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नमो नमो नमो बुद्धाय

नमो नमो  नमो  बुद्धाय। मन हमारा शुद्ध हो जाए। कठोर वाणी त्याग दें। सत्य सबको बांट दे। कमजोरों को हाथ दें। निर्धन का हम साथ दें। अपंग के गले लग जाएं। नमो नमो नमो बुद्धाय। विचार में प्रकाश हो। करुणा पर विश्वास हो। ज्यादा की नहीं आश हो। ज्ञान हमारे पास हो। दया धर्म हम अपनाएं। नमो नमो नमो बुद्धाय।। मद से हमारा नाता न हो। झूठ हमको आता न हो। पाप से हम सब दूर रहें। कर्मों से हम सब सूर रहें।। थोड़े में ही... »

नमो नमो नमो बुद्धाय

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मजा आ गया होली में

सभी मित्रोजनो को होली की अग्रिम शुभकामनाये। आप सबों को होली पर एक भेट! ****** प्रेम-रस का रंग बरसाने निकली भर के झोली में ! क्युँ मैं सखियों से बिछङी क्या आया रास अकेली में ताँक रहे थे पिया गली में। धर ले गए खींच दहेली में। हाथो को पकङा रंग गालो पर रगङा मूक रही कुछ न बोली मैं । हाथो को जोङा पैरो को पकङा सुनी एक न मेरी हमजोली ने। मनभावन मेल लता-तरु सा आहा! मजा आ गया होली में!? -रमेश जय राधे- कृष्ण&... »

छत्तीसगढ़ी गीत “चल दिए तें कोन देश

छत्तीसगढ़ी गीत “चल दिए तें कोन देश

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रविदास को गुरु बनाकर हम भी मीरा बन जाएं

रविदास को गुरु बनाकर हम भी मीरा बन जाएं

रविदास को गुरु बनाकर हम भी मीरा बन जाएं। द्वेष -कपट सब त्याग कर आज फकीरा बन जाएं। कोयला जैसा मन लेकर भटक रहा है मारा-मारा ज्ञान अगर मिल जाए तो संवर जाएगा कल तुम्हारा। रविदास के संग चलें और हम भी हीरा बन जाएं। रविदास को गुरु बनाकर हम भी मीरा बन जाएं।। क्रोध को तुम छोड़कर करम करो प्यारा-प्यारा। एक दुजे के गले लगो तो जग प्रसन्न होगा सारा। अंधकार को दुर भगा कर हम उजियारा बन जाएं। रविदास को गुरू बना कर... »

होली, रुत पर छा गयी है

होली, रुत पर छा गयी है

होली, रुत पर छा गयी। मस्तों की टोली आ गयी।। लाज़ शरम तुम छोड़ो। आज मुख मत मोड़ो।। दिल को दिल से जोड़ो। झूम कर अब बोलो॥ होली, रुत पर छा गयी है। मस्तों की टोली आ गयी है।। यार को गले लगा लो। रंग गुलाल उड़ा लो।। मनमीत को बुला लो। प्रीत से तुम नहा लो।। फागुन में मस्ती छा गयी है। होली, रुत पर छा गयी है। बैठ के फाग गा लो । आज नंगाड़ा बजा लो।। गोरी को भी बुला लो। गालों पे रंग लगा लो। उसकी बोली भा गयी है। ... »

दाँस्ता : एक दर्द

सामने खड़ी  थी  वो  चंचल  हसीना , दीवाना था जिसका मैं पागल कमीना, सब कह रहे थे तुझे देखती है , मुझे भी लगा वो मुझे देखती है , मैं इस  ओर  था  वो उस ओर थी, बीच में खिंच रही प्यार की डोर थी , समाँ खामोश था वक्त मदहोश था , वो भी मशहूर थी मैं भी मजबूर था , जैसे  लफ्जों को  कोई  जुबाँ से खी़च रहा था , सर्द हवाओं में भी बदन पसीने से भीग रहा था, बस  यूँ  ही कट रहा  वक्त  का  वो दौर  था ,      कुछ दिनों त... »

अजीब इत्तफ़ाक़ है

अजीब इत्तफ़ाक़ है अजीब इत्तफ़ाक़ है तेरे जाने और सावन के आने का अजीब इत्तफ़ाक़ है तेरी चुप और मौसम के गुनगुनाने का अजीब इत्तफ़ाक़ है मेरे माज़ी और मेरे मुस्कराने का अजीब इत्तफ़ाक़ है तेरे मिलने और मेरे ज़ख्म खाने का अजीब इत्तफ़ाक़ है तेरे गेसू और घटाओं के छाने का अजीब इत्तफ़ाक़ है तेरे तीर और कहीं चल जाने का अजीब इत्तफ़ाक़ है मिल के और ग़ुम हो जाने का अजीब इत्तफ़ाक़ है बंद आँखें और ख्वाब टूट जाने का अजीब इत्तफ़ाक़ है &#... »

रुकते नहीं वो काफिले

रुकते नहीं वो काफिले कितने चले कितने रुके ये न हम से पूछिए चल पड़े जो बाँह थामें रुकते नहीं वो काफिले | अक्षरों को जोड़ने में हिस्सा हमारा भी रहा इस अधूरी पटकथा में किस्सा हमारा भी रहा मानिए मत मानिए हम कह रहे आदमी के बीच में घटते रहेंगे फासले | लाख कोशिश कीजिए धर्म ध्वज को तोड़ने की आस्था की अकारण गर्दनें मरोड़ने की क्या कमी है गवाहों की यहाँ होते रहेंगे नामुरादी फैसले | संहिताएँ वांचते थक गई हैं पीढ़... »

दिन आ रहे मधुमास के

दिन आ रहे मधुमास के शीत है भयभीत खुशनुमा वातावरण ले रहा अँगड़ाइयाँ तोड़ हिम के आवरण कह गई कोकिला कान में कुहास के दिन आ रहे मधुमास के | गुनगुनी सी धूप होगी मधुभरी सी सुनहरी मंजीरे बजाने आ रही मधुमती सी मधुकरी मकरंद ले कर झूमते झोंके झुके सुवास के | तितलियों से भर गईं क्यारियाँ फुलवारियाँ कलियाँ सियानी मारती रस गंध की पिचकारियाँ ढपली बजाते मधुप चंचल फागुनी उल्लास के | अब जलेंगीं अवदमन की थरथराती होलि... »

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