Hindi-Urdu Poetry

सुवह

सुवह सुवह ये गुनगुनी सी , धूप रूप की , लगी है सेंकने ये , शीत -थरथराए तन । उमग जगाने लगी , मन में तपन प्यार की , कि रूप का अलाव तापे , थरथराया , तन और मन । जानकी प्रसाद विवश मेरे अपने मित्रो , मधुर महकते सवेरे की…हर पल तन मन सरसाती ,हार्दिक मंगलकामनाएँ, सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें ……। आपका ही , जानकी प्रसाद विवश »

धुर सुवह का प्यार मित्रो

मधुर सुवह का प्यार मित्रो , मधुर सुवह का प्यार । नहीं मित्रता से बढ़ कोई , है कोई उपहार । सदा मित्रता भाव हृदय में , प्रेम-सुधा बरसाते । रोम रोम हर्षाता , हर पल , दुर्लभ अपनत्व लुटाते । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो , सुमंगलकारी , मधुर सवेरे की अपार प्रेम पगी ,शुभकामनाएँ , सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

अपने मित्रों की पीर हरण

अपने मित्रों की पीर हरण , जो करता है । मित्रता -कसौटी , जगजाहिर, वो करता है । जब विपदाओं के ,चक्रव्यूह में, मित्र फँसे , फिर अर्जुन जैसा बन कर मित्र , कर्तव्य उजागर करता है । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो , मनोहर सवेरे की , अनुपम घड़ियों में ,सपरिवारसहर्ष , हमारी मंगलकामनाएँ स्वीकार करें । आपका हर पल सत्य-शुभ , सुंदर हो । आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश »

Jivan me sabko kya chahiye…………….

Jivan me sabko kya chahiye…………….

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ऐसा वक्त कहाँ से लाऊँ

ऐसा वक्त कहाँ से लाऊँ

कविता – ऐसा वक्त कहाँ से लाऊं वेफिकरी की अलसाई सी उजली सुबहें काली रातें हकलाने की तुतलाई सी आधी और अधूरी बातें आंगन में फिर लेट रात को चमकीले से तारे गिनना सुबह हुए फिर सबसे पहले पिचगोटी का कंकड़ चुनना मन करता है फिर से मैं एक छोटा बच्चा बन जाऊं जो मुझको बचपन लौटाए ऐसा वक्त कहाँ से लाऊं. बारिश के बहते पानी में छोटी कागज नाव चलाना आंगन में बिखरे दानों को चुंगती चिड़िया खूब उड़ाना बाबा के कंधों ... »

नवसंवत्सर को नज़राना

फाल्गुन की ब्यार में, कोयल की थी कूक गिरते हुए पत्तों की सरसराहट उर में उठाती थी हूक॥ जीवंत हो उठी झंझाएँ मानो कुछ कहती थीं रह-रहकर आती चिड़ियों की चहचहाहट निज क्रंदन का राग सुनाती थीं। बलखाती-लहराती वृक्षों की डाली, मानो मुझे बुलाती थीं। सन्नाटे उस उजली धूप के, स्पष्ट सुनाई देते थे झिलमिलाती किरणें आ पत्तों के बीच से, प्रकाशमय वर्णों को कर जाती थीं, त्वरित-घटित निज गाथाओं याद मुझे दिलाती थीं मानव-... »

नवसंवत्सर को नज़राना

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Meri Manzil

Meri Manzil

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यादें

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खुदा मेरा भी अपना होता

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