Hindi-Urdu Poetry

इज्जत

बहुत कुछ कहते कहते रुक जाया करते हैं, बात ये है के हम इज्जत कर जाया करते हैं, रखते हैं अल्फ़ाज़ों का समन्दर अंदर अपने, और ख़ामोशी से दिल में उतर जाया करते हैं, प्रश्न ये बिल्कुल नहीं के उत्तर मिलता नहीं हमें, जंग ये है के हम जवाबों में उलझ जाया करते हैं, हाथों की लकीरों पर “राही” हम चला नहीं करते, तो क्या हुआ मन्ज़िल के मुहाने पर तो जाया करते हैं।। राही (अंजाना) »

गुंजाईश

मेरी आँखों में ही खुद को निहारा करता है, हर रोज़ ही वो चेहरा अपना संवारा करता है, आईने के सही मायने उसे समझ ही नहीं आते, कहता कुछ नहीं बस ज़हन में उतारा करता है, गुंजाइय दूर तलक कहीं सच है नज़र नहीं आती, के वो किसी और के भी मुख को निखारा करता है।। राही (अंजाना) »

मुक्तक

मैं तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तड़पाती यादों की जागीरों का क्या करूँ? मैं अश्कों को पलकों में रोक सकता हूँ लेकिन- मैं दर्द की लिपटी हुई जंजीरों का क्या करूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

निगरानी

पत्थरों की नगरानी में शीशे के दिल रख दिए, इस नज़्म ऐ जवानी में ये किसने कदम रख दिए, मशहूर अँधेरे बाज़ार में जो मोल लग चुका था मेरा, इस ज़ख्म ऐ निशानी में ये किसने मरहम रख दिए, आहिस्ता-आहिस्ता किसी ख़्वाब की आगोश में जाने से पहले, इस जश्न ऐ कहानी में ये किसने भरम रख दिए, दवा और दुआ के दर छोड़ कर तेरी राह में “राही”, इस जिस्म ऐ रूहानी में ये फूल किसने नरम रख दिए॥ राही (अंजाना) राही (अंजाना) »

तरक़ीब

तरकीब कोई और ढूंढो ऐसे तो नज़र नहीं आने वाला, छुप कर बैठा है जो अंदर वो तो बाहर नहीं आने वाला, गहरा समन्दर है बहुत मन के भीतर हम सबके कोई, बिना डूबे तो देखो अब कोई तैर कर नहीं आने वाला, फांसला है मीलों का इस ज़मी से उस आसमाँ के जानिब, चलो अब तुम्हीं साथ मेरे बीच में कोई नहीं आने वाला, आँखों ही आँखों में हो जाने दो दिल की बातों को सारी, ज़ुबाँ पर अल्फ़ाज़ों का मन्ज़र अब कोई नहीं आने वाला।। राही (अंजाना) »

ताला

दिल के मेरे ताले की अजीज़ चाबी ले गया कोई, उम्र भर के लिए जैसे बेताबी दे गया कोई, शरारत कुछ ऐसी मुझसे छिप कर गया कोई, के अच्छे खासे दिल को खराबी दे गया कोई, महफूज़ रखे थे जो मन के दरवाजे के भीतर मैंने, उन एहसासों के दामन पर रंग गुलाबी दे गया कोई, उम्मीदों की खिड़कियों की गरारी घिसने से पहले ही, जबरन ही मेरी नज़रों को धार नवाबी दे गया कोई।। राही (अंजाना) »

कम देखा है

जितना भी देखा है मनो उतना ही कम देख है, मैंने इस दुनियाँ की आँखों में कितना कम देखा है, सड़कों पर पनपती इन बच्चों की कहानी से, किरदार जब भी देखा अपना मैंने विषम देखा है, बेबस रिहाई की उम्मीद में ज़िन्दगी को ढूंढते अक्सर, लोगों की आँखों को होते हुए मैंने नम देखा है।। राही (अंजाना) »

जिन्दगी

जिन्दगी

बहारों को रहने के लिए पतझड़ की जरूरत होती हैं ‌ खुशियों को पाने के लिए दुख सहने की क्षमता होती है सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत की जरूरत होती है हमें जिंदगी में साथ की अहमियत समझनी होगी क्योंकि हमारे जनाजे को उठाने के लिए भी साथ की जरूरत होती है जिन्दगी में हमेशा दुख रहेंगे ये जरूरी तो नहीं है माना कि जब हम अपने आये थे तो रोते-रोते आये थे पर रोते-रोते जाते ये जरूरी तो नहीं है भर देती है दामन किस... »

love

tujhe paya to ye jana h aaj tak sab pakr bhi kuch na paya tha mile hai tujhe to pyar samajh aaya jis din se tumne humne apna mana h iss dil ne bas tujhe he aapnaya »

ज़नाब आहिस्ता आहिस्ता !

सच होते जा रहे हैं मेरे ख्वाब आहिस्ता आहिस्ता, वो दे रही मेरी बातों के जवाब आहिस्ता आहिस्ता, सालों से बेकरार किया है  मेरे दिल को जो उन्होंने, लूँगा मैं उनसे अपना यह हिसाब आहिस्ता आहिस्ता, धीमी आँच पर पका है मेरे जज्बातों का सिलसिला, चढ़ने लगा मुझ पर उनका शबाब आहिस्ता आहिस्ता, ढल गई है अब मेरे इंतजार की स्याह रात, उभर रहा है अक्स पर आफ़ताब आहिस्ता आहिस्ता, वो सुर्ख़ चेहरा जिस पर क़ुर्बान दिलोजान, हो ... »

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