Ghazal

Kya??

mauz e zindgi humari unhei achi nhi lagti Kya… Jo takleefo k farman bejwa deti Hai wo.. cherei par hasi humarei haseen nhi lagti Kya.. Jo sikan ki lakire la deti Hai wo.. raat ko aankh band krnei ki rshm thi Jo wo, ab nhi hoti kya .. jo nindo sei b ab jaga deti Hai wo… mar mar k ji raha hun itna hi kaafi nhi Kya… Jo ab meri dhadkano ko b thaam deti Hai wo.. »

Kya??

mauz e zindgi humari unhei achi nhi lagti Kya… Jo takleefo k farman bejwa deti Hai wo.. cherei par hasi humarei haseen nhi lagti Kya.. Jo sikan ki lakire la deti Hai wo.. raat ko aankh band krnei ki rshm thi Jo wo, ab nhi hoti kya .. jo nindo sei b ab jaga deti Hai wo… mar mar k ji raha hun itna hi kaafi nhi Kya… Jo ab meri dhadkano ko b thaam deti Hai wo.. »

तनहा

इश्क़ में हैं गुज़रे हम तेरे शहर से तनहा, महब्बत के उजड़े हुए घर से तनहा! हम वो हैं जो जीये जिंदगी भर से तनहा, और महशर में भी जायेंगे दहर से तनहा! तख़्लीक़े-शेर क्या बताऊ कितना गराँ हैं, होना पडे हर महफ़िल-ओ-दर से तनहा!! तुफानो-बर्क़ो-खारो-मौज़ो से निकलकर, हम निकले गुलशनो-दश्तो-बहर से तनहा! हम हैं वही जिसे कहता हैं ज़माना शायर, दुनिया में है मक़बूल हम नामाबर से तनहा’! तारिक़ अज़ीम ‘तनहा’ »

माँ बाप के नाम

पैदा कलम से कोई कहानी की जाए, फिर जज़्बातों की तर्जुमानी की जाए! खिलावे हैं खुद भूखे रहकर बच्चों को माँ-बाप के नाम ये जिंदगानी की जाए! ग़म से तो हाल ही में ही बरी हुए हम, मुब्तिला होके बर्बाद जवानी की जाए! सबको आदत हैं बे-वजह हंगामे की, कभी हक़ की भी हक़बयानी की जाए। ‘तनहा’आईना के सामने लिखे ग़ज़ल, ऐसे उसकी खुद की पासबानी की जाए! तारिक़ अज़ीम ‘तनहा’ »

वक्त का वक्त क्या है पता कीजिए

गजल वक्त का वक्त क्या है पता कीजिए | बाखुदा हूं ‘ खुदा बाखुदा कीजिए | दर्दे – दिल आज मेरे मुखालिब रहे | सुखनवर से उन्हें ‘ आशना कीजिए | चांद तक की अदा कुछ सँवर जायेगी | अश्क आंखों से गर आबशा कीजिए | कल्बे – रहबर इनायत बनी गर रहे | चंद – लम्हों में फिर राब्ता कीजिए | मशवरा ये हुकूमत तुम्हीं से लेगी | नौजवानों खड़ा ‘ काफिला कीजिए | जब वरक लफ्ज तेरे आगोश मे हैं | दर... »

ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है

ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है —————————————- कोई एहसास दिल को छुआ है मुमकिन है,आपका आना हुआ है ख़्वाबों की धुन्ध छँटने लगी इक फ़साने का, हक़ीक़त होना हुआ है सिसक रही तन्हाई भी हँस पड़ी नज़र को नज़र का नज़राना हुआ है तसल्ली ने दिया-दिल को यकीं- इंतज़ार में पलों का सताना हुआ है इज़हार को मचलने लगी क़शिश सूना जीवन सुहाना हुआ है ले... »

बिछडा जो फिर तुमसे

बिछड़ा जो फिर तुमसे तनहा ही रह गया, ग़म-ए-हिज़्र मे अकेले रोता ही रह गया। मुसलसल तसव्वुर में बहे आँसू भी खून के शब् में तुझे याद करता, करता ही रह गया! मैंने शाम ही से बुझा दिए हैं सब चराग, शाम से दिल जला तो जलता ही रह गया। था गांव में जब तलक प्यास ना थी मुझे शहर जो आ गया हूँ तो प्यासा ही रह गया कुछ ना रहा याद मुझे बस आका का घर रहा, मेरी आँखों में बस मंज़रे-मदीना ही रह गया सच का ये सिला हैं के फांसी मि... »

जिंदगी और मौत

सोज़िशे-दयार से निकल जाना चाहता हूँ, हयात से अदल में बदल जाना चाहता हूँ! तन्हाई ए उफ़ुक़ पे मिजगां को साथ लेके, मेहरो-माह के साथ चल जाना चाहता हूँ! आतिशे-ए-गुज़रगाह-ए-चमन से हटकर, खुनकी-ए-बहार में बदल जाना चाहता हूँ मैं हूँ खुर्शीद-ए-पीरी जवानी के सफ़र में, बहुत थक गया हूँ ढल जाना चाहता हूँ! मैं हूँ ‘तनहा’ शिकस्ता तन-ओ-जहन से, आशियाँ-ए-बाम पर टहल जाना चाहता हूँ तारिक़ अज़ीम ‘तनहा’ »

मयस्सर कहाँ है।

मयस्सर कहाँ हैं सूरते-हमवार देखना, तमन्ना हैं दिल की बस एक बार देखना! किसी भी सूरत वो बख्शा ना जायेगा, गर्दन पे चलेगी हैवान के तलवार देखना! सज़ा ए मौत को जिनकी मुत्ताहिद हुए हैं हम आ जायेगी उनको बचाने सरकार देखना करो हो फ़क़त तुम गुलो की तारीफ बस, कभी तो गुलशन के भी तुम खार देखना। केमनी टी स्टाल पर यही करते है हम रोज़, चाय पीते रहना औ र तेरा इंतज़ार देखना। अपनी खुद्दारी ‘तनहा’ तू छोड़ेगा तो ... »

विष मय है आज देख परिवेश।

✍🌹(गीताज ) 🌹✍ ——-$——- ✍ विष मय है आज देख परिवेश। आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। कण कण मे गुस्सा आलम मे नव क्रोध धरती है कुम्हलाई पल बना है अबोध क्षण बना है विद्रोही खाके ठेस । आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। नजारो मे अहम बचनो मे फरेब चापलूसी मे बैठा ठाठ अकड ऐठ ऐब घृणित मंजर काढ़े बैठा है भेष । आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। मानवता है पीड़ित इंसानियत है बुझी मानव देख है वेबश ... »

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