Ghazal

ग़ज़ल

  तेरा — मेरा इश्क पुराना लगता है । दुश्मन हमको फिर भी जमाना लगता है ॥ गुलशन – गुलशन खुशबू तेरी साँसों की । मौसम भी तेरा ही दीवाना लगता है ॥ पर्वत – पर्वत तेरा यौवन बिखरा है । हद से गुजरना कितना सुहाना लगता है ॥ इन्द्र – धनुष का बनना – बिगड़ना तेवर तेरे । मस्त निगाहों का छलका पैमाना लगता है ॥ गुजरी हयात का मैं भी इक अफ़साना हूँ । सब कहते हैं ……. मर्ज़ पुराना लगता है ॥ सांझ R... »

कइस अकेला है वह, मुझे जाने दो…….

कइस अकेला है वह, मुझे जाने दो जो किया है वादा, मुझे निभाने दो वो समां भी कितना रंगीन होगा जब मिल बैठेंगे दीवाने दो चलेंगी रात भर इस दिल की बातें और भरेंगे मय के पैमाने दो बनना चाहता है वो गवाह इस मंज़र का खैर,रोको मत उसको, अंदर आने दो अभी तो हाथ में लिया है जाम-ऐ-खुशनसीबी कुछ देर तेहरो, ज़रा इसको हलक में उतर जाने दो मुमकिन नहीं है समझना, बातें दिलो की रुको तुम, ज़रा उसको समझाने दो रोशन हो जाएगा तुम्ह... »

सको तो चलो………..

हमारे साथ कदम से कदम मिला चल सको तो चलो के इस इश्क़ में कुछ देर ठहर सको तो चलो बहुत ही हौसला चाहिए, इस दिल की निगेबानी करने को अगर तुम इसकी पहरेदारी कर सको तो चलो सफर लंबा है ज़रा, मंज़िल-ऐ-वाम तक का बे-सरो-सामान निकल सको तो चलो यादों से लवरेज़ है दिल मेरा, खता मेरी नहीं तुम इसकी हर बात समझ सको तो चलो रात की ख़ामोशी और अजीब सा सन्नाटा भी तुम इन सब से निकल सको तो चलो सफर-ऐ-आम नहीं ये, औरो की तरह खुद को ... »

वक़्त तो लगता है…….

किसी को भूल जाने मे वक़्त तो लगता है के आँखों के आंसू मिटाने में वक़्त तो लगता है जब बैठे हो चाहत-ऐ-किस्ती मे, तो सब्र करो इसको साहिल तक पहुचाने में वक़्त तो लगता है क्यों रोते हो अब अपने ही किये हुए उस काम पर गमो के दिन बिताने में वक़्त तो लगता है धीरे-धीरे भरेंगे, के ये गम और आंसू से बने है जख्म को भर जाने में वक़्त तो लगता है ए दिल ज़रा ठहर जा, ज़रा तस्सली रख किसी शहर जाने में वक़्त तो लगता है चलो मान ... »

वादा न सही मगर, एक इंसा को बचाने के लिए आ……..

वादा न सही मगर, एक इंसा को बचाने के लिए आ के एक बार मिल कर मुझ से, फिर बिछड़ जाने के लिए आ मुमकिन है अब ये होश भी साथ ने दे मेरा मुझ बेहोश पर एक चादर चढ़ाने के लिए आ कुछ तो मेरे पाक-ऐ-मोहोब्बत की जूनून को समझ के कभी तो तू भी मुझको मानाने के लिए आ जनता हू अब वो रिस्ता-ऐ-रस्म-ऐ-दिल नहीं है खैर एक नया रिश्ता ही बनाने के लिए आ किस किस को बताऊ मैँ, इस दिल के किस्से को तू मेरे लिए न सही, इस ज़माने के लिए आ... »

बरसने के बाद…………

हो गयी रुकसत घटा बरसने के बाद खिला मौसम नया बरसने के बाद मेरे गमो से रूबरू हो कर ये हवा भी जोर से बहने लगी बरसने के बाद होता आमना-सामना कुछ पल के लिए ही दिल-ऐ-खुवाईश बनी ये बरसने के बाद मेरी तन्हाईयों को देखने के बाद मेरी उदासी कुछ बोली बरसने के बाद उस चाँद को अकेला देख आसमा में एक तारा रो दिया बहुत बरसने के बाद चला जा रहा था मैँ अकेला ही उन रास्तो पर सरे पत्थड़ नर्म पड़ गए बरसने के बाद गीले कपड़ों प... »

लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है

लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है

जिंदगी की सुंदर प्लास्टिक, कचरें में बदल जाती है अगर यूज न हो ढंग से, ऐसे ही जल जाती है कभी कभी जिंदगी से बढी मौत हो जाती है जिंदगी कभी कभी पानी में भी जल जाती है| कुछ को तो कचरे फैलाने से फ़ुरसत नहीं कुछ की तो जिंदगी कचरें में गुजर जाती है| फैलती हुई दुनिया में, जिंदगी कहीं सिमटी सी है लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है| »

कुछ लोग………..

बहुत शराफत से पेश आये कुछ लोग हमारे जनाजे पर आये कुछ लोग आखरी रस्म की कदर करी उन सब ने हमें कांधा देने आये कुछ लोग रस्म-ऐ-बफा सब निभा नहीं सकते है काबा पर हमने बुलाये कुछ लोग सोचा था सब अपने है इस दुनिया मे मगर, रस्म-ऐ-अपनापन निभा पाए कुछ लोग यूँ तो मायूस दिख रहे थे वह पर सभी मेरी कब्र पर मगर आंसू बहा पाए कुछ लोग बहुत शराफत से पेश आये कुछ लोग हमारे जनाजे पर आये कुछ लोग…………&... »

अधूरी सी जिंदगी का अधूरा फ़साना हूँ मैं।

अधूरी सी जिंदगी का अधूरा फ़साना हूँ मैं। नई सी दुनिया में शख़्स कोई पुराना हूँ मैं।। , चल रही है सरहदों पे जंग न जाने कब से। पता नहीं की किस गोली का निशाना हूँ मैं।। , मैंने भी देखी थी कई सदियां जिन्दा रहते। आज क़ब्र में सोया इक शहर वीराना हूँ मैं।। , हमकों याद करके कभी गमज़दा न होना। इस मिटटी में दफ़्न हुआ तो खजाना हूँ मैं।। , मुझको मेरी क़ीमत ख़ुद भी मालूम नहीं है। वो इस्तेमाल करके छोड़ा गया पैमाना हूँ ... »

हवा के नर्म परों पर सलाम लिखती हूँ

हवा के नर्म परों पर सलाम लिखती हूँ गुलों की स्याही से जब जब पयाम लिखती हूँ बड़ा सहेज के रखती हूँ तेरे खत सारे जो सुब्हो शाम मैं तेरे ही नाम लिखती हूँ जिसे मैं दुनिया के डर से न कह सकी अब तक वही फसाने ख़तों में तमाम लिखती हूँ ज़ुनूने इश्क में तेरे मैं खो चुकी इतनी जो बेखुदी में सवेरे को शाम लिखती हूँ नहीं की मयकशी ता उम्र ,रिंद हूँ फिर भी इसलिए तेरी आँखों को जाम लिखती हूँ मिरे करीब से जिस वक्त तुम ग... »

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