Hindi-Urdu Poetry

माँ

माँ

बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया, आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी, आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।। राही (अंजाना) »

माँ

माँ

बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया, आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी, आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।। राही (अंजाना) »

माँ

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बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया, आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी, आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।। राही (अंजाना) »

माँ

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बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया, आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी, आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।। राही (अंजाना) »

माँ

माँ

बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया, आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी, आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।। राही (अंजाना) »

माँ

माँ

बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया, आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी, आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।। राही (अंजाना) »

माँ

माँ

बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया, आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी, आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।। राही (अंजाना) »

माँ

माँ

बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया, आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी, आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।। राही (अंजाना) »

माँ

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बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया, आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी, आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।। राही (अंजाना) »

माँ

माँ

बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया, आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी, आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।। राही (अंजाना) »

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