Ghazal

जमाने बीत गए जिनको भुलाये हुए आजफिर हैं क्यो याद वही आये हुए कितने बेरुखी से तोड़े थे वो दिल को दिल के टूकड़ो को हैं हम सम्भाले हुए सोचते थे न आएगी क़यामत कभी ये क्या हुआ वो हैं दर पे आये हुए जिसे छूने की चाहत में उम्र गुज़ार दी ज़नाज़े को मेरे हैं वही गले से लगाये हुए जिन्दा था तो तन्हाई ने मार डाला,मौत पे अपने तो ठीक दुश्मन भी रोते हैं आये हुए “विपुल कुमार मिश्र” »

उसी का शहर था उसी की अदालत।

उसी का शहर था उसी की अदालत। वो ही था मुंसिफ उसी की वक़ालत।। , फिर होना था वो ही होता है अक्सर। हमी को सजाएं हमी से ख़िलाफ़त।। , ये कैसा सहर है क्यू उजाला नहीं है। अब अंधेरों से कैसे करेंगें हिफ़ाजत।। , चिरागों का जलना आसान नहीं था। हवाओं ने रखा है उनको सलामत।। , तुमको फिक्र है न हमकों है फुरसत। न है कोई मसला न कोई शिकायत।। , साहिल भँवर में है जिंदा अभी तक। ये उसका करम है उसी की इनायत।। #रमेश »

जिसकों कहतें थे हम हमसफ़र अपना।

जिसकों कहतें थे हम हमसफ़र अपना। वो तो था ही नही कभी रहगुज़र अपना।। , तुमको मुबारक हो भीड़ इस दुनिया की। हम काट लेंगे तन्हा ही ये सफर अपना।। , भूल गए हो यक़ीनन तुम अपने वादे सारे। पर उदास रहता है वो गवाह शज़र अपना।। , न कोई मुन्तज़िर है न है कोई आहट तेरी। फिर भी सजाता है कोई क्यू घर अपना।। , ऐ बादल बरसों ऐसे भीगों डालो सबकुछ। की साहिल जलता बहुत है ये शहर अपना। @@@@RK@@@@ »

राघवेन्द्र त्रिपाठी

राघवेन्द्र त्रिपाठी

हर रास्ता हमसे तंग हुआ, हम फिर रास्ते की तलाश मे निकले , शजरो शजर की चाहत मे रास्ते महज इत्तेफाक निकले । ठहरे जहाँ पल भर को ब आजादी ब आबोताब , हमारी आबादी का जनाजा लेकर लोग सब बर्बाद निकले । वो इन्तजार मे था के धुन्ध छटे कोई अपना दिखे , रोशनी हुई तो चेहरे महफूज नकाब निकले । वो अपने ईमान पे अकड़ता रहा ताउम्र, कत्ले जमीर करके लोग सर उठा बेबाक निकले । मुद्दत गुजरी इक हमराह की चाहत मे , वीराने सब अस्बा... »

Dilo jajbaat per nazar rakhiye

दिलो ज्जबात पर नजर रखिये गुमशुदा कुछ ना हो ये खबर रखिये दिल ना टूटे ज्जबात भी नहीं चटके दिल की दहलीज पर यूँ नजर रखिये “ »

ग़ज़ल-ये तुम क्यों भूल गए

ग़ज़ल-ये तुम क्यों भूल गए मैंने तुम से प्यार किया था…..ये तुम क्यों भूल गए तुमको सब कुछ मान लिया था ये तुम क्यों भूल गए सुबह थी तुम शाम थी तुम मेरे दिल की जान थी तुम सब कुछ तुझपर वार दिया था ये तुम क्यों भूल गए हर जन्म साथ निभाने का एक-दूसरे को अपनाने का साथ मिलकर कसम लिया था ये तुम क्यों भूल गए हर पल तेरा साथ दिया तेरे हर सुख-दुख के लमहों में तेरे हर एक जख्मो को सिया था ये तुम क्यों भूल गए एक... »

जीने की ख्वाहिश न मरने का गम है!

जीने की ख्वाहिश न मरने का गम है! है अधूरी कहानी जख्म ही जख्म है !! . न तुमने कहा कुछ न हमने कहा कुछ! बढी फिर भी दूरी ये वहम ही वहम है‌‌‍!! . कहीं तिरगी है और कहीं तन्हा राते ! कहीं पर है महफिल जश्न ही जश्न है!! . न वक़्त तुमको मिला न हमको मिला! जो दिल मे थी बातें दफ्न की दफ्न है!! . सदिया है गुजरी ना है आहट ही कोइ! ना साहिल को ही कोई ‌रंज ओ गम है!! @@@@ RK@@@@   »

दीवाली

इस दीपक में एक कमी है,,,, हर सैनिक की याद जली है ।।।।।।। जिसने दी आज़ादी हमको,,,,,,,,, उनकी बेहद कमी खली है ।।।।। दुश्मन को मारा सरहद पे,,,,,,,,,, तो दीवाली आज मनी है ।।।।।।। देखो इनको भूल न जाना,,,,,,,,,,, जो अब तेरे बीच नही है ।।।।।।। जिसने खोया अपना बेटा,,,,,,,,,, उन माँओं की आह सुनी है ।।।।। देके खुशियाँ हम लोगो को,,,,,,, गोली खुद के लिये चुनी है ।।।।। अपने भाई के आने की,,,,,,,, बहना को इक आस ... »

जंग

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ज़िन्दगी

इस तरह उलझी रही है जिन्दगी,,,,,, कोन कहता है सही है जिन्दगी।।।।। उलझनो का हाल मै किससे कहु,,, आँख के रस्ते बही है जिन्दगी।।।। अब नही पढना नशीब में इसे,,, गर्द सी मुझपे जमी है जिन्दगी।।। ना सुकूँ है दिल बडा बेचैन है,,, आग के जैसे जली है जिन्दगी।।।। उलझनो में ही सदा उलझा रहा,,,, मकङियो के जाल सी है जिन्दगी।।। ख्वाब है ना आखँ में नींदे कहीं,,,,, खार सी चुभने लगी है जिन्दगी।।। फुरसतो के पल नही मिलते म... »

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