Ghazal

साजन

तुझको ही बस तुझको सोचू इतना तो कर सकती हूँ,,,,,,,,, तेरे ग़म को अपना समझू इतना तो कर सकती हूँ ।।।।।।।।।। मुझको क्या मालूम मुहब्बत कैसे करती है दुनिया,,,,,,, हद से ज्यादा तुझको सोचू इतना तो कर सकती हूँ ।।।।।।।।। इस दिन को तू मेरे सजना इतना तो ह़क दे देना,,,,,,,,,,,, छलनी में से तुझको देखू इतना तो कर सकती हूँ ।।।।।।।।। आज मुबारक वो दिन आया सामने मेरा साजन है,,,,,,,,,, तेरे ग़म के आँसू पी लू इतना तो ... »

￰वतन

वतन पे है नजर जिसकी बुरी उसको मिटा देगें,,, सबक ऐसा सिखा देगें कि धड से सर उडा देगें।। जहाँ पानी बहाना है वहां पर खून देगें हम,,, वतन से प्यार कितना है जहाँ को हम दिखा देगें।। हजारो साल काटे हैं गुलामों की तरह हमने,,, नहीं अब और सहना हैं ये दुनिया को बता देगें।। कसम है उन शहीदों की लुटा दी जान सरहद पे,,, उसी रस्ते चलेंगे और अपना सर कटा देगें।। हमारे गाँव का बच्चा नहीं है कम किसी से भी,,, जहाँ भी प... »

वो औरत

वो औरत

करे हैं काम वो इस धूप में जलती सी इक औरत,,, गमों को झेल लेती है सभी, गहरी सी इक औरत।।। बडों का मान रखती है झुकी रहती है कदमो में,,, कि रिश्तों के दरख्तों पे लगी टहनी सी इक औरत।। थकी जाती है सारे दिन घरों के काम में लेकिन,,, सजन के वास्ते पल में सजी सवंरी सी इक औरत।। सभी इल्जाम दुनिया ने इसी पर थोप रक्खे हैं,,, खड़ी रहती है दरवाजे पे वो सहमी सी इक औरत।। चटकती धूप में सबके लिए रोटी बनाती हैं,,, जला ... »

ग़ज़ल

ये मदहोश शाम और तन्हाई का आलम अपनों के बारे में न सोचते तो क्या सोचते   करीब-ए-मर्क़ है फिर भी अकेले इसलिये खबरी के बारे में न सोचते तो क्या सोचते   हुआ कभी जो गुमाँ दर्द ने सँवारा है,तो उस फ़रिश्ते को न सोचते तो क्या सोचते   ठोकर खाया था राह-ए-जिंदगी में तो दिल-ए-पत्थर न सोचते तो क्या सोचते #VIP~ ‘विपुल कुमार मिश्र’ »

कुछ पल मेरे साथ बिताओ तो कभी…

विधा-ग़ज़ल काफिया-ओ रदीफ़-तो कभी ************************* चाहती हो मुझे अगर बताओ तो कभी देख कर मुझको मुस्कुराओ तो कभी यूँ ना तड़पाओ तुम इतना दिल को मेरे हाल-ए-दिल अपना सुनाओ तो कभी दोस्त तो है बहुत पर तुझ से ना कोई पास बैठकर तुम बतियाओ तो कभी गम तो बहुत है जिंदिगी में मेरे दोस्त अपनी प्यारी बातो से हँसाओ तो कभी अगर रूठ जाऊं किसी बात पर तेरे तो प्यार जताकर मनाओ तो कभी क्या रखा है इस छनभंगुर जीवन में क... »

बहुत परेशान करती है तन्हा रातें हमकों।

बहुत परेशान करती है तन्हा रातें हमकों। मुसल्सल याद आती है मुलाकातें हमको।। , ऐसे क्यूँ ख़फ़ा हो गए बिना सबब के तुम। क़ोई वजह थी जहन में तो बताते हमकों।। , ख़ुद मुज़रिम होके हमें गुनाहगार कह दिया। अपनी बेगुनाही के सबूत तो दिखाते हमको।। , अश्कों की वज़ह बनते है ख़त मेरे अक्सर। कहतें हो तो फ़िर क्यूँ नहीं जलातें हमकों।। , कहना आसान है ओ वादे भी तमाम होते है। पर क़ोई रिश्ता कहा था तो निभाते हमकों।। , जिसे भूलन... »

“जिंदगी भर ये क्या इन्तेज़ाम किया हमनें”

जिंदगी भर ये क्या इन्तेज़ाम किया हमनें। इक उम्र तो बस यूँ ही तमाम किया हमनें।। , पता नहीं किस ख़्वाहिश में दर ब दर हुए। न सुकून ही मिला न आराम किया हमनें।। , लिखें कई अधूरे अफ़साने क्यूँ मैंने खुद से। पढ़ के सोचतें है ये कोई काम किया हमनें।। , मिलने आती है मंजिलें ख़ुद हमसे अक्सर। उन्हें पता है रास्ते को मकाम किया हमने।। , ये क्या फिर वही साहिल फिर वही संमदर। चलों चले रोज़ की तरह शाम किया हमनें।। @@@@RK... »

“खुद पे कुछ इस तरह से वार किया मैंने”

खुद पे कुछ इस तरह से वार किया मैंने। तेरा न आना तय था इंतज़ार किया मैंने।। , जब थी फूलों सी फ़ितरत तो तोड़ा सबने। अब तोहमतें है खुद को ख़ार किया मैंने।। , मौसम मेरे मुताबिक़ कहाँ होने वाला था। नाहक ही हवाओं पे इख़्तियार किया मैंने।। , मुश्किले आती हैं दरिया की राह में अक्सर। जब मुझकों बहना था सब पार किया मैंने।। , वहम था की हम नहीं कहतें हाल ए दिल। जबकि लिख के सब अख़बार किया मैंने।। , जिसनें किया था बारह... »

जो लिखा ही नहीं वो ख़्यालो में है।

जो लिखा ही नहीं वो ख़्यालो में है। जिंदगी का मज़ा अब सवालों में है।। , जो जाता है उसको चले जानें दो। देख लेंगे हम ग़म के जो प्यालों में है।। , तस्वीरों को तेरी मैं अब रखता नहीं। बस तेरा चेहरा अंधेरे उजालों में है।। , आँखों में मेरी है मंजिल ही मंजिल। फिर दर्द थोड़े न पैरो के छालों में है।। , मौसमो की तरह था जो बदलता रहा। चर्चा उसी की वफ़ा के मिसालों में है।। @@@@RK@@@@ »

“ख्वाब है जिंदगी,जिंदगी ख्वाब है”

ख़्वाब है जिंदगी,जिंदगी ख्वाब है। चेहरे देखा है उसका अलग आब है।। , जिसको कहतें रहे उम्र भर हम दवा। उसको सारा जहाँ कहता शराब है।। , खुद ही बदलें नहीं बस ये कहतें रहें। वक़्त है ये बुरा जमाना भी खराब है।। , हो ख़्वाहिश वो मिलें फिर न पूँछिये। ग़र न मिलें फिर जिंदगी अज़ाब है।। , हमनें जैसा किया हमकों वैसा मिला। क़ोई देखता है हमकों सब हिसाब है।। , हमकों ऐसे भुला दोंगे मालूम न था। जैसे इंसान नही साहिल किताब ... »

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