Geet

भूल जाना मोहब्बत को मुमकिन नही

भूल जाना मोहब्वत को मुमकिन नही भूल जाने की तुम यूँ ही जिद्द न करो अश्को को तुम छुपा लोगे माना मगर इन नजरों को कैसे संभालोगे तुम ये होठो की लाली झूटी सही इन सांसों को कैसे संभालोगे तुम ये आएंगी मिलने की रुत फिर वही सच मे मिलने कभी भी न आओगे तुम इस दिल की मुझे क्या पता क्या कहूँ बिन मेरे जिंदगी क्या बितालोगे तुम इस दुनियां में फिर मिल गए हम कभी खुद को खुद से ही कैसे छुपा लोगे तुम के इतना आसां नही ये... »

रंग क्या होंगे

रंग क्या होंगे—? ————————- लिखेगी लेखनि कौन सा अक्षर स्याही के रंग क्या होंगे–? लफ़्जें कहेंगी कहानी कौन सी कथाओं में उमंग क्या होंगे—? झलकेगा इनमें कौन सा रूप झूठ बोलेगा,सच होगा चुप उपहासें या खिलखिलाहटें हँसी के रंग क्या होंगे—? फ़सानें-अफ़सानें हज़ार बातें मुद्दों का मसला नज़र नहीं आता किसलिए ये भागमभाग है मची कोई फ़ैसला नज़र नहीं... »

पत्र आता

तन वदन मन खिलखिलाता , जब किसी का पत्र आता । पत्र के उर में बसे हैं , प्रेमियों के भाव गहरे । दूर हों चाहे भले वे , पत्र से नजदीक ठहरे । पत्र ही ऐसा सुसेवक , दूरियाँ सबकी मिटाता । बहुत दिन तक जब किसी के , दर्शनों को मन तरसता । मीत की पाती मिले जब , प्यार अंतर में बरसता । प्यार का पानी पिलाकर , प्यास को पल पल बढा़ता। जब कभी आकुल हुआ मन , लेखनी पर दृष्टि जाती । विरह-गाथा कागजों पर , चित्त के रूपक सजा... »

आ गया अब शीत का मौसम

आ गया अब शीत का मौसम कंपकंपी के गीत का मौसम । झील सरिता सर हैं खामोश अब न लहर में तनिक भी जोश वृक्ष की शाखें नहीं मचलें लग रहा अब है न तनिक होश धूप के संगीत का मौसम गर्मियों के मीत का मौसम उमंगों पर है कड़ा पहरा जो जहां पर है वहीं ठहरा किसलिये है भावना वेवश शीत का यह राज है गहरा शीत से है प्रीत का मौसम धूप से विपरीत का मौसम। अधर तक मन का धुँआ आता दर्द का हर छंद दोहराता चुभन की अनुभूति क्या प्यारी आ... »

आपकी छवि

सर्दियों में धूप मनको जिस तरह प्यारी लगे । आपकी छवि व्यथित मन को परम सुखकारी लगे । मौन रह.अनकही बातें , शेष कहने को रहीं । जिस जगह से भी गुजरते , आप मिल जाते वहीं । मुसकराहट मन चुराती , कल्पना हो आपकी क्या पता कब याद आएँ , याद बनजारी लगे । दर्द भी कैसा दिया है , अब दवा लगने लगा । आगमन की आस में , मन जागरण करने लगा । द्वार पलकों के न इक पल, बंद हो पाते कभी , चिर प्रतीक्षा की घड़ी , अब ,और भी भारी लग... »

Jivan me sabko kya chahiye…………….

Jivan me sabko kya chahiye…………….

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prem samandar hota hai

ऊपर से कुछ दिख न पाए , अंदर अंदर होता है गहराई में नप न पाए , प्रेम समंदर होता है लोगो ने है कितना लूटा प्रेम तो फिर भी पावन है जिसमे आंख से आंसू छलके, प्रेम वो सूंदर होता है प्रेम का देखो साधक बनकर, व्याकुल ब्यथित कबीरा है लोक लाज को त्याग के नाची , प्रेम दीवानी मीरा है बिन देखे ही बिन परखे ही करते लोग समर्पण है दिल में तक जो घाब बनादे ,पेना खंजर होता है सहज सहज सा भलापन है ,सहज है इसमें कठिनाई प... »

अवध

अब ना गाऊंगा

अब ना गाऊंगा गित तेरे यादो की. अब ना चाहुंगा प्रित तेरे सांसो की. कुछ थमा तुम्हारे हमारे बिच यादो का गुलिस्ता. जो हमसफर रुठ चुका हमारे घर से. जो चूक चुका महफिल की रंजोगम से. फिर गित ना गा पाऊंगा. महबूब तुझे गुनगुना ना पाऊंगा. अवधेश कुमार राय “अवध” »

मैं बस्तर हूँ

मैं बस्तर हूँ

दुनियाँ का कोई कानून चलता नहीं। रौशनी का दिया कोई जलता नहीं। कोशिशें अमन की दफन हो गयी हर मुद्दे पे बंदूक चलन हो गयी॥ कुछ अरसे पहले मैं गुलजार था। इस बियाबान जंगल में बहार था। आधियाँ फिर ऐसी चलने लगी। नफरतों से बस्तीयाँ जलने लगी। मैं आसरा था भोले भालों का मैं बसेरा था मेहनत वालों का। जर्रा जर्रा ये मेरा बोल रहा है दरदे दिल अपना खोल रहा है। अबूझ वनवासियों का मैं घर हूँ।। आके देखो मुझे मैं बस्तर हूँ... »

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