Hindi-Urdu Poetry

जब होगा दीदार रब का

जब होगा दीदार रब का तो पूछुंगी मैं की तेरी इबादत मोहब्बत में इतनी अड़चने क्यों हैं »

कोई क्या कहता है

कोई क्या कहता है परवाह किसे है आंखे जब मुहब्बत से रोशन है तो रातो दिन की फिक्र किसे है »

गुरुर

इतना गुरुर ना कर अपनी खुबसुरती पड़ यह तोह उम्र के साथ चला जायेगा जितना उस खुदा ने प्यार और शिद्दत ने तुझे बनाया काश उतना अच्छा दिल दिया होता तोह इतनी ज़िंदगियां बर्बाद ना होती »

मैं क्यों कन्हैया ?

(I) मैया, ओ मेरी मैया! क्यूँ कहती मुझे कन्हैया? कृष्ण और मैं — वो द्वापर का दुलारा, मैं कलयुग का मारा। वो नयनों का तारा, मैं दिलों से हारा। वो जगत में सबसे न्यारा, मैं तो किसी को भी नही प्यारा।। बता मेरी मैया, क्यूँ बोले है तू मुझे कन्हैया? (II) ओ मेरे लाल, मेरे बाल गोपाल — कृष्ण और तू ? कृष्ण देख यशोदा मुस्काये, तोहे देख मोरा मन रिझाये। वो दिल और माखन चुराये, तू भी मेरा नींद चैन ले जाये। वो यशोदा... »

मदहोश

होश में रहने वाले ही अक्सर बेहोश निकले, बिना पिए ही पीने वालों से मदहोश निकले, बोलने वालों की भीड़ का जायज़ा किया हमने, न बोलने से बोलने वाले ज्यादा ख़मोश निकले, जो बहाने बनाते रहे साथ हैं हम तुम्हारे कहके, बगल में रहने वालों से ज़्यादा सरगोश निकले।। राही अंजाना »

वही पुरानी तसल्ली

खूब निभाया था जिसने वो मुश्किल की बात थी मिला मुकद्दर मे जो मेरे meri औकात थी Rajjneesh »

वह दर्द बीनती है

वह दर्द बीनती है टूटे खपरैलों से, फटी बिवाई से राह तकती झुर्रियों से चूल्हा फूँकती साँसों से फुनगियों पर लटके सपनों से न जाने कहाँ कहाँ से और सजा देती है करीने से अगल बगल … हर दर्द को उलट पुलटकर दिखाती है इसे देखिये यह भी दर्द की एक किस्म है यह रोज़गार के लिए शहर गए लोगों के घरों में मिलता है .. यह मौसम के प्रकोप में मिलता है … यह धराशाई हुई फसलों में मिलता है … यह दर्द गरीब किसान... »

हमारे हर लम्हे की कोशिश

हमारे हर लम्हे की कोशिश तुम्हारी रूह तक जाने की थी मगर अफ़सोस आप ही इससे अनजाने थे »

वही पुरानी तसल्ली

वो जो कमी थी मैं काबिल न हुआ, मेरे नसीब मे मुहब्बत कभी काबिल न हुआ। Rajjneesh »

वही पुरानी तसल्ली

तेरे मुहब्बत मे न जाने कितने तराने थे, मै आशिक था जब तेरे फ़साने थे। »

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