Hindi-Urdu Poetry

बहुत दूर

चलते-चलते बहुत दूर निकल आई हूँ मैं, बहुत कुछ पीछे छोड़ आयी हूँ मैं, वो खुशियाँ, वो सपने, वो मस्ती के पल अपने… कुछ आँसू, कुछ यादें, कुछ लोगों से की बातें….. बस… छोड़ आयी हूँ मैं, बहुत दूर निकल आयी हूँ मैं। बहुत दूर….. चलते-चलते कभी याद आते हैं वो पल, जिन्हें जिया था मैंने कल। तो सोचती हूँ कि क्यों??? खो गई वो हँसी कहीं, खो गई वो मस्ती कहीं। काश! मिल जाये फिर से मुझे वो पल कहीं... »

कैसा रस्ता

ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त है, जो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहीं, ये कैसा रंग, कैसा वर्ण, कैसा रोगन है, जो कभी चढ़ता भी नहीं, कभी उतरता भी नहीं, ये कैसा सफर, कैसा रस्ता, कैसा मन्ज़र है, जो कभी मिलता भी नही, कभी सुलझता भी नहीं।। राही (अंजाना) »

Alvida

जा रही हूँ आज सबसे दूर, खुद की ही तलाश में। वहीं, जहाँ छोड़ आयी थी खुद को, किसी की याद में। पर अब उससे भी ज़्यादा मुझे ज़रूरत है मेरी। अब ढूंढना है मुझे पहचान क्या है मेरी। हो सके तो माफ करना मुझे, मन करे तो याद करना मुझे। ले जा रही हूँ खुद को सबसे चुरा कर कहीं दूर…..कहीं दूर… बहुत दूर….. बहुत दूर… जहाँ मिल सकूं एक बार खुद से, और पूछ लू एक बार मुझसे, की क्यों रह गई मैं इतनी अक... »

Gulabi sa din

Gulabi sa din

please read and makes comments »

Sun Zara

Sun Zara

मैं आसमां की ऊंचाइयों को छू लूंगी, तू पिंजरा तो खोल ज़रा। मैं दिल की गहराइयों को छू लूंगी, तू1मुझे वक्त तो दे ज़रा। मैं हर कदम पर तेरा साथ दूंगी, तू मुझे समझ तो ज़रा। मैं हर मुसीबत को दूर कर दूंगी, तू मुझपर भरोसा तो कर ज़रा। मैं हर जगह मान बढ़ाऊंगी तेरा, तू मुझे सम्मान तो दे ज़रा । मैं लड़की हूँ, हर कदम पर जीत जाउंगी, तू मुझे जीने तो दे ज़रा। »

Maa: Ek Sathi

Jb aankh khuli is duniya mein, Tb sbse hi anjaan thi m… Par phir bhi ek ehsas tha jisme Saara sukoon pa leti thi mein. Jb badi hui m thodi si, Tb is anjaano ki basti mein, thama hath mera usne, aur dikhlaya jeevan ka sach usne… Jb aur m thodi badi hui, Tb mili mujhe ek dost nayi. Jo mere jeevan path par, Har kadam pe mere sath chali. Vo dost bani, vo behn bani, Vo guru bani, vo sathi b... »

सार्थक भाव विक्षेप

अवसाद का विक्षोभ नीरव, चपल मन का क्लांत कलरव देखता पीछे चला है लगा मर्मित स्वरों के पर । शुष्क हिम सा विकल मरु मन, भासता गतिशील सा अब, भाव ऊष्मा जो समेटे बह चला कल कल हो निर्झर। विगत कल में था जो मन मरु और अस्तु प्रस्तर, विकलता का अमिय पी फूटा था अंकुर। हूँ अचंभित आज मै खुद, पा वो खोया अन्तः का धन, धन की जो था विस्मृत सा, मन विपिन में लुट गया था, स्वार्थ और संकीर्णता के चोर डाकू ले उड़े थे। आज लौटा... »

डूबकर देख लिया

डूबकर देख लिया , जिस घड़ी से , तेरी आँखों में । नहीं अब डूबने से , जरा सा भी , डर हमें लगता । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो . सवेरे की गुनगुनी अनुभूतियों का सपरिवारसहर्ष हार्दिक अभिवादन., हर पल मंगलकामनाएँ स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

Raakh

kon yaad rakhta hai raakh ko jismo ke sab diwaane hai iss janam mai nibha na sake saat janmo ki baat karte hai @@ SAGAR @@ »

ajo money porey

sloth goti cholchey gari ajo thomkey daraye eye mon amari khub chena akta goli diye jekhaney hetey chilam bhalobashar sopno niye abujh se mon ajo korey smirti charon soney na kono baron moner ki esechey shrabon keno ajo bhijey jaye eye nayon »

Page 1 of 380123»