Hindi-Urdu Poetry

झुठा बादा।।

मेरे होकर भी मेरे खिलाफ चलते है, मेरे फैसले देख तब पर भी साथ चलते है।। ज्योति »

जाने क्या क्या छुटेगा

सब कुछ अपना छूट गया है छूट गई लरिकाइं भी बचपन जिसके साथ गुजारा छूट गया वो भाई भी माँ का प्यारा आँचल छूटा छूट गई अँगनाइ भी पोखर ताल तलैय्या छूटे छूट गई अमराई भी क्या क्या छूटा क्या बतलाऊँ रोजी रोटी पाने में अपनी सारी दौलत छूटी दो सिक्कों को कमाने में बहना बिन है सुनी कलाई डाक से राखी आती है सारे रिश्ते पास हैं लेकिन हम तन्हा हैं ज़माने में बीवी बच्चों का एक छोटा सा संसार बचा है बस जब से अपना गाँव ह... »

हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का

हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते यही सबसे बड़ा कसूर है ज़िंदगी का जिंदगी के हर पल को ख़ुशी से बिताओ रोने का समय कहां, सिर्फ मुस्कुराओ चाहे ये दुनिया कहे पागल आवारा याद रहे, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा »

बापू

बापू

जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे, कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे, जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे, सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये थे, सच की ताकत के आगे जब तोपो के रंग उड़ाए थे, गांधी मशाल ले हाथ सभी ने विदेशी दूर भगाए थे, सत्याग्रह की आग लिए जब मौन रक्त बहाये थे, मानवता और अधिकारों का खुल कर बोध कराये थे, डांडी यात्रा में गांधी जी जब समुद्र किनार... »

गांधी

जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे, कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे, जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे, सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये थे, सच की ताकत के आगे जब तोपो के रंग उड़ाए थे, गांधी मशाल ले हाथ सभी ने विदेशी दूर भगाए थे, सत्याग्रह की आग लिए जब मौन रक्त बहाये थे, मानवता और अधिकारों का खुल कर बोध कराये थे, डांडी यात्रा में गांधी जी जब समुद्र किनार... »

साहिर

साहिर

साहिर तेरी आँखों का जो मुझपर चल गया, खोटा सिक्का था मैं मगर फिर भी चल गया, ज़ुबाँ होकर भी लोग कुछ कह न सके तुझसे, और मैं ख़ामोश होकर भी तेरे साथ चल गया।। समन्दर गहरा था बेशक मगर डुबो न सका, के तेरे इश्क ऐ दरिया में जो ‘राही’ चल गया, दारु के नशे में जब सम्भला न गया मुझसे, छोड़ कर चप्पल मैं घर पैदल ही चल गया।। राही (अंजाना) »

Mai Karen Sakta hoon

Kabhi kabhi Mai sochta hoon Mai kya kar Sakta hoon Samaj ki rudhiyo se Bandkar jee Sakta hoon Julm sah Sakta hoon yaa Julm karke khus ho Sakta hoon Sach bataye Gaye jhooth Ko Apna Sakta hoon yaa Soup Sakta hoon saara Jeevan Satya ki talaash me Jaise bhatakta hai hiran kastoori ki aas me Purane paribhashao se santoost ho Sakta hoon yaa Nayee paribhashae Dhoondh Sakta hoon Kabhi÷kabhi Mai sochta hoo... »

मोहब्बत

मोहब्बत

मोहब्बत के ख्वाब ने ये कैसा इत्तेफ़ाक कर दिया, दिल्लगी ने धड़कन को ही दिल के खिलाफ़ कर दिया, अच्छी ख़ासी तो चल रही थी ज़िन्दगी ‘राही’ अपनी, फिर क्या हुआ जो इस नशे ने तुम्हें ख़ाक कर दिया।। राही (अंजाना) »

ख़ुद का साथ चाहिए

मैं ख़ुद को ख़ुद से बाहर निकालना चाहता हूं, मैं कुछ करके दिखाना चाहता हूं। कोई मेरा साथ दे ना दे, मैं ख़ुद का साथ ख़ुद पाना चाहता हूं। मेरा दिल बहुत डरता है, कभी कभी दिमाग भी उलझता है। कभी कभी दिल और दिमाग का टकराव भी हो जाता है। कभी कभी सहना हद से बाहर हो जाता है। मैं दोनों का मसला सुलझाना चाहता हूं। मैं ख़ुद को ख़ुद से बाहर निकालना चाहता हूं। मनप्रीत गाबा »

स्वच्छता

कुछ फर्ज मेरा है कुछ फर्ज तुम्हारा है देश को स्वच्छ रखना ये फर्ज हमारा है….. देश की स्वच्छता का नारा लगाओ जन सेवा मे हाथ बढाओ ….. झाड़ू हमारा हथियार हो भारत भूमि से हमे प्यार हो अच्छी आदते तुम भी डालो कूड़ा कूड़ेदान में डालो …. पोलीथिन बैग न जलाओ सब्जियां जुट के थैले में लाओ प्लास्टिक बोतल दुबारा इस्तेमाल करो अपनी बुरी आदतों में सुधार करो …. मनप्रीत गाबा »

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