Ghazal

तुम रोक तो सकते थे….

हम तो चल दिये थे अपना कारवा लिए, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपने आंसू लिए, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपने गम को लेकर, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपनी तन्हाई लेकर, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे मौत की तरफ, मगर तुम रोक तो सकते थे……!! -देव कुमार »

शैलेन्द्र जीवन से एक दिन शिला खण्ड जब टकराया

शैलेन्द्र जीवन से एक दिन शिला खण्ड जब टकराया, पिता की छाया हटी तो जैसे संकट मुझपर गहराया, संस्कारों का दम्ब था मुझमें सब धीरे-धीरे ठहराया, मेरे कन्धों पर परिवार का जिम्मा जैसे बढ़ आया, बचपन से ही कवि ह्रदय ने मेरे दिल को धड़काया, बस इसी विधा में लगकर मैंने अपने मन को बहलाया, बहुत रहा पल-पल उलझा इन सम्बंधों की उलझन में, फिर किसी तरह से शैलेन्द्र जीवन को अपने मैंने सुलझाया।। राही (अंजाना) »

Ghazal

उत्कर्ष मेल में पहली बार मेरी ग़ज़ल बहुत बहुत शुक्रिया संपादक महोदय जी का । आपका सहयोग यूँ ही बना रहे । »

कब तक मै यूँ ख़ामोश रहूँगा

कब तक मै यूँ ख़ामोश रहूँगा, अब मुझे तू शब्दों में बयां हो जाने दे, कब तक मै राहों में यूँ भटकता रहूँगा, अब मुझे तू अपनी मन्ज़िल हो जाने दे, कब तक मैं यूँ तेरे ख़्वाबों में रहूंगा, अब तू मुझे अपनी हकीकत हो जाने दे, कब तक में यूँ तनहा रहूंगा, अब तू मुझे अपनी महफ़िल हो जाने दे, कब तक मैं यूँ टूटता पत्थर रहूंगा, अब तू मुझे अपनी रूह हो जाने दे॥ Raaही »

कभी ठीक से अपने ही बिछाने पर सो भी तो नही सकते

कभी ठीक से अपने ही बिछाने पर सो भी तो नही सकते, ए ज़िन्दगी महसूस तो कर सकते है पर छू भी तो नही सकते काश अब ये भी समज ले कि कोशिश नही की थी हमने, कुछ भी हो जाये लेकिन मुश्किलो से डर भी तो नही सकते आदते डाल दी है हमने यू  सबको गले लगाकर मुस्कुराने की, पता है कि हम उनके है लेकिन वो हमारे हो भी तो नही सकते चलो एक बार फिर वादा करो मिलने का,फिर से बिछड़ने का, साथ चलने का वादा करेंगे पर साथ चल भी तो नही सक... »

परिन्दा कैद से छूटा नही है

परिन्दा कैद से छूटा नही है छुडाने कोई भी आता नही है बहुत खामोश है दरिया के जैसे बहुत बेचैन है कहता नही है दिवाना बन गया है प्यार में वो वो लड़ता है मगर वैसा नही है बनाया है उसे पागल जिन्होनें वही अब कह रहे अच्छा नही है सभी लड़ रहा है ठीक है पर कोई कहदे कि वो ऐसा नही है नसीहत वक्त ने क्या खूब दी है करो वो काम जो दिखता नही है »

गुस्ताखियाँ

यूं तो अरमानों के इरादे भी परेशान हैं, पानी की बूँदें भी आँखों की बारिश से हैरान हैं| पर जनाब हमारी गुस्ताखियों की भी हद नहीं होती, ऐसी केफ़ियत में अपनी ही परछाई में सुकून ढूँढ लिया करते हैं| »

नींद

आजकल नींद सोती है मेरे बिस्तर पर, और मैं तो ख्यालों की दुनिया मैं टहलने निकल जाती हूँ| »

जीतना

मुझको मुझसे जीत कर, खुशियाँ मना रहे थे वो| शायद हारकर जीतने और जीत कर हारने के , उस एहसास से वाकिफ़ न थे वो| »

ज़मीन तुम हो

मेरी हर इक ग़ज़ल की अब तक ज़मीन तुम हो ….. मेरा अलिफ़ बे पे से चे और शीन तुम हो …. जज़्बात से बना मैं इक प्यार का नगर हूँ रहते हो इस में तुम ही इस के मकीन तुम हो ….. इन क्रीम पाउडर का एहसान क्यूँ हो लेते मैं जानता हूँ तुमको कितने हसीन तुम हो …. तुमको कोई तो समझे संसार कोई साँसे लेकिन किसी की ख़ातिर कोई मशीन तुम हो …. टूटोगे तुम कभी तो बिखरूंगा मैं ज़मीं पर कुछ और हो न हो पर... »

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