Geet

“भीगी रातें”

🌺🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌺 ————————- भीगी रातें ————— सावन को जरा खुल के इस बार बरसने दो । राजी ही नही यारा दिल और तरसने को ।। दो तीन बरस बीते कुछ प्यार भरी बातें, अक्सर ही सताती हैं कटती ही नहीं रातें । मौसम बदला बदले हालात बदलने दो, राजी ही नही यारा दिल और तरसने को ।। पाए तन्हाई में आसार खयालों के, ऐसे भीगी रातें किस तरह बिता लोगे । छें... »

विदाई गीत

*एक विदाई गीत* हरे हरे कांच की चूड़ी पहन के, दुल्हन पी के संग चली है । पलकों में भर कर के आंसू, बेटी पिता से गले मिली है । फूट – फूट के बिलख रही वो, फूट – फूट के बिलख रही वो, बाबुल क्यों ये सजा मिली है, छोड़ चली क्यों घर आंगन कू, बचपन की जहाँ याद बसी है, बाबुल रोय समझाय रह्यो है बेटी ! जग की रीत यही है, राखियो ख्याल तू लाडो मेरी, माँ – बाबुल तेरे सबहि वही है नजर घुमा भइया को देखा भ... »

झूकने न देंगे तिरंगे को हम

झूकने न देंगे तिरंगे को हम

दिनांक-२०-७-२०१६ विधा- गीत संदर्भ- स्वतंत्रता दीवस तर्ज- बहुत प्यार करते है तुझसे सनम… …………………………………………………… झूकने न देंगे तिरंगे को हम-२ हमको हमारी भारत माता की कसम -२ झूकने न देंगे तिरंगे को हम-२ हमे मातृभूमि अपने प्राणों से प्यारी-२ हम है दुलारे ये है माता हमारी -२ सब कुछ... »

अधूरा गीत

अधूरा गीत तुम बिन मेरे साजन बोलो कैसे ये जज़्बात लिखूँ, दिन मेरा कैसा बीता कैसे बीती रात लिखूँ। मन में उलझन भारी था तो ख़त तुमको ये लिख डाला, याद तुम्हारी दर्द लिखूँ या लम्हों की बारात लिखूँ। #काफ़िर »

निर्झर झरता गीत

  यह गीत धरा का धैर्य गर्व है, नील–गगन का यह गीत झरा निर्झर-सा मेरे; प्यासे मन का ….   यह गीत सु—वासित् : चंदन–वन यह गीत सु-भाषित् : जन-गण-मन यह गीत प्रकाशित् : सूर्य–बदन यह गीत गरल का आचमन यह गीत समर्पण् जीवन का यह गीत झरा…………..   यह गीत वसन् नंगे तन का यह गीत रंग अल्हड़पन का यह गीत अलाव जीवन-रण का यह गीत भीष्म के भीषण-प्रण का यह गीत व... »

रहम करना ज़रा मौला

रहम करना ज़रा मौला

रहम करना ज़रा मौला, नमाजी हूँ तेरा मौला। तू ही तो मीत है मेरा, तू ही तो गीत है मेरा॥   किसी को गैर ना समझूं, किसी से बैर ना रख्खूं।। मेरा दिल बस यही चाहे, सितम कोई नहीं ढ़ाये।। नेकी ही रीत है तेरा, तू ही तो मीत है मेरा। करम ये हो मेरा मौला, रहम करना ज़रा मौला।।   भला क्या है बुरा क्या है, तेरा क्या है मेरा क्या है। लड़ाई छोड़ देना है, दिलों को जोड़ लेना है। तू ही तो जीत है मेरा, तू ही तो... »

गीतिका-मुक्तक

…………गीतिका……….. श्रृंगार उत्पति वही होती जब खिली फूल की डाली हो कुछ हास्य विनोद तभी भाता हंसता बगिया का माली हो | कलरव करते विहगों की जब ध्वनि प्रात:कान में आती है बरसाती मधुरसकंण कोयल जब बागों में हरियाली हो कृषकों के कंधो पर हल और होठों पर जब मुस्कान खिले क्लांतमयी ग्लांनिण चित्त को होता सुख जब खुशिहाली हो | कान्हा की बंशी की धून लगती मन को जब मतवाली हो ... »

गीतिका

संदर्भ:- वर्तमान में परिवार की परिभाषा … …………………………………………………. बदल गये रिश्ते नाते बदल गया परिवार बदल गये रीति रिवाज बदल गया घरबार | सिमित हुआ संबंध नही पहले वाली बात गांठ पाल मन में रखते पर करे प्रेम उद्गार || मियां बीबी बच्चे साला साली साढू के साथ छूट गये माता पिता और भाई बहन के... »

गीतिका

“गीतिका” मन को छोटा मत कर मानव तन्मय हो धर्म निभाता चल | सोया जग घोर तिमिर तो क्या तू मन का दीप जलाता चल ||मन को.. क्या होगा क्या होने वाला ये सोच के ना घबराता चल | जो बीत गई ओ बात गई उस कल पर ना पछताता चल ||मन को.. जो भटक गये है नीज पथ से उनको तू पथ बतलाता चल | अंधे लंगडे गूंगे बहरे को अपना संदेश सूनाता चल ||मन को.. हो भाग्य नही अनुकूल भी तो कर से करतब दिखलाता चल | संघर्ष की वेदी पर च... »

कविता

कविता

कविता… हम जाते है स्कूल हाँ हम जाते है स्कूल | अपना भविष्य गढने अनुकूल || हम जाते है स्कूल…… पढ लिख कर होनहार बनेंगे मातु पिता का प्यार बनेंगे | घर आंगन फूलवारी अपनी हम सब इसके फूल …|| हम जाते है स्कूल… गुरू हुए भगवान हमारे हम सब बच्चे उनको प्यारे | हमे ज्ञान की बात बताते बडे प्यार से हमे पढाते कुछ न हमें होता प्रतिकूल || हाँ हम जाते है स्कूल… हम सब आशा ज्योति ज... »

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