Ghazal

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ye ishq hi to hai, kha kisi ki. bala wajah fir kuan intejar krna.. khush guman hoti hai, hasinawon ki. ye wo mushe dekhta hai, khayal krna. hamari fitrat nhi,fitur hai kisi ki. ha wo dil hai,tu bta ab dil ka kya krna. kabhi sano pe gira kr,adawon se un ki. inki adat hai,masumo ko giraftar krna. ha hai fitur dil ki par,khawab lati hai kisi ki. be rang zindgi me kisi ka intejar krna…… ma... »

tawakku

Umar hai choti,khawhishe jada hai. zindgi ye bta,ab tera kya irada hai.. siyah hai kam,panne jada hai. khawhishe kuch aur, likhne ka irada hai.. zindgi ye bta ,ab tera kya irada hai….. rasten hai lambi muskile bhi jada hai. andhiyon ka bhi aane, ka irada hai.. zindgi ye bta ,ab tera kya irada hai…. tawakku kya kre,,ye bas yada hai. dekhta nhi fareb khane ka,kya irada hai.. zindgi ye bt... »

Tuta Ek Rishta

Tuta Ek Rishta

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ग़ज़ल

इक समंदर यूं शीशे में ढलता गया । ज़िस्म ज़िंदा दफ़न रोज़ करता गया ॥ ख़्वाब पलकों पे ठहरा है सहमा हुआ । ‘हुस्न’ दिन-ब-दिन ख़ुद ही सँवरता गया ॥ ‘इश्क़’ है आरज़ू या कि; सौदा कोई । दिल तड़पता रहा -— दिल मचलता गया ॥ क्या हो शिक़वा कि; ‘अनुपम’ यही ज़िन्दगी । ‘ज़िंदा’ रहने की ख़ातिर ‘मैं’ मरता गया ॥ #anupamtripathi #anupamtripathiG ———- गोयाकि; ग़ज़ल है ! ———- »

गीत होठो पे समाने आ गये है

गीत होठो पे समाने आ गये है प्रीत भावो के सजाने आ गये है 🖋 चाह ले के आस छाके गा रही है साज ओढे ताल लुभाने आ गये है 🖋 रीत गाने के सदाये दे रहे है भाव ले के तान भाने आ गये है 🖋 चाव गाने का हमारा है नही पर भाव ले के चाव छाने आ गये है 🖋 आज मेरा दौर फीका भी नही है बात मीठी सी सुझाने आ गये है 💲श्याम दास महंत 💲 »

तुम रोक तो सकते थे….

हम तो चल दिये थे अपना कारवा लिए, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपने आंसू लिए, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपने गम को लेकर, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपनी तन्हाई लेकर, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे मौत की तरफ, मगर तुम रोक तो सकते थे……!! -देव कुमार »

शैलेन्द्र जीवन से एक दिन शिला खण्ड जब टकराया

शैलेन्द्र जीवन से एक दिन शिला खण्ड जब टकराया, पिता की छाया हटी तो जैसे संकट मुझपर गहराया, संस्कारों का दम्ब था मुझमें सब धीरे-धीरे ठहराया, मेरे कन्धों पर परिवार का जिम्मा जैसे बढ़ आया, बचपन से ही कवि ह्रदय ने मेरे दिल को धड़काया, बस इसी विधा में लगकर मैंने अपने मन को बहलाया, बहुत रहा पल-पल उलझा इन सम्बंधों की उलझन में, फिर किसी तरह से शैलेन्द्र जीवन को अपने मैंने सुलझाया।। राही (अंजाना) »

Ghazal

उत्कर्ष मेल में पहली बार मेरी ग़ज़ल बहुत बहुत शुक्रिया संपादक महोदय जी का । आपका सहयोग यूँ ही बना रहे । »

कब तक मै यूँ ख़ामोश रहूँगा

कब तक मै यूँ ख़ामोश रहूँगा, अब मुझे तू शब्दों में बयां हो जाने दे, कब तक मै राहों में यूँ भटकता रहूँगा, अब मुझे तू अपनी मन्ज़िल हो जाने दे, कब तक मैं यूँ तेरे ख़्वाबों में रहूंगा, अब तू मुझे अपनी हकीकत हो जाने दे, कब तक में यूँ तनहा रहूंगा, अब तू मुझे अपनी महफ़िल हो जाने दे, कब तक मैं यूँ टूटता पत्थर रहूंगा, अब तू मुझे अपनी रूह हो जाने दे॥ Raaही »

कभी ठीक से अपने ही बिछाने पर सो भी तो नही सकते

कभी ठीक से अपने ही बिछाने पर सो भी तो नही सकते, ए ज़िन्दगी महसूस तो कर सकते है पर छू भी तो नही सकते काश अब ये भी समज ले कि कोशिश नही की थी हमने, कुछ भी हो जाये लेकिन मुश्किलो से डर भी तो नही सकते आदते डाल दी है हमने यू  सबको गले लगाकर मुस्कुराने की, पता है कि हम उनके है लेकिन वो हमारे हो भी तो नही सकते चलो एक बार फिर वादा करो मिलने का,फिर से बिछड़ने का, साथ चलने का वादा करेंगे पर साथ चल भी तो नही सक... »

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