Ghazal

उनके लब कांप गए, मेरी आंख भर आई……

मिले थे फिर से तो, पर बात न होने पाई उनके लब कांप गए, मेरी आंख भर आई। बुझ गए थे सभी चिराग मगर इक न बुझा तो हवा जा के आंधियों को साथ ले आई। जंहा से दूर निकल आये थे, वहीं पहुंचे मेरे सफर में हर इक बार उसकी राह आई। अपने हालात पे खुद रोये और खुद ही हंसे हमीं तमाशा थे और हम ही थे तमाशाई। मेरे हर दर्द से वाकिफ है आस्मां कितना हम न रोये थे तो बरसात भी नहीं आई। जिंदगी भर उनकी हर याद संभाले रक्खी उम्र भर इ... »

जो आँख देख ले उसे

जो आँख देख ले उसे वो वहीं ठहर जाती हैदेखते देखते उसे शाम ओ सहर बीत जाती है फ़लक से चाँद भी उसे देखता रहता है रातभरउसकी रूह चाँदनी ए नूर में खिलखिलाती है महकते फूल भी उससे आजकल जलते हैतसव्वुर से उसके फिजा सारी महक जाती है मदहोश हो जाता है मोसम लहराए जो आचॅल उसकाजुल्फें जो खोल दे वो तो घटाऍ बरस जाती है तनहाइयों में जब सोचता हूं उनकोशब्द ओ शायरी खुद ब खुद सज जाती है »

वरना कौन अपनी नाव देता है………………

पत्ता-पत्ता हिसाब लेता है तब कहीं पेड़ छांव देता है। भीड़ में शहर की न खो जाना ये दुआ सबका गांव देता है। हम भी तो डूबने ही निकले थे वरना कौन अपनी नाव देता है। किसी उंगली में जख्म देकर ही कोई कांटा गुलाब देता है। जहां बिकेगा बेच देंगे ईमां कौन मुहमांगा भाव देता है। जान देने का हौंसला हो अगर फिर समंदर भी राह देता है। जिंदगी दे के ले के आया हूं कौन यूं ही शराब देता है। प्यार खिलता है बाद में जाकर पहल... »

कौन सा दर्द सुनाया जाए……….

कौन सा दर्द सुनाया जाए………. नींद को ढूंढ के लाया जाए चलो कुछ देर तो सोया जाए। जल गई इंतजार में आंखें अब जरा अश्क बहाया जाए। आ के फिर बैठ गईं हैं यादें कौन सा दर्द सुनाया जाए। हमने जाना है दर्द जलने का इन चरागों को बुझाया जाए। रात को टूटेंगे कितने तारे ये जमीं को भी बताया जाए। अपनी तकदीर में रोना है अगर सबको हंस-हंस के बताया जाए। ~~~~~~~~~~~सतीश कसेरा »

ऐसे महसूस हम इक दूसरे को करते रहे………

वो जमीं आसमां भी दूर रह के मिलते रहे हम अपने फासिलों में रहके बस तड़पते रहे। हमारे बीच खामोशी की नदी बहती रही हम किनारों की तरह वैसे साथ चलते रहे। जरा सा जिक्र ही छेड़ा था उनके वादों का वो सर झुका के बेबसी से हाथ मलते रहे। लबों तक आ के बर्फ हो गई कितनी बातें लफ्ज अंगारे से बनकर जुबां पे जलते रहे। हवा हम दोनों के जिस्मों की छुअन लाती रही ऐसे महसूस हम इक दूसरे को करते रहे। उदास नजरों से उठकर चले गए ... »

दूर से कब वो समझ आता है……..

कुछ तो होता जरुर नाता है ऐसे कोई नहीं मिल जाता है। उसी के सामने दिल को खोलें जिसे कुछ हाल पढऩा आता है। फिर कोई भीड़ ही नहीं लगती भीड़ में जब वो नजर आता है। किसको रख लें, किसे गिरा दें वो ये तो नजरों को खूब आता है। साथ चलती रहे दुनिया सारी साथ कोई एक ही निभाता है। उसके दिल में उतर के देखेंगे दूर से कब वो समझ आता है। साथ उनका तो बस बहाना था रास्ता तो हमें भी आता है। ………….सतीश... »

कहीं बेघर ने इक छत का सहारा कर लिया होता…….

कहीं बेघर ने इक छत का सहारा कर लिया होता तो फिर हर हाल में उसने गुजारा कर लिया होता। मुसाफिर का सफर थोड़ा जरा आसान हो जाता अगर रस्तों ने मंजिल का इशारा कर दिया होता किनारे पर ही आकर के अगर हर बार डूबेगी तो तूफां में ही कश्ती ने किनारा कर लिया होता। अभी बाकी तुम्हारी दास्तां थी, क्या पता उनको वो रुक करके चले जाते, इशारा कर दिया होता। तेरी रंगीन दुनियां देखने को वो भी तरसे हैं जो आंसू सूख पाते तो नज... »

चांद पे चरखा चलाती रही……..

चांद पे चरखा चलाती रही…….. खुदा की दुनिया है, इसमें तो क्या कमी होगी हमारी आंख ही में ठहरी कुछ नमी होगी। जितना जीने के लिये चाहिये वो सब कुछ है नहीं लगता है कि ऐसी कहीं जमीं होगी। फिर से कोई सुना के हो सके तो बहला दे वो सब कहानियां बचपन में जो सुनी होंगी। चांद पे चरखा चलाती रही बुढिया कब से इतना काता है तो कुछ चीज भी बुनी होगी। आईना बन के चमकती है आस्मां के लिये वो बर्फ आज भी पहाड़ पर ... »

कि दिल का हाल चेहरे से कुछ ब्यां न हो…

वो जब गली से गुजरें तो, कोई वहां न हो घर के सिवाय मेरे कोई, घर खुला न हो। बेहतर है कि दीवारों से, कुछ दूर ही मिलें दीवारों के भी कान कहीं दरम्यां न हों। मुमकिन है मिल रहीं हों, हाथों की लकीरें पर बीच में तो कोई बुरा, ग्रह पड़ा न हो। अब ये भी अदाकारियां, देता है इश्क ही कि दिल का हाल चेहरे से कुछ ब्यां न हो। ये डर भी साथ हो कि मोहब्बत की राह में खाई तो पार कर लें, आगे कुआं न हो। कितने ही दर्द इश्क ... »

कोई खिड़की नहीं, झरोखा नहीं….

उसने जब उठते हुए रोका नहीं मैने भी चलते हुए सोचा नहीं। सामने सबके गले लग के मिले कभी तन्हाई में तो पूछा नहीं। इतना हंसना, ये मुस्कराना तेरा कहीं जमाने से तो धोखा नहीं। कैसे आऊं बता तेरे दिल में कोई खिड़की नहीं, झरोखा नहीं। नींद आ जाए, अश्क बहते रहें वैसे इस तरह कोई सोता नहीं। आप हीं बदलें खुद अपना चेहरा आईने में तो हुनर होता नहीं। …….सतीश कसेरा »

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