Hindi-Urdu Poetry

मुक्तक

मैं जब कभी तेरी तस्वीर देख लेता हूँ। मैं अपने ख़्यालों की तक़दीर देख लेता हूँ। ख़्वाबों के समन्दर में उठती है चिंगारी- मैं तेरी अदाओं का तीर देख लेता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

कतरा बन गिरो

कतरा बन गिरो, पत्ते पर ओंस की भांति। कतरा बन गिरो, शीतल बारिश की भांति। कतरा बन गिरो, सीप में मोती की भांति। कतरा बन गिरो, पिघलते मोम सी ज्योति की भांति। कतरा बन गिरो, मातृभूमि पर लहू की भांति। कतरा बन ऐसे न गिरो, किसी आंखों से आंसू की भांति। देवेश साखरे ‘देव’ »

कुंभ

कुंभ कुंभ ये है. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ . कुंम्म्मभ। संगम तट पर प्रयागराज में, ये है कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंम्म्मभ। श्रिवेणी में शाही स्नान. देखता पूरा ब्रह्मांड, अदभूत नज़ारे. भस्म रमाये, भक्तों का ये भव्य रूप. देख भगवन अमृत बरसाए, हर हर महादेव …… ये है भक्तों का… कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंम्म्मभ। ध्वजा... »

रिश्ते

रिश्ते ना गहरा सागर हैं ना जल माटी की गागर हैं वे तो बस बहता दरिया हैं जीवन जीने का ज़रिया हैं कुछ रिश्ते तुम्हारी क़िस्मत हैं, कुछ रिश्ते तुम्हारी हसरत हैं, पर हर रिश्ता रूख़ मोड़ता है, कहीं, कभी, दम तोड़ता है। कुछ रिश्तों ने तुम्हें राह दिया, कुछ रिश्तों ने बस आह दिया, कुछ रात से थे, पर सहर लगे, कुछ अमृत थे, पर ज़हर लगे। हर रिश्ते ने, भिगोया है, कुछ सींचा है, कुछ बोया है, न जाने कितने रिश्तों मे... »

ये ज़िन्दगी कैसी

परत दर परत यूँही खुलती सी नज़र आती है ज़िन्दगी, उधेड़ती तो किसी को सिलती नज़र आती है ज़िन्दगी, हालात बदलते ही नहीं ऐसा दौर भी आ जाता है कभी, के जिस्म को काट भूख मिटाती नज़र आती है ज़िन्दगी, दर्द जितना भी हो सहना खुद ही को तो पड़ता है जब, चन्द सिक्कों की ख़ातिर बिकती नज़र आती है ज़िन्दगी।। बदलती है करवटें दिन से लेकर रात के अँधेरे में इतनी, सच में कितने किरदार निभाती नज़र आती है ज़िन्दगी।। राही अंजाना »

जज़बात

जज़बात आज फिर से उमरे है कलम आज फिर बरसे है फिर से इस नादान दिल को फिसलने का मौका मिला है फिर से आँखों में उसका नूर दिखने लगा है उम्मीद ना थी इस दिल को की तुम मिल जाओगी इस गहरी रात की यू खुशनुमा सुबह हो जाएगी »

माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो

माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो, मुझे जीवन का मतलब बतला दो, कहती हो मेरे जिगर का टुकड़ा हो पापा की लाडली हो फिर पराये धन का मतलब समझा दो, माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो, एक नह़ि दो घरों की रोशनी हूँ कहती हो इस जहाँ कि रचियता हो फिर च़िराग का मतलब समझा दो, माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो, बेटी,बहना,बहु,दादी,नानी,माँ जाने कितने नाम ह़ै माँ बस मुझे मेरे नाम से अवगत् करा दो, माँ मुझे पगडन्डी पे... »

दिल का पथिक

हालात जमाने की कुछ वक्त की नजाकत, कैसे कैसे बहाने भूलों के वास्ते। अपनों के वास्ते कभी सपनो के वास्ते, बदलते रहे अपने उसूलों के रास्ते। कि देख के जुनून हम वतनों की आज, जो चमन को उजाड़े फूलों के वास्ते। करते थे कल तक जो बातें अमन की, निकल पड़े है सारे शूलों के रास्ते। खाक छानता हूँ मैं अजनबी सा शहर में, क्या मिला खुदा तेरी धूलों के वास्ते। दिल का पथिक है अकेला”अमिताभ” आज, नाहक हीं चल पड़ा ... »

प्यार का पहला पन्ना

तुझसे क्या नाता जुड़ा की हर सकस मैं तू नज़र आया इतनी भी ना पास आ तू की मेरे अकेलेपन को तेरी आदत पड़ जाए गम ए दिल को दर्द की तोह आदत है पर वहा ए मोहब्बत पहली बार है सजदा किसका करु पता नहीं तेरा या उस खुदा का जिसने तुझे बनाया »

मैं शायर हूं

शब्दों से खेलना हुनर है मेरा, जज़्बातों से खेलना, हमें आता नहीं। कलम हथियार है मेरा, बाज़ुओं की ताक़त, मैं दिखाता नहीं। नर्म दिल हूं, हां मैं शायर हूं, मोहब्बत के सिवा, कुछ भाता नहीं। दिलों में रहने की आदत है, दिल की लगी को, दिल्लगी बनाता नहीं। देवेश साखरे ‘देव’ »

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