Geet

गीत — तुम नहीं तो ….. !

तुम नहीं, तो…… ! : अनुपम त्रिपाठी तुम नहीं; तो ग़म नहीं । ये भी क्या कुछ कम नहीं ।। तुम जो थे, तो ये भी था और वो भी था हर तरफ पसरी पड़ी रहती ……… व्यथा दर्द–—की-—-नदियां कई–बहतीं–यहां फिर भी कोरे मन में कोई संगम नहीं तुम नहीं; तो ……… कई उदास दिन ओढ़कर, काट ली हैं तनहा रातें साथ थे, तो चुप भली थी, गूंजती अब बिसरी यादें सूनी पलकों पे तने ... »

चल वहां

चल वहां जहाँ नहीं गम तुम हो वहां और बस हम सागर सी गहरी जीवन गाथा अम्बर तक है ,प्रीत हमारी साथ चलेंगे हर पल हर दम ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे अम्बर संग जैसे हो तारे साथ रहेंगे हम जन्मो तक चल वहां जहाँ नहीं गम -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)- »

गीत

चल वहां जहाँ नहीं गम तुम हो वहां और बस हम सागर सी गहरी जीवन गाथा अम्बर तक है ,प्रीत हमारी साथ चलेंगे हर पल हर दम ऐसे चलेंगे संग तुम्हारे अम्बर संग जैसे हो तारे -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)- »

A pray for india

जब तक है जीवन तब तक इस की सेवा ही आधार रहे विष्णु का अतुल पुराण रहे नरसिंह के रक्षक वार रहे हे प्राणनाथ! हे त्रयंबकम! शिव शंभू के शिव सार रहे हम रहे कभी ना रहे मगर इसकी प्रभुता का पार रहे शेखर के वह उद्गार रहे अब्दुल हमीद सम ज्वार रहे हे पवनपुत्र! हे मारुति! भारत ही बारंबार रहे अब्दुल गफ्फार का शांति मार्ग बूढ़े जफर की तलवार रहे अब्दुल कलाम के प्राण बसे हिंदू मुस्लिम समभार रहे कण कण मिट्टी में वसु... »

क्या था क़सूर मेरा??????

क्या था क़सूर मेरा????? (पीड़ित बेटी आसिफ़ा के सवाल) 1.गहन गिरवन सघन वन में बहुत खुश अपने ही मन मे मूक पशु पक्षी के संग में था बसा परिवार मेरा….. पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ????? 2.बेटी बन में घर तुम्हारे आ गयी थी खुशियां बन परिवार जन पर छा गयी थी दो समय का भोज था और कुछ थे अपने थी भली वह झोपड़ी न थे महल सपने था ये हंसता खेलता संसार मेरा …… पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर म... »

क्या था क़सूर मेरा??????

क्या था क़सूर मेरा????? (पीड़ित बेटी आसिफ़ा के सवाल) 1.गहन गिरवन सघन वन में बहुत खुश अपने ही मन मे मूक पशु पक्षी के संग में था बसा परिवार मेरा….. पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर मेरा ????? 2.बेटी बन में घर तुम्हारे आ गयी थी खुशियां बन परिवार जन पर छा गयी थी दो समय का भोज था और कुछ थे अपने थी भली वह झोपड़ी न थे महल सपने था ये हंसता खेलता संसार मेरा …… पूछना में चाहती हु क्या था क़सूर म... »

अभय गान अपने वाणी का मै स्वर आज सुनाता हूँ

अभय गान अपने वाणी का मै स्वर आज सुनाता हूँ ले समसीर लेखनी की मै रण नवगीत सुनाता हूँ माँ वीणा पाणी के चरणो मे मै शीश झुकाता हूँ माँ रणचंडी के झंकृत की मै झनकार सुनाता हूँ मै गायक हू नही किसी प्रेमी के अमर कहानी नही किसी लैला , मंजनू के अधरो भरी जवानी का न ही कवि हू मै , रांझा के अमर प्रेम कुर्बानी का मै तो चारण हूँ झाँसी की रानी की कुर्बानी का मै यथार्थ कवि हूँ, भारत के अमर वीर नवदूतो का मै कवि हूँ... »

“मैं ढूंढता रहा”

“मैं ढूंढता रहा” :::::::::::::::::: मैं ढूंढता रहा, उस शून्य को, जो मिलकर असंख्य गणना बनते । मैं ढूंढता रहा , उस गाथा को , जिस की अमर प्रेम हर दिशाओं में गूंजते । और मैं ढूंढता रहा , उस मेघ चंचल मन को जो अमृत बन वर्षा है करते । मैं ढूंढता रहा , उस पवन को जो कलियों की महक ले उन्मुक्त बिचरते । मैं ढूंढता रहा , उस बावरी चंचल मन को , जो मन में बसा प्रीत है करते । अंततः मैं ढूंढता रहा स्वयं... »

हे!री सखी कैसे भेजूं

“गीत” :::::::::::: हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। दूर देश विदेश भय हैं वो मन का मेरे प्रिय साजन। हे! री सखी कैसे करू मै, स – श्रृंगार मन यौवन। हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। सावन आ कर बहक गया, दामनि लगे है मोहे डरावन। हे! री सखी कैसे पाऊँ मै, साजन का वो प्रिय आलिंगन। हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। जब – जब देखूं मैं दर्पण होता मन ... »

प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है

✍🌹गीत 🌹✍ ✍ प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है। तू ही आरजू है तू ही मीत है।। रस्मे वफा की कसम तेरी याद है इस दिल मे सिवा नही कोई मेरे चाहत-ए-महफिल मे मेरे ख्वाहिश है तू तू ही गीत है । प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।। मेरी मुस्कान जानेजां मेरा तू ही नसीब है मन मे जो बसाया हूं वही ख्याले हबीब है मेरे नगमा-ए-नूर तू संगीत है। प्रणय निवेदन मेरे तू ही गीत है।। उम्मीद की किरण मेरी मेरी नयन का सुकून तू तू ही... »

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