Ghazal

ज़नाब आहिस्ता आहिस्ता !

सच होते जा रहे हैं मेरे ख्वाब आहिस्ता आहिस्ता, वो दे रही मेरी बातों के जवाब आहिस्ता आहिस्ता, सालों से बेकरार किया है  मेरे दिल को जो उन्होंने, लूँगा मैं उनसे अपना यह हिसाब आहिस्ता आहिस्ता, धीमी आँच पर पका है मेरे जज्बातों का सिलसिला, चढ़ने लगा मुझ पर उनका शबाब आहिस्ता आहिस्ता, ढल गई है अब मेरे इंतजार की स्याह रात, उभर रहा है अक्स पर आफ़ताब आहिस्ता आहिस्ता, वो सुर्ख़ चेहरा जिस पर क़ुर्बान दिलोजान, हो ... »

zindgi

ghujari hai,zindgi aise bhi.. khud ko khud se dhundhne me. lapta sahi kaun apna waise bhi. dhundhta kha hai,koe dhundhne me.. jane do bhikre pdhe hai,saman ghar ke waise bhi. koe aur nhi rehta yha mere sath rehne me.. ha, ek umar ki dehlij hai aise bhi.. aaine me nhi dhundhta,khud ko jhurriyo me.. fark kha hai tanhae budhape me waise bhi. darta hai kausar o khud se darne me »

fitur

fitur

ye ishq hi to hai, kha kisi ki. bala wajah fir kuan intejar krna.. khush guman hoti hai, hasinawon ki. ye wo mushe dekhta hai, khayal krna. hamari fitrat nhi,fitur hai kisi ki. ha wo dil hai,tu bta ab dil ka kya krna. kabhi sano pe gira kr,adawon se un ki. inki adat hai,masumo ko giraftar krna. ha hai fitur dil ki par,khawab lati hai kisi ki. be rang zindgi me kisi ka intejar krna…… ma... »

tawakku

Umar hai choti,khawhishe jada hai. zindgi ye bta,ab tera kya irada hai.. siyah hai kam,panne jada hai. khawhishe kuch aur, likhne ka irada hai.. zindgi ye bta ,ab tera kya irada hai….. rasten hai lambi muskile bhi jada hai. andhiyon ka bhi aane, ka irada hai.. zindgi ye bta ,ab tera kya irada hai…. tawakku kya kre,,ye bas yada hai. dekhta nhi fareb khane ka,kya irada hai.. zindgi ye bt... »

Tuta Ek Rishta

Tuta Ek Rishta

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ग़ज़ल

इक समंदर यूं शीशे में ढलता गया । ज़िस्म ज़िंदा दफ़न रोज़ करता गया ॥ ख़्वाब पलकों पे ठहरा है सहमा हुआ । ‘हुस्न’ दिन-ब-दिन ख़ुद ही सँवरता गया ॥ ‘इश्क़’ है आरज़ू या कि; सौदा कोई । दिल तड़पता रहा -— दिल मचलता गया ॥ क्या हो शिक़वा कि; ‘अनुपम’ यही ज़िन्दगी । ‘ज़िंदा’ रहने की ख़ातिर ‘मैं’ मरता गया ॥ #anupamtripathi #anupamtripathiG ———- गोयाकि; ग़ज़ल है ! ———- »

गीत होठो पे समाने आ गये है

गीत होठो पे समाने आ गये है प्रीत भावो के सजाने आ गये है ? चाह ले के आस छाके गा रही है साज ओढे ताल लुभाने आ गये है ? रीत गाने के सदाये दे रहे है भाव ले के तान भाने आ गये है ? चाव गाने का हमारा है नही पर भाव ले के चाव छाने आ गये है ? आज मेरा दौर फीका भी नही है बात मीठी सी सुझाने आ गये है ?श्याम दास महंत ? »

तुम रोक तो सकते थे….

हम तो चल दिये थे अपना कारवा लिए, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपने आंसू लिए, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपने गम को लेकर, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपनी तन्हाई लेकर, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे मौत की तरफ, मगर तुम रोक तो सकते थे……!! -देव कुमार »

शैलेन्द्र जीवन से एक दिन शिला खण्ड जब टकराया

शैलेन्द्र जीवन से एक दिन शिला खण्ड जब टकराया, पिता की छाया हटी तो जैसे संकट मुझपर गहराया, संस्कारों का दम्ब था मुझमें सब धीरे-धीरे ठहराया, मेरे कन्धों पर परिवार का जिम्मा जैसे बढ़ आया, बचपन से ही कवि ह्रदय ने मेरे दिल को धड़काया, बस इसी विधा में लगकर मैंने अपने मन को बहलाया, बहुत रहा पल-पल उलझा इन सम्बंधों की उलझन में, फिर किसी तरह से शैलेन्द्र जीवन को अपने मैंने सुलझाया।। राही (अंजाना) »

Ghazal

उत्कर्ष मेल में पहली बार मेरी ग़ज़ल बहुत बहुत शुक्रिया संपादक महोदय जी का । आपका सहयोग यूँ ही बना रहे । »

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