Hindi-Urdu Poetry

दौर आ चला है

देखो फिर किचड़ उछालने का दौर आ चला है। खुद का दामन संभालने का दौर आ चला है। लाख दाग सही, खुद का गिरेबां बेदाग नहीं, दुसरों की गलतियां गिनाने का दौर आ चला है। वादों की फेहरिस्त तो, फिर से लंबी हो चली, इरादों को समझने समझाने का दौर आ चला है। बरसों से निशां पे फ़ना हैं, कुछ एक नादां मुरीद, शख्सियत पे बदलाव लाने का दौर आ चला है। वहां रसूख़दारों की मिलीभगत, पूरे ज़ोरों पर है, यहां दोस्तों के लड़ने लड़ा... »

O nil gagan ke saudagar

ओ नील गगन के सौदागर,, हवा में उड़ना तेरी फितरत है, मुझे भी अपनी पंख दे दे पंछी , मैं भी ऊरु उस नील गगन में, उड़ कर उस नभ को छू लूं , क्या जानू वह कैसा है ? तू ही बता दे पंछी , बादल सच में पास से कैसा है ? ओ नील गगन के सौदागर , हवा में उड़ना तेरी फितरत है, इच्छा होती सूरज देखूं चंदा देखू, तारे और सितारे देखू, मैं भी उरू उस नील गगन में , उडकर उस नभ को छू लूं , क्या जानू वह कैसा है? तू ही बता दे पंछी... »

भिखारी कौन है…

यह टूटे हुए घरों की कहानी है फुटपात पर बीती जिसकी जवानी है भीख मे बस वह इंसानियत मांगते रहते न जाने क्यों,आँखों में उनके आशाओं का पानी है मांग कर जिंदगी जीना किसी की लाचारी है लूटकर खाते वह आदरणीय भ्रष्टाचारी है कभी ऊपरवाले से कभी खुद से तो कभी जहां से मांगते आप ही बताओ कौन नहीं यहाँ भिखारी है यह टूटे हुए घरों की कहानी है फुटपात पर बीती जिसकी जवानी है………. »

मैं जाम नहीं

छलक जाए पैमाना, मैं जाम नहीं। भले खास ना सही, पर आम नहीं। एक बार गले लगा कर तो देखो, भूला सको मुझे, वो मैं नाम नहीं। गुरूर नहीं मेरा, खुद पर यकीन है, आज़मा लो, पीछे हटाता गाम नहीं। तुमको माना देवकी, मुझ ‘देव’ की, पर अफसोस है, की मैं राम नहीं। देवेश साखरे ‘देव’ 1.गाम- कदम »

शब्द

हर शब्द हर वक्त तुझे झूठा ही लगेगा यहाँ, जो तूने प्रेम का ढाई अक्षर गर पढ़ा ही नहीं, जो कहता हूँ सच है ऐ मेरे दिल सुन तो ज़रा, ख्वाब दिलों के बाहिर तूने कभी गढ़ा ही नहीं।। राही अंजाना »

बुझते चराग

बुझते चराग है हम, हवा न दो सारा शहर जला देंगे खुद को शेर समझने वाले, कभी लड़कर देखो तुम्हे गीदड़ बना देंगे है शक्ति इतनी मुझमें की, तुम कहो तो कांटो के शहर में फूल सजा देंगे बुझते चराग है………… »

Haba jara thahar tu

ऐ हवा जरा ठहर तू, मेरी एक बात तो सुन, क्यों रूकती नहीं मेरे पास तुम, करनी है तुमसे कुछ बात, ऐ हवा जरा ठहर तू…… कहां से आई हो तुम ? कहां तुझे जाना है ? हौले हौले रेशम सी तेरी चाल, ऐ हवा जरा ठहर तू …… इठलाती हुई अल्लड वाला तुम , कोई गम नहीं क्या तेरे पास? लहराती हुई चली कहा तुम? ऐ हवा जरा ठहर तू ….. रुक जा तू अब बस मेरे पास, तू है मेरी सहेली सुन, गर रुकी नहीं तो, मैं भी... »

व्यापार

दिल की जो बातें थीं सुनता था पहले, सच ही में सच था जो कहता था पहले। करने अब सच से खिलवाड़ आ गया, लगता है उसको व्यापार आ गया। कमाई की खातिर दबाता है सब को , गिरा कर औरों को उठता है खुद को। कि जेहन में उसके जुगाड़ आ गया, लगता है उसको व्यापार आ गया। मुनाफे की बातें ही बातें जरूरी। दिन में जरूरी , रातों को जरूरी। देख वायदों में उसके करार आ गया, लगता है उसको व्यापार आ गया। मूल्यों सिद्धांतों की बातें हैं... »

कहां कह पाती हूँ मैं कुछ तुमसे

कहां कह पाती हूँ मैं कुछ तुमसे अल्फ़ाज जज्बातों का साथ ही नही देते। »

रंगरेज

बन रंगरेज इस तरह रंग डाले, रंग ए रूह और भी निखर जाए। मिले गले इस तरह दोस्त बनकर, दुश्मनी हो अगर, टूटकर बिखर जाए।। »

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