Hindi-Urdu Poetry

उलझन

गोली चली थी उस रात, हमारे इरादों की छाती पर मर गयी हमारी हमदर्दी, शहनाई की ख़ामोशी सुनकर. ज़िद्दी दिलो और भोले विचारो के संग निकले थे हम कुछ साबित करने, किंतु राह में कही खो गए हम, सखा जो दुशमन बन गए. अकेली सी संसार, और सिर्फ एक खिलाडी कैसी पहली हैं यह प्यास और अजीब यह ज़िंदगानी. »

Barish

Barish

kaisi hain yeh birha ki agan, jo barish ke panio se na bujhe, kaisi hain yeh teri yaad, jo ankho ke pani se na bujhe satat sangram toh zindagi ka maksad tha, Par es mamley main anshru hi sahara hain, Tere aney main kiasmat ka haath tha, Tere janey main mera Afsos hota hain apney abhiman main, Afsos hota hain es barish ke mausam main, Thora gussey ko darkinar karkey kash hum mil saktey, Ak chai ya ... »

जमाने बीत गए जिनको भुलाये हुए आजफिर हैं क्यो याद वही आये हुए कितने बेरुखी से तोड़े थे वो दिल को दिल के टूकड़ो को हैं हम सम्भाले हुए सोचते थे न आएगी क़यामत कभी ये क्या हुआ वो हैं दर पे आये हुए जिसे छूने की चाहत में उम्र गुज़ार दी ज़नाज़े को मेरे हैं वही गले से लगाये हुए जिन्दा था तो तन्हाई ने मार डाला,मौत पे अपने तो ठीक दुश्मन भी रोते हैं आये हुए “विपुल कुमार मिश्र” »

उसी का शहर था उसी की अदालत।

उसी का शहर था उसी की अदालत। वो ही था मुंसिफ उसी की वक़ालत।। , फिर होना था वो ही होता है अक्सर। हमी को सजाएं हमी से ख़िलाफ़त।। , ये कैसा सहर है क्यू उजाला नहीं है। अब अंधेरों से कैसे करेंगें हिफ़ाजत।। , चिरागों का जलना आसान नहीं था। हवाओं ने रखा है उनको सलामत।। , तुमको फिक्र है न हमकों है फुरसत। न है कोई मसला न कोई शिकायत।। , साहिल भँवर में है जिंदा अभी तक। ये उसका करम है उसी की इनायत।। #रमेश »

इश्क़ करना बहुत आसान निभाना है बहुत मुश्किल।

इश्क़ करना बहुत आसान निभाना है बहुत मुश्किल। किसी ने पा लिया सब कुछ किसी को है नही मंजिल।। सफ़र में हम रहे तन्हा मिली तन्हाइयां हमको। नहीं अफ़सोस इसका है हुए जो हम नहीं कामिल।। @@@@RK@@@@   »

pyaar

Hamne to mohabbat Ke nashe me unhe khuda bana diya. Hosh to tab aaya jab unhone kaha ki khuda kisi ek ka nahi hota. »

जिसकों कहतें थे हम हमसफ़र अपना।

जिसकों कहतें थे हम हमसफ़र अपना। वो तो था ही नही कभी रहगुज़र अपना।। , तुमको मुबारक हो भीड़ इस दुनिया की। हम काट लेंगे तन्हा ही ये सफर अपना।। , भूल गए हो यक़ीनन तुम अपने वादे सारे। पर उदास रहता है वो गवाह शज़र अपना।। , न कोई मुन्तज़िर है न है कोई आहट तेरी। फिर भी सजाता है कोई क्यू घर अपना।। , ऐ बादल बरसों ऐसे भीगों डालो सबकुछ। की साहिल जलता बहुत है ये शहर अपना। @@@@RK@@@@ »

ऐसा क्यों है

ऐसा क्यों है

चारो दिशाओं में छाया इतना कुहा सा क्यों है यहाँ जर्रे जर्रे में बिखरा इतना धुआँ सा क्यों है शहर के चप्पे चप्पे पर तैनात है पुलिसिया फिर भी मचा इतना कोहराम सा क्यों है. मिलती है हरएक को छप्पर फाड़कर दौलत फिर भी यहाँ मरता भूख से इंसान सा क्यों है चारो तरफ बिखरी हैं जलसों की रंगीनियाँ फिर भी लोगों में इतना अवसाद सा क्यों है. हर कोई मन्दिर मस्जिद में जा पुण्य कमाता फिर भी बढ़ता यहाँ इतना पाप सा क्यों है... »

राघवेन्द्र त्रिपाठी

राघवेन्द्र त्रिपाठी

हर रास्ता हमसे तंग हुआ, हम फिर रास्ते की तलाश मे निकले , शजरो शजर की चाहत मे रास्ते महज इत्तेफाक निकले । ठहरे जहाँ पल भर को ब आजादी ब आबोताब , हमारी आबादी का जनाजा लेकर लोग सब बर्बाद निकले । वो इन्तजार मे था के धुन्ध छटे कोई अपना दिखे , रोशनी हुई तो चेहरे महफूज नकाब निकले । वो अपने ईमान पे अकड़ता रहा ताउम्र, कत्ले जमीर करके लोग सर उठा बेबाक निकले । मुद्दत गुजरी इक हमराह की चाहत मे , वीराने सब अस्बा... »

Dilo jajbaat per nazar rakhiye

दिलो ज्जबात पर नजर रखिये गुमशुदा कुछ ना हो ये खबर रखिये दिल ना टूटे ज्जबात भी नहीं चटके दिल की दहलीज पर यूँ नजर रखिये “ »

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