हाइकु

कोई रहबर नहीं

कोई रहबर नहीं कोई सहर नहीं अपनी भी खबर नहीं »

नीले सपनो में

नीले  सपनो में काले से है शुमार अपनों में »

उसने की थी शुरू लड़ाई

उसने की थी शुरू लड़ाई मात मैंने भी कभी न खाई »

वक़्त पकड़ता लम्हा

वक़्त पकड़ता लम्हा इस दुनिया में हर इंसा तनहा »

जंग इंसानियत की

जंग इंसानियत की इंसान हो रहे लुप्त »

उसके क़दमों की चाप

उसके क़दमों की चाप सनाटों को रौंद गई चुपचाप »

नफरतें बेहिसाब

नफरतें बेहिसाब पहने नक़ाब निकलते जनाब »

कौन आया

कौन आया कौन गया यही दुनिया »

दिखते तो अब जो कभी

दिखते तो अब जो कभी दिखाई देते पर  दिखने जैसे नहीं »

कुछ तो था खास

कुछ तो था खास कैसे कोई भूले था वो ख़ास »

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