Hindi-Urdu Poetry

वीर

छोड़ कर घरबार अपना, सीने पर गोली झेली बहा के अपने रक्त को, बचा ली मांगों की रोली खेल सकें हम सब होली, सीने पर झेली गोली -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

धरती पर आने दो

शिव की पूजा करते हो , शक्ति की करते हो हत्या समाज देश पर आती है, नित नयी विपदा मान रखो नारी का, नारी सम्मान करो मत मारो गर्भ में इसको, धरती पर कन्या आने दो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

नारी

दुर्गा काली लक्ष्मी का, शिव ने भी सम्मान किया नतमस्तक होकर शिव ने, इनको ही प्रणाम किया शिव ने ही नारी को, शक्ति का है नाम दिया -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

मानवता तुम खो चुके

मानवता तुम खो चुके, बस पैसा दिखता है क्या लाया था तू इस जग, जिसके लिए तू रोता है -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

होड़

चारो और है फैला, आखिर ये कसा मोह इंसान खुद को है मार रहा, लगी ये कैसी होड़ -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

विकार

कान्हा ओ कान्हा, मेरा भी माखन चुरा ले माखन चुरा के कान्हा प्यारे, चित भी मेरा चुरा ले जो हो मन में मेरे विकार, इनको भी तू चुरा ले -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

कान्हा

प्रेम की डोरी से,यशोदा की लोरी से बंध गए नन्द किशोर छल कीन्हे बड़े कान्हा,प्यारी मईया से, बहुत प्रेम है इनको, ग्वाल औ गैया से माखन चोरी से,ब्रज की होरी से बंध गए नन्द किशोर -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

पर्वत

ऊँचे ऊँचे पर्वत , पर्वत पर ये रास्ते किसने बनाये ये सब, और बनाये किसके वास्ते -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

क्रांति

जल उठी क्रांति मशाल, क्रांति के तुम दूत बनो मातृ भूमि से प्यार है तो, भारत माँ के दूत बनो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

मातृ भूमि

अर्पण तन मन धन कर दो, स्व मातृ भूमि के लिए रहे वर्चश्व स्व का सदा, ना हो बंधन,मुक्ति के लिए -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)- »

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