Hindi-Urdu Poetry

राही बेनाम

न ये ज़ुबाँ किसी की गुलाम है न मेरी कलम को कोई गुमान है, छुपी रही बहुत अरसे तक पहचान मेरी, आज हवाओं पर नज़र आते मेरे निशान है, जहाँ खो गईं हैं मेरे ख़्वाबों की कश्तियाँ सारी, वहीं अंधेरों में जगमगाता आज भी एक जुगनू इमाम है, कुछ न करके भी जहाँ लोगों के नाम हैं इसी ज़माने में, वहीं बनाकर भी राह कई ये राही बेनाम है॥ राही (अंजाना) »

दिन और रात का सपना

दिन में देखा सपना रात को देखा सपना रात का जब टूटा सपना दिन में जगा हुआ पाया लेकिन दिन का जब टूटा सपना रात में भी सो न पाया।                                     – कुमार बन्टी   »

पापा

माँ के लिया बहुत सुना पढ़ा लिखा है सभी ने। कुछ पंक्तियाँ पापा के नाम। छुटपन से हर रोज पापा मेरे मुझे टहलाने ले जाते रहे, ऊँगली पकड़ कर मेरी मुझे वो रास्ता दिखाते रहे, मैं करके शैतानी उनको बहुत सताता रहा, वो भुलाकर शरारत मेरी मुझे गोद में उठाते रहे, मैं करके सौ इशारे उनकी राह भटकाता रहा, वो हर बढ़ते कदम पर मुझे सही बात बताते रहे, इस सोंच में के मैं उनका सहारा बनूगा, वो मुझको हर दिन नया पाठ पढ़ाते रहे॥ ... »

धागे-मोती

धागे-मोती

मोती को धागे से और धागे को मोती से जब तक होता नहीं प्यार तब तक उनकी नहीं बनती कोई विशिष्ट पहचान।    मोती=शब्द  धागे=विचार                                   – कुमार बन्टी   »

दिन और रात का सपना

दिन में देखा सपना रात को देखा सपना रात का जब टूटा सपना दिन में जगा हुआ पाया लेकिन रात का जब टूटा सपना दिन में भी सो न पाया।                                               – कुमार बन्टी   »

“कब तक करोंगे यूँ बेईमानी खुद से”

कब तक करोंगे यूँ बेईमानी खुद से। मुझे छोड़कर करोगे,नादानी खुद से।। , हमारी दास्तानों को फरेब कहने वाले। लिख नहीं पाओगें ये,कहानी खुद से। , तन्हाई में मिलें है लोग जो समन्दर किनारे। उनका अश्क़ है,या है यहाँ पानी खुद से।। , हमने बसर की जिंदगी ग़मो के दरम्यान। हमें दुश्मनो से नहीं, है परेशानी खुद से।। , किताबो में हम तुमको नहीं मिलने वाले। याद करना हो तो कर लो ज़ुबानी खुद से।। , बचपन ऐसे गुजरा की जैसे लम... »

न”वो वक़्त रहा न याद है क़िस्सा कोई”

न वो वक़्त रहा न याद है क़िस्सा कोई। मेरे हिस्से में ही नहीं है मेरा हिस्सा कोई।। , ये किया है ख़िज़ाँओ ने जहाँ घर अपना। गुजरे जमानों में था यही गुलिस्ताँ कोई।। , उनसे कौन पूंछे की क्या मिला खफा होके। अपनों को छोड़ता है क्या दानिस्ता कोई।। , छोड़ दिया मेहफिलो में मैंने आना जाना। कही मिल न जाएँ शख़्स मुझे तुझसा कोई।। , ख्वाहिशों की ख़ातिर हम परेशां रहे ताउम्र। पर जाते वक़्त साथ कहाँ गया खित्ता कोई।। @@@@RK@... »

कम आंकी

मेरी बातों में बस तुम थी , मगर मेरी बात कम आंकी तेरे यारों के कुनबे में , मेरी जात कम आंकी अपने अल्फाजों से मुझे दो पल में पराया करने वाले तूने प्यार के आगे मेरी औक़ात कम आंकी ।। »

uski y berukhi si dekh kr meri sase tezz hogyi usko kisi or k sath dekh kar uski ye bewafi bardash nhi hoti uske alwa jahen mai ab koi baat nhi hoti…..by RLv gahlot »

लफ़्जों का सहारा

अच्छा हुआ जो लफ़्जों का सहारा मिल गया वर्ना अकेले हो गये थे हम महोब्बत से मिल कर »

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