Ghazal

मैं प्यार दूंगा .

भुला सकोगे न तुम कभी भी , की  तुमको इतना मैं प्यार दूंगा . जो होगा चुलमन वो  होंगी  आँखे , उसी से तुमको निहार लूंगा . मगर रहे याद तुम्हे सदा ये,  उसी में नज़रें उतार लूंगा . तू मेरा साकी मैं रिन्द तेरा,  ये मयकदा ही तेरा बसेरा , पिला कभी तो मेरे हमनफ़स , तुम्हारे दर पे खड़ा हु बेबश , नज़र न फेरो , पिला के जाओ, कसम है दिल में उतार लूंगा .. भुला सकोगे न तुम कभी भी, की तुमको इतना मैं प्यार दूंगा.. …... »

दिल का धुंआ भी तो देखा जाये….

  कोई तो रंग मिलाया जाये दिल का धुंआ भी तो देखा जाये। बेबसी ये कि रोक भी न सको और कोई पास से चला जाये। जहां सेे भूले थे घर का रस्ता फिर उसी मोड़ पे जाया जाये। आईने और कितने बदलोगे अक्स अपना कभी बदला जाये। जिदंगी की किताब देखें जरा कोई तो लफ्ज समझ में आये। वक्त की तरह मिला हूं उनसे क्या पता लौटकर न हम आये। …………सतीश कसेरा »

कौन किस्मत से भला जीता है……

कौन किस्मत से भला जीता है………. ये उसके खेल का तरीका है कौन किस्मत से भला जीता है। पहुंच न पाते कभी मंजिल तक रास्तों को भी साथ खींचा है। सुबह दिल खूब लहलहायेगा रात भर अश्क से जो सींचा है। कोई दुआ या बद्दुआ तो नहीं कौन करता ये मेरा पीछा है। सुबह उठ जाये वो ऐसे-कैसे रात भर बैठ कर तो पीता है। लकीरें हाथ की न गिर जाएं कस के मुट्ठी को जरा भींचा है। ……………... »

उसके चेहरे से …

उसके चेहरे से …

उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहींवो जो मिल जाये अगर चहकती कहीं जिन्दगी मायूस थी आज वो महका गयीजेसे गुलशन में कोई कली खिलती कहीं वो जो हंसी जब नजरे मेरी बहकने लगीमन की मोम आज क्यों पिगलती गयी महकने लगा समां चांदनी खिलने लगीछुपने लगा चाँद क्यों आज अम्बर में कहीं भूल निगाओं की जो आज उनसे टकरा गयीवो बारिस बनकर मुझ पे बरसती गयी कुछ बोलना ना चाहते थे मगर ये दिल बोल उठाधीरे- धीरे मधुमयी महफिल जमती गयी आँ... »

एक मुलाकात की तमन्ना मे

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहेएक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे आप हमारी हकीकत तो बन न सकेख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल काबिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम मेंहम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहे जब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस मेंएक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे »

खुदा का घर है आसमान, वो रहे रोशन——————-

खुदा का घर है आसमान, वो रहे रोशन——————- पता करो कि कहां, किसने जाल फैलाया सुबह गया था परिन्दा वो घर नहीं आया। रोशनी में ही चलेगा वो साथ—साथ मेरे कितना डरता है अंधेरों से ये मेरा साया। मेरी आहट को सुनके बंद रही जब खिडकी बडी खामोशी से मैं उसकी गली छोड आया। धूप में जलते हुए उससे ही देखा न गया पेड मेरे लिये कुछ नीचे तलक झुक आया। मुझे पता था कि तूफान यूं न मानेगा मैं... »

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है बात इतनी है कि लिबास मेरे रूह से अनजान है­­ तारीकी है मगर, दिया भी नहीं जला सकते है क्या करे घर में सब लाक के सामान है ऐसा नहीं कि कोई नहीं जहान में हमारा यहां दोस्त है कई मगर, क्या करें नादान है कोई कुछ जानता नहीं, समझता नहीं कोई यहां जो लोग करीब है मेरे, दूरियों से अनजान है घर छोड बैठ गये हैं मैखाने में आकर कुछ नहीं तो मय के मिलने का इमकान है ढूढ रहा हूं खुद को, क... »

मैं सूरज को किसी दिन……………….

मोहब्बत करके पछताने की खुद को यूं सजा दूंगा तुम्हें यादों में रक्खूंगा मगर दिल से भूला दूंगा। रहो बेफ्रिक तूफानों तुम्हारा दम भी रखना है किनारा आने से पहले मैं कश्ती को डूबा दूंगा। ऐ लंबी और अकेली रातों इतना मत सताओ तुम मैं सूरज को किसी दिन वक्त से पहले उगा दूंगा। यूं ही घुट—घुट के रोने की मुझे आदत नहीं यारो किसी दिन टूट कर बरसूंगा, सब आंसू बहा दूंगा। कहानी कहने में भी हुनर की होेती जरुरत है यूं अ... »

गीत मेरे..

नैनो के सूखे मेघो से मैं आज अगर बरसात करूँ , हल करुँ ज़मीन ए दिल में मैं नीर कहाँ से मगर भरूँ? है सूख चुका अब नेत्र कूप न मन का उहापोह बचा , न मेघ रहा न सावन है ,मिट गया जो कुछ था पास बचा . एक बार हौसला करके मैंने बीज प्रेम के बोये थे , न मौसम ने रखवाली की ,सावन ने पात न धोये थे . अब न मन है , न मौसम है ,न उर्वर क्षमता धरती की , न नैनो में अब पानी है ,न दिल में इच्छा खेती की . रोते है मेघ और कूप सभ... »

तो अच्छा हो

ज़रा कुछ देर रहमत हो सके तो अच्छा हो , ज़रा मन शांत होकर सो सके तो अच्छा हो.  . ख़तो के ज़ाल में उलझे हुए है मीर हम ,  ज़रा कुछ देर खुद में खो सके तो अच्छा हो .   . गुज़र गया है मुसाफिर फिर शहर से तेरे ,  तेरा कुछ राब्ता दिल हो सके तो अच्छा हो .   . न कह पाया जुबा से हाल दिल का अब तलक,  ज़रा अब हर्फ़ मेरे कह सके तो अच्छा हो.   . सुना है हिज़्र के किस्से ,विरह की दास्ताँ समझी,  ज़रा अपना भी दिल अब रो सके तो ... »

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