Geet

सावन

अम्बर बरसे धरती भींगे नाचे श्रष्टि सारी सावन की बरखा प्यारी -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

Aazadi

“आधी रात की आज़ादी की सुबह अभी तक मिली नही थी, दीवारें कई बार हिली, बुनियादें अब तक हिली नहीं थीं , गोरों की गुलामी से निकले तो, कुछ दीमक ऐसे लिपट गये, समझ सके ना अर्थ आज़ादी का, ये शब्दों तक ही सिमट गये थे, दोष नही था गैरो का, अपनों से भारत हार गया था, आज़ादी की खुशियों को , बँटवारा ही मार गया था, मख़मल पर जो बैठे थे, वो कब फूलो के पार गये? जिस देशभक्त ने लहू बहाया, वो मरघट के संसार गये, तामस बढ़... »

बरखा

बरखा जरा प्यार बरसा दे कब से प्यासा अंतर है तू प्यास बुझा दे बरखा जरा प्यार बरसा दे बरस बरस बरखा मेरी कितने तुमको बरस गए सिंधु की एक बूँद को हम कबसे तरस रहे तू सिंधु से बिंदु मिला दे बरखा जरा प्यार बरसा दे -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

स्वर मैं स्वर मिलाओ

मैं गा रहा हूं, तुम स्वर मैं स्वर मिलाओ मैं जा रहा हूँ , तुम संग संग आजाओ जाऊंगा न छोड़ कर, गाऊंगा न बिन तेरे मैं भवर मैं, तुम पतवार बनके आओ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

संसार

संसार मैं रहना है, संसार मैं जीना है मिलती हैं कुछ खुशियां, कुछ गम भी पीना है कभी होंठों पर मुस्कान कभी आंसू पीना है संसार मैं रहना है संसान मैं जीना है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

गीत

मैं गीत क्या रचूंगी, तुम प्रेरणा न बनते मेरे निष्ठुर उर मैं, वन वेदना न उठते मैं गीत क्या रचूंगी तुम प्रेरणा न बनते -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

गीत — तुम नहीं तो ….. !

तुम नहीं, तो…… ! : अनुपम त्रिपाठी तुम नहीं; तो ग़म नहीं । ये भी क्या कुछ कम नहीं ।। तुम जो थे, तो ये भी था और वो भी था हर तरफ पसरी पड़ी रहती ……… व्यथा दर्द–—की-—-नदियां कई–बहतीं–यहां फिर भी कोरे मन में कोई संगम नहीं तुम नहीं; तो ……… कई उदास दिन ओढ़कर, काट ली हैं तनहा रातें साथ थे, तो चुप भली थी, गूंजती अब बिसरी यादें सूनी पलकों पे तने ... »

चल वहां

चल वहां जहाँ नहीं गम तुम हो वहां और बस हम सागर सी गहरी जीवन गाथा अम्बर तक है ,प्रीत हमारी साथ चलेंगे हर पल हर दम ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे अम्बर संग जैसे हो तारे साथ रहेंगे हम जन्मो तक चल वहां जहाँ नहीं गम -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)- »

गीत

चल वहां जहाँ नहीं गम तुम हो वहां और बस हम सागर सी गहरी जीवन गाथा अम्बर तक है ,प्रीत हमारी साथ चलेंगे हर पल हर दम ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे अम्बर संग जैसे हो तारे -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)- »

A pray for india

जब तक है जीवन तब तक इस की सेवा ही आधार रहे विष्णु का अतुल पुराण रहे नरसिंह के रक्षक वार रहे हे प्राणनाथ! हे त्रयंबकम! शिव शंभू के शिव सार रहे हम रहे कभी ना रहे मगर इसकी प्रभुता का पार रहे शेखर के वह उद्गार रहे अब्दुल हमीद सम ज्वार रहे हे पवनपुत्र! हे मारुति! भारत ही बारंबार रहे अब्दुल गफ्फार का शांति मार्ग बूढ़े जफर की तलवार रहे अब्दुल कलाम के प्राण बसे हिंदू मुस्लिम समभार रहे कण कण मिट्टी में वसु... »

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