Hindi-Urdu Poetry

“मुझे राहत बन जाना हे”

“मुझे राहत बन जाना हे”

उल्झे हुए रास्तो से, मुझे अंजाम तक जाना हे, मंज़िल ना जाने कहा गुम हे, ना जाने किस राह गुज़र जाना हे.. मे थका हारा दर ब दर, पाओं मे भी चुभन सी हे, हाल ए गरदिश का साया, सांसे भी अब सहम सी हे! रुकना ठहरना अब बस मे नही, मुझे गरदिशो को पार लगाना हे, करके समझौता पेरो के छालो से, खुद को रूहानी बेदाग बनाना हे..! मेरे अहसास मेरे जज़्बात, करेगे तज़किरा इक दिन, करुगा तज़किरा इक रोज़, मेरी मासूम सी ख्वाहिशो का.! स... »

गुब्बारे

देख गुब्बारे वाले को जब बच्चे ने आवाज़ लगाई दिला दो एक गुब्बारा मुझको माँ से अपनी इच्छा जताई। देखो न माँ कितने प्यारे धूप में लगते चमकते सितारे लाल, गुलाबी, नीले ,पीले मन को मेरे भाते गुब्बारे। देख उत्सुक्ता माँ तब बोली बच्चे माँ मन रखने को भैया दे दो इसको गुब्बारा पैसे ले लो मुझसे तुम। »

दुनिया

कैसी ये दुनिया बनाई प्रभु ने सब वक़्त के साथ जिए जा रहे हैं ऊँगली पकड़ के चलना सीख कर कन्धों के सहारे चले जा रहे हैं।। »

सबकी रातों में ख्वाबों की पहरेदारी रहती है

सबकी रातों में ख्वाबों की पहरेदारी रहती है, पर मेरी आँखों में खाली जिम्मेदारी रहती है, कहता हर शख्स है खुल कर दिल की अपने, पर मेरे चेहरे पे ठहरी सी दुनियाँदारी रहती है, सुना है यहाँ सबको- सबकी पूरी चाल मिलती है, पर खेल देखो हर बार एक मेरी ही बारी रहती है।। राही (अंजाना) »

डर के साये में

डर के साये में

डर के साये में खुद को दबाये बेटियाँ रहती हैं, बहुत कुछ है जो खुद ही छुपाये बेटियाँ रहती हैं, अपने को अपनों से पल-पल बचाये बेटियाँ रहती हैं, होठों को भला किस कदर सिलाए बेटियाँ रहती हैं, कहीं कन्धे से कन्धा खुल के सटाये बेटियाँ रहती हैं, कहीँ नज़रों को सहसा क्यों झुकाये बेटियाँ रहती हैं॥ – राही (अंजाना) »

आखरी उम्मीद थी वो भी टुट गई।

आखरी उम्मीद थी वो भी टुट गई। तुझे से ही उम्मीद थी —- और तु ही हमको छोड़ गयी। एक आखरी उम्मीद थी वो भी टुट गई। मंजिल पर पहुँचना दुर की बात थी। पहले ही मोड़ पर वो हमको छोड़ गयी। प्यार मे मजबुरियाँ किसको ना होता । ये मजबुरिया के नाम पर तु मुझे छोड़ गई।। हम तो नाहक मे अपनी किस्मत अजमाते रहे, तु तो मेरे अपने खास के साथ ऩाता जोड़ गयी।। दुर जा रहा हूँ तेरे सहर से मै क्योकि ये हवा भी हमसे नाता तोड़ ग... »

तुमने उकटी है मेरी औकाद

तुमने उकटी है मेरी औकाद तुमने उकटी है मेरी औकाद तेरा भी कोई उकटे गा। अब मेरी बद्दुआएँ पीछे करेगी, हालत को कुछ एेसे बन जायेगे। अपनी बाल तु ऩोचेगी अपना सर खुद फोड़गी।। किस औकाद की बात करती हो तुम वहाँ जाने के बाद खाली हाथ जाएगी—- कुछ भी साथ ना जाएगा। ये मतलबी दुनिया केवल तेरे जनाजे के पीछे जाएगा। ज्योति »

संस्कारों के बीज

संस्कारों के बीज

संस्कारों के बीज यहाँ पर अक्सर बोये जाते हैं, सम्बंधों के वृक्षों पर नये पुष्प संजोये जाते हैं, मात-पिता, दादा-दादी और भाई बहन के नातों से, हर एक क्षण में खुशियों के कई रंग पिरोये जाते हैं, आन पड़े जब मुश्किल सिर तब रश्ते परखे जाते हैं, लोग रहें मिल-जुल कर जिस घर परिवार बताये जाते हैं।। – राही (अंजाना) »

मिलने से पहले

मिलने से पहले इतना मत घबराया करो, हर बात को यूँ मुझसे न बताया करो, देखना है गर उस खुदा की रहमत तो, सर ही नहीं दिल को भी तो झुकाया करो, चुप रहकर ही चेहरे पर सब न दिखाया करो, कुछ तो हवाओं के साथ उड़ाया करो, अब इतना भी न हमको सताया करो, सपनों में सही पर गले से तो लगाया करो।। – राही (अंजाना) »

छू कर नहीं देखोगे तो सपना ही लगेगा

छू कर नहीं देखोगे तो सपना ही लगेगा, इस मिट्टी सा तुमको कोई अपना नहीं लगेगा।। – राही (अंजाना) »

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