Ghazal

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मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत की दुश्मन है औरत सच तो सच है बेशक थोड़ा कड़वा है सबकी हसरत अच्छे घर जाए बेटी लड़का कितना महगां हो पर चलता है शादी क्या है सौदा है जी चीज़ो का खर्च करेगा ज्यादा वो ही बिकता है लुटने वालो को लूटे तो क्या शिकवा आज लकी मै भी लूटूँ तो कैसा है »

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मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत की दुश्मन है औरत सच तो सच है बेशक थोड़ा कड़वा है सबकी हसरत अच्छे घर जाए बेटी लड़का कितना महगां हो पर चलता है शादी क्या है सौदा है जी चीज़ो का खर्च करेगा ज्यादा वो ही बिकता है लुटने वालो को लूटे तो क्या शिकवा आज लकी मै भी लूटूँ तो कैसा है »

कुछ न कुछ टूटने का सिलसिला आज भी ज़ारी है

कुछ न कुछ टूटने का सिलसिला आज भी ज़ारी है इस दुनिया का डर प्यार पे आज भी भारी है।। टूटकर बिखरना, बिखरकर समिटना आज भी जारी है, पर पड़ जाए ना दरार इस बात का डर आज भी भारी है। झुकना गिरना हवाओं के झोंकों से आज भी जारी है, टूट कर ना उखड़ जाऊं इस बात का डर आज भी भारी है, कहना, सुनना, लड़ना, झगड़ना उनसे आज भी जारी है, खामोश ना हो जाए वो कहीं इस बात का डर आज भी भारी है॥ बहुत कुछ कर गुजरने की कश्मकश आज भी जार... »

मुहब्बत की गली कूचों में क्या है

गजल : कुमार अरविन्द मुहब्बत की गली कूचों में क्या है | इधर देखो मेरी आँखों में क्या है | बड़ा ही जोर है उन के जुबां में | नही तो जोर जंजीरों में क्या है | ये करने वाले हैं कर जाते हैं सब | वगरना आग तकरीरों में क्या है | खुदाया दिल नही देखा कहीं पे | खुदा को पा गये ख्वाबों में क्या है | »

चले आओ मेरी आँखों का पानी देखते जाओ

गजल : कुमार अरविन्द चले आओ मेरी आंखों का पानी देखते जाओ | कहानी है तुम्हारी ही , निशानी देखते जाओ | मैं जिन्दा हूं तुम्हारे बाद भी तुमको तसल्ली हो | कफ़न सरका के मेरी बे – ज़बानी देखते जाओ | तुम्हारी बेबफाई का उतारूं आज मैं ‘ सदका | मेरी यूं ‘ ख़ाक में मिलती जवानी देखते जाओ | कहां गुजरी गुजारी जिंदगी तुमको पता कैसे | मेरे इस दर्द की पागल कहानी देखते जाओ | हमारे पैरहन से ख़ुशबुएं आती... »

न करो चमन की बरबाद गलियां

✍🌹अंदाज 🌹✍ ——-$——– ✍ न करो चमन की बरबाद गलियां कुचल के सुमन रौंद कर कलियाँ पुरुषार्थ है तुम्हारा तरूवर लगाना बागो मे खिलाना मोहक तितलियां आगाज करो नव राह बदलाव के गुलशनो मे रहे सुकून की डलियां माली हो तुम करो महसूस यहां समझो सृजन की सत्य पहेलियां मासूम वृक्ष लताएं हैं सव॔ धरोहर फैलने दो इनकी मंत्रमुग्ध लडियां संस्कार धरो प्रकृति का मान रखो धरती पे निखारों मानवीय कडिया... »

नूर हो तुम आफताब हो तुम

✍🌹(अंदाज) 🌹✍ ——-$—— ✍ नूर हो तुम आफताब हो तुम लहर हो तुम लाजवाब हो तुम मेरे चाहते दिल की तमन्ना जवाॅ दिलकश गजब शबाब हो तुम जिसे समझा मैने दिल से अपना मुक्कमबल सच्चा ख्वाब हो तुम देख कर चढता है नशा मुझमे दिलकश नशीली शराब हो तुम हर दिन पल तुझको पढता हूं मै सुकून भरी मेरी किताब हो तुम ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍🌹💛🙏🏻💛🌹✍ (दिनांक -25-04-2018) »

उठ जाग मत थक हार इंसान तू

✍🌹(अंदाज )🌹✍ ———-$———- ✍ उठ जाग मत थक हार इंसान तू मानवीय औकात निखार इंसान तू है तू प्रचंड शक्ति शाली बलवान आत्म ज्ञान परख संवार इंसान तू मानवता का न गिरने दे स्तर यहाॅ स्व पहचान कर रख धार इंसान तू तेरा कम॔ चरित्र गुण की हो पूजा अपना शौर्य सूर उबार इंसान तू विकृत परिवेश प्रथा हालात हटा बुध्दि शक्ति से कर वार इंसान तू ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍🌹💛🙏🏻... »

घोर कलियुग है देख पाप प्रबल

✍🌹(अंदाज )🌹✍ ———$——- ✍ घोर कलियुग है देख पाप प्रबल चंहुदिश क्षुद्र देख विद्रूप दलदल दूषित जल घना हवाएं प्रदूषित मन मे मैल देख बेईमानी सबल स्वभाव मे मिठास बोली मे छल दिखावा ठोस देख बुध्दि मे नकल कपट भाव है अंतस मे रचा-बसा आचरण मे नाटक का देख अकल आपसी मेल मिलाप मे छुपा स्वाथं मानव मे चाल देख कुटिल सफल ✍ श्याम दास महंत घरघोडा जिला-रायगढ (छग) ✍🌹💛🙏🏻💛🌹✍ (दिनांक -26-04-2018) »

Kya??

mauz e zindgi humari unhei achi nhi lagti Kya… Jo takleefo k farman bejwa deti Hai wo.. cherei par hasi humarei haseen nhi lagti Kya.. Jo sikan ki lakire la deti Hai wo.. raat ko aankh band krnei ki rshm thi Jo wo, ab nhi hoti kya .. jo nindo sei b ab jaga deti Hai wo… mar mar k ji raha hun itna hi kaafi nhi Kya… Jo ab meri dhadkano ko b thaam deti Hai wo.. »

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