Ghazal

मैं सूरज को किसी दिन……………….

मोहब्बत करके पछताने की खुद को यूं सजा दूंगा तुम्हें यादों में रक्खूंगा मगर दिल से भूला दूंगा। रहो बेफ्रिक तूफानों तुम्हारा दम भी रखना है किनारा आने से पहले मैं कश्ती को डूबा दूंगा। ऐ लंबी और अकेली रातों इतना मत सताओ तुम मैं सूरज को किसी दिन वक्त से पहले उगा दूंगा। यूं ही घुट—घुट के रोने की मुझे आदत नहीं यारो किसी दिन टूट कर बरसूंगा, सब आंसू बहा दूंगा। कहानी कहने में भी हुनर की होेती जरुरत है यूं अ... »

गीत मेरे..

नैनो के सूखे मेघो से मैं आज अगर बरसात करूँ , हल करुँ ज़मीन ए दिल में मैं नीर कहाँ से मगर भरूँ? है सूख चुका अब नेत्र कूप न मन का उहापोह बचा , न मेघ रहा न सावन है ,मिट गया जो कुछ था पास बचा . एक बार हौसला करके मैंने बीज प्रेम के बोये थे , न मौसम ने रखवाली की ,सावन ने पात न धोये थे . अब न मन है , न मौसम है ,न उर्वर क्षमता धरती की , न नैनो में अब पानी है ,न दिल में इच्छा खेती की . रोते है मेघ और कूप सभ... »

तो अच्छा हो

ज़रा कुछ देर रहमत हो सके तो अच्छा हो , ज़रा मन शांत होकर सो सके तो अच्छा हो.  . ख़तो के ज़ाल में उलझे हुए है मीर हम ,  ज़रा कुछ देर खुद में खो सके तो अच्छा हो .   . गुज़र गया है मुसाफिर फिर शहर से तेरे ,  तेरा कुछ राब्ता दिल हो सके तो अच्छा हो .   . न कह पाया जुबा से हाल दिल का अब तलक,  ज़रा अब हर्फ़ मेरे कह सके तो अच्छा हो.   . सुना है हिज़्र के किस्से ,विरह की दास्ताँ समझी,  ज़रा अपना भी दिल अब रो सके तो ... »

मुक्तक 5

जिंदगी बीत जाती है किसी को चाह कर कैसे?  कोई  बतलाये  तो मुझको मैं जीना भूल बैठा हूँ… अदा भी तुम ,कज़ा भी तुम ,मेरे दिल की सदा भी तुम, तुम्ही  अब चैन हो मेरे ,मेरे दिल की दुआ भी तुम.. तुम्हारे प्यार की उल्फत मेरे दिल की ये तन्हाई, तुम्हारे प्यार की आहट मुझे जब शाम को आई सुबह तक सो न पाया मैं, बस यही याद थी दिल में, कि मैं तूफ़ान में अटका ,नहीं हो तुम भी साहिल में… …atr »

मुक्तक 4

यहाँ हर शख्स है तेरा, वहां हर कब्र है मेरी, जहाँ कैसा बनाया है खुद ने क्या इरादा था? अब तो हालात भी मुझसे मिचौली आँख करते है, को सपनो में आता है ,किसी को याद करते है. मुझे है डर कहीं फिर से किसी हूरों की महफ़िल में, उड़ाया फिर से न जाये ,ये कुचला जिगर मेरा.. …atr »

तेरी चाहत

तेरी चाहत में इतना  मैं पराया हो गया खुद  से , कि दिल मेरा है फिर भी बात  करता है सदा तेरी.. कभी वो चांदनी मेरी थी, अब पावस की है यह रात, नहीं दिल में मेरे अब वो, नहीं हाथो में उसका हाथ.. न वो मेरी न मैं उसका तो फिर ये बीच का क्या है, नहीं देखूंगा अब उसको जो चेहरा चाँद जैसा है… …atr »

मेरी हार …

मोहब्बत में हारे, क़यामत  में हारे की ये ज़िंदगी हम शराफत में हारे.. न कोई है अपना ,न कोई पराया, अब जियें किसलिए  और किसके सहारे.. न है यामिनी आज जीवन में मेरे , मिटे, मिट गए आज हम फिर किनारे.. कभी  लए  से सांसे जो चलती  थी  मेरी , मगर अब खड़े आज बेबस बेचारे.. मिला भी नहीं कुछ ,बचा  भी नहीं कुछ, जो था पास में सब तुम्हारे  पे हारे… मोहब्बत में हारे ,क़यामत  में हारे, की ये जिंदगी  हम शराफत में हा... »

तुम्हे पाने की खातिर.

वो मंज़र याद है तुमको ,जुदा हम तुम हुए थे जब, समंदर याद है तुमको जहाँ पत्थर चलाया था.. कभी जब याद आ जाये ,ज़रा हमको भी करना याद , किसी के साथ जो तुमने वहां कुछ पल बिताया था. नहीं दिल से अभी वो शाम जाती है , नहीं होता सवेरा, की जब से तुम गए हो मीर, मेरा जीवन अँधेरा. ख़ुदा कैसी तमन्ना है,की मैं अब भी तरसता हूँ, पता मुझको , यकीं मुझको, मगर फिर भी मचलता हूँ…    तुम्हे पाने की खातिर,तुम्हे पाने की ख... »

छुपा है चाँद बदली में…

छुपा है चाँद बदली में ,अमावस आ गयी है क्या? नहीं देखा कभी जिसको वही शर्मा गयी है क्या? मिलन की रात में ये घुप्प अँधेरा क्यों सताता है ? वो मेरा और उसका छुप छुपाना याद आता है.. अभी तो थी फ़िज़ा महकी , क़यामत आ गयी है क्या? कभी वो थी कभी मैं था, कभी चंचल चमकती रात,  न वो कहती ,न मैं कहता मगर आँखे थी करती बात.. जिन आँखों में हया भी थी,कज़ा अब आ गयी है क्या? वो नदियों के किनारो पर जहाँ जाता था मिलने को, व... »

तेरे शहर में..

आज हम भी है मेहमान तेरे शहर में,  दिखता नहीं मकान तेरे शहर में. ग़ुम हो गयी है शाम  की मस्ती  भी अब यहाँ, ग़ुम  हो गया करार तेरे शहर में.. आते  राहों  में मिल  गया तेरा आशिक, कहने लगा  न जाओ तेरे शहर में. जब से तुमने छोड़ा है दस्त ए गुलाब को, वन हो गया वीरान ,तेरे शहर में. बन्दों का हाल ऐसा मैं कह न सकता मीर, पागल हुए जवान   तेरे शहर में. दिन भर उठी है धूल,पैरों में आ लगी, मैंने कहा  सलाम है,तेरे शहर... »

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