kumar »

चली कलम फिर…….

चली कलम फिर आज कागज पर एक नगमा सा वो बन गया तन्हाई ने फिर करवट बदली एक गमो का जलसा सा वो बन गया देव कुमार »

खुली आँखों का खुवाब……

खुली आँखों का खुवाब अच्छा नहीं होता बेबसी का रुआब अच्छा नहीं होता जो अपने बन कर भी न बन सके अपने उन पर मोहोब्बत का दवाब अच्छा नहीं होता देव कुमार »

Es dil ki Ek zid hai……

Es dil ki Ek zid hai Bas wo puri Ho jaaye….! Ham aur hamari mohobbat Dono uske liye jaruri Ho jaaye….!! -Dev Kumar »

Logo se apna chehra…….

Logo se apna chehra chupa ke rona Ke aansuon ko ankhon main chupa ke rona…….! Log padh lete hai har lakiron ko Jab bhi Rona lakiron ko meeta kar Rona…….!! Dev Kumar »

Page 2 of 4491234»