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अभय गान अपने वाणी का मै स्वर आज सुनाता हूँ

अभय गान अपने वाणी का मै स्वर आज सुनाता हूँ ले समसीर लेखनी की मै रण नवगीत सुनाता हूँ माँ वीणा पाणी के चरणो मे मै शीश झुकाता हूँ माँ रणचंडी के झंकृत की मै झनकार सुनाता हूँ मै गायक हू नही किसी प्रेमी के अमर कहानी नही किसी लैला , मंजनू के अधरो भरी जवानी का न ही कवि हू मै , रांझा के अमर प्रेम कुर्बानी का मै तो चारण हूँ झाँसी की रानी की कुर्बानी का मै यथार्थ कवि हूँ, भारत के अमर वीर नवदूतो का मै कवि हूँ... »

“मैं ढूंढता रहा”

“मैं ढूंढता रहा” :::::::::::::::::: मैं ढूंढता रहा, उस शून्य को, जो मिलकर असंख्य गणना बनते । मैं ढूंढता रहा , उस गाथा को , जिस की अमर प्रेम हर दिशाओं में गूंजते । और मैं ढूंढता रहा , उस मेघ चंचल मन को जो अमृत बन वर्षा है करते । मैं ढूंढता रहा , उस पवन को जो कलियों की महक ले उन्मुक्त बिचरते । मैं ढूंढता रहा , उस बावरी चंचल मन को , जो मन में बसा प्रीत है करते । अंततः मैं ढूंढता रहा स्वयं... »

हे!री सखी कैसे भेजूं

“गीत” :::::::::::: हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। दूर देश विदेश भय हैं वो मन का मेरे प्रिय साजन। हे! री सखी कैसे करू मै, स – श्रृंगार मन यौवन। हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। सावन आ कर बहक गया, दामनि लगे है मोहे डरावन। हे! री सखी कैसे पाऊँ मै, साजन का वो प्रिय आलिंगन। हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। जब – जब देखूं मैं दर्पण होता मन ... »

प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है

✍🌹गीत 🌹✍ ✍ प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है। तू ही आरजू है तू ही मीत है।। रस्मे वफा की कसम तेरी याद है इस दिल मे सिवा नही कोई मेरे चाहत-ए-महफिल मे मेरे ख्वाहिश है तू तू ही गीत है । प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।। मेरी मुस्कान जानेजां मेरा तू ही नसीब है मन मे जो बसाया हूं वही ख्याले हबीब है मेरे नगमा-ए-नूर तू संगीत है। प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।। उम्मीद की किरण मेरी मेरी नयन का सुकून तू तू ही... »

तुम देह नहीं तुम देहाकार हो

तुम देह नहीं तुम देहाकार हो देह में हो देह से मगर पार हो क्या दिखायेगा रूप दर्पण तुम्हारा देखो अंतर में, खुलेगा राज सारा शाश्वत सौंदर्य ज्योति पारावार हो देह में हो देह से मगर पार हो. क्षणिक मौजों सा देह का उभार है मुखडे में देखे क्यों सौंदर्य-सार है भूले तुम, आत्मा का कैसे श्रंगार हो देह में हो देह से मगर पार हो. देख दर्पण ना जीवन गवां प्राणी ह्दय नगरी में उतर हो जा फानी ज्ञान रत्नों पूर्ण तेरे उ... »

गीत

“गीत” :::::::::::: हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। दूर देश विदेश भय हैं वो मन का मेरे प्रिय साजन। हे! री सखी कैसे करू मै, स – श्रृंगार मन यौवन। हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। सावन आ कर बहक गया, दामनि लगे है मोहे डरावन। हे! री सखी कैसे पाऊँ मै, साजन का वो प्रिय आलिंगन। हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। जब – जब देखूं मैं दर्पण होता मन ... »

Sapna

Ek Sapne Ke Piche Bhaag Rahi Hu Main, Na Jane Yeh Sach Hoga Bhi Ya Nahi, Phir Bhi Umeed Ka Man Me Deep Jalaye, Chali Ja Rahi Hu Main, Ek Sapne Ke Piche………………….. Mera Yeh Sapna Sirf Sapna Nahi, Meri Khwaish Hai Yeh, Hai Yeh Meri Tamanna, Ya To Banega Mere Jivan Ka Sach, Ya Rahegi Sirf Ek Kalpana, Is Sapne Ko Na Jane Kitne Dino Se, In Ankho Me Paal Rahi Hu M... »

बिन तेरे

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सावन का मुग्ध फुहार तू है

सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली । खनकती बोली मे ढली, ओह!आवाज सजीली सावन झड़ी मस्त बहार तू है । सावन का मुग्ध फुहार तू है ।। हवा की मादकता मधुर, सरसराहट मे निखरी अजब, बदन मे ऊमंग की सजी, कशमकशाहट अजब।। सावन की बेला साकार तू है । सावन का मुग्ध फुहार तू है ।। पानी मे नहाया यौवन, सांसो मे रफ्तार बढाये। दृश्य सावन मे लाजवाब, मन मे चाहते प्यार जग... »

क्षणिका

क्षणिका 🌹:– ✍ जब गम सताता है, गाने मैं गुनगुनाता हूं । जब ददं रुलाता है, तराने मैं सजाता हूँ ।। (1) जब रंज बढ आता है, रंगीला मन मै हो जाता हूं । जब जख्म गहराता है, मस्ती मगन मै बो जाता हूँ।। (2) देती है पीड़ा जब चुभन, चुप्पी का राग बन जाता हूं । व्यथा करती है जब भी आहत, प्यार का पराग बन जाता हूँ ।। (4) मालूम है मुझे इंसान हूँ मैं! मानवेत्तर ताग बन जाता हूँ । मिलती है चुनौती जब संघर्ष की करमो... »

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