Ghazal

“कब तक करोंगे यूँ बेईमानी खुद से”

कब तक करोंगे यूँ बेईमानी खुद से। मुझे छोड़कर करोगे,नादानी खुद से।। , हमारी दास्तानों को फरेब कहने वाले। लिख नहीं पाओगें ये,कहानी खुद से। , तन्हाई में मिलें है लोग जो समन्दर किनारे। उनका अश्क़ है,या है यहाँ पानी खुद से।। , हमने बसर की जिंदगी ग़मो के दरम्यान। हमें दुश्मनो से नहीं, है परेशानी खुद से।। , किताबो में हम तुमको नहीं मिलने वाले। याद करना हो तो कर लो ज़ुबानी खुद से।। , बचपन ऐसे गुजरा की जैसे लम... »

न”वो वक़्त रहा न याद है क़िस्सा कोई”

न वो वक़्त रहा न याद है क़िस्सा कोई। मेरे हिस्से में ही नहीं है मेरा हिस्सा कोई।। , ये किया है ख़िज़ाँओ ने जहाँ घर अपना। गुजरे जमानों में था यही गुलिस्ताँ कोई।। , उनसे कौन पूंछे की क्या मिला खफा होके। अपनों को छोड़ता है क्या दानिस्ता कोई।। , छोड़ दिया मेहफिलो में मैंने आना जाना। कही मिल न जाएँ शख़्स मुझे तुझसा कोई।। , ख्वाहिशों की ख़ातिर हम परेशां रहे ताउम्र। पर जाते वक़्त साथ कहाँ गया खित्ता कोई।। @@@@RK@... »

सफर फासलों का

सफ़र फासलों का है ये बड़ा दर्द भरा, गर हो मुम्किन,तो कोई और अज़ाब दो ना बड़ा नहीं देखूँगा तेरी सूरत मैं कभी, इन आँखों को कोई और पता दो ना ज़रा बातों-बातों में बनी खामोशी की दीवार है ये लफ़्ज की एक चोट से गिरा दो ना ज़रा अश्क के दरिया में हूँ डूबा, गम के शरर में दहकता और कब तक है तड़पना, ऐ मुंसिफ़ बता दो ना ज़रा रोज मरता है विनायक, तुझपे मरता हुआ कर मुकम्मल मुझको,मेरी चिता सजा दो ना ज़रा….. www.facebook... »

हम तेरे वादों की जब गहराई में उतरे।

हम तेरे वादों की जब गहराई में उतरे। सदमा सा लगा जब सच्चाई में उतरे।। , तुमको ढूंढते रहें थे महफिल महफिल। पर सुकून मिला जब तन्हाई में उतरे।। , जिसनें चाहा जैसा वैसा बनाया खुद को। कुछ ने बुरा किया कुछ अच्छाई में उतरे।। , हमे जो तजुर्बा हुआ वही लिखतें रहें है। जो फुरसत दे जिंदगी तो रानाई में उतरे।। , अज़ीब है वो ही कहतें है बेवफा हमकों। जिसने वफ़ा की ही नहीं,बेवफ़ाई में उतरे। , ज़िन्दगी तेरी तपिश में हम ... »

इक अरसे से कोई ख्वाब नहीं देखा हमने।

इक अरसे से कोई ख्वाब नहीं देखा हमने। जब से तुम गए आफ़ताब नहीं देखा हमने।। , लफ्ज़ दर लफ्ज़ हम क्या क्या नहीं हुए थे। पर खुद का लिखा किताब नहीं देखा हमने।। , हमारी मौत के बाद सजती रहती है महफिले। मगर जीते जी कभी ख़िताब नहीं देखा हमनें।। , अब जिंदगी से नहीं है शिकवे शिकायत कोई। बस अधूरे सवाल थे जवाब नहीं देखा हमनें।। , जिसकों जैसा देखना चाहा वैसा देखा ताउम्र। साहिल कभी खुद को खराब नहीं देखा हमनें।। @@@@... »

mai sab kuch hu tera lekin, mai tera kuch nahi lagta bahut kuch pa liya hai phir bhee khali khali sa lagta tujhe pane  ki koshish kar raha barso se hoo lekin tu mujhko kho nahi sakti , mai tujhko paa nahi sakta -altaf aarzoo »

कुछ न कुछ दिल में चलता रहता है।

कुछ न कुछ दिल में चलता रहता है। इक ख़्वाब अनदेखा पलता रहता है।। , क़िस्मत कहें की मुक़द्दर कहें उसको। जो नाम सुबह शाम खलता रहता है।। , वक़्त गुजरा है कुछ इस तरह से जैसे। मोम सी जिंदगी से मोम गलता रहता है।। , अब धुंआ धुंआ ही बचा हूँ आकर देखों। वैसे मिटटी में राख़ कहाँ जलता रहता है।। , हमने जो कह दिया उस पर ही कायम है। हम मौसम नहीं की जो बदलता रहता है।। , अपनों अश्क़ो पर गुमान करते हो ठीक है। पर दरिया ए अ... »

डर लगता है

देखो तो मजमा आजकल उनका इधर लगता है मतलब की है यारी, सर-बसर लगता है कहते थे कभी मुल्क की आवाम के हैं सेवक देखो तो आज बनारस ही उनका घर लगता है कब्रिस्तान और श्मशान की हो रही बराबरी बनाएंगे पूरे हिन्दुस्तां को, मुजफ्फरनगर लगता है महंगा हुआ है खाना, महंगी है रसोई शिद्दतों से आये अच्छे दिन का असर लगता है आतंक और करप्शन तो हैं ही दर्द-अंगेज़ नए पनपते देशभक्तों से भर गया शहर लगता है बंद लब कर, चुप बैठा है... »

जो भी तुम कहते हो वही होगा।

जो भी तुम कहते हो वही होगा। ऐसा सोचते हो तो नही होगा।। , हमसें क्यूँ पूँछते हो पते ठिकाने। मैं आसमाँ नहीं पता ज़मी होगा।। , किसकी राहों में अब पलकें बिछाएं। हम समंदर है मिलेगा जो नदी होगा।। , ग़म जख़्म अश्क़ भरी दास्ताँने छोडो। कौन अपना था जो अजनबी होगा।। , काफ़िलो में तेरे हम नहीं मिलने वाले। हम तन्हा रहेंगे तो गुजर नहीं होगा।। , हमारी फ़ितरत में नहीं है मौसम होना। जो आज तक यहाँ था कल कही होगा।। @@@@RK... »

रात अँधेरा ख़ामोशी तन्हाई,अश्क़ मिला

रात अँधेरा ख़ामोशी तन्हाई,अश्क़ मिला। यादें वक़्त पल तस्वीरें बातें,अश्क़ मिला। , जिंदगी झूठ क्या वादें क्या क़समे इरादें। मौत सच तन्हाई सच आँखें,अश्क़ मिला। , मिलना वादियां झरने ये पहाड़ ओ मौसम वीरानी निशानी नादानी क्या अश्क़ मिला।। , जमी आसमाँ चाँद देखें हजारो तारे सितारें। टूटे हुए ख़्वाब अधूरी सी बात,अश्क़ मिला।। , मासूम सी शक्ले फ़रेबी इरादें तज़ुर्बा हुआ है। ख़ुद को किया है जो तेरे हवाले,अश्क़ मिला।। @@@@... »

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