Chhattisgarhi Poetry

हमर डाक्टर दवा नही दारु देथे

हमर डाक्टर दवा नही दारु देथे

https://youtu.be/9q3bESm_cFo »

छत्तीसगढीया बघवा पीला मन दहाडेल सीखव रे

छत्तीसगढीया बघवा पीला मन दहाडेल सीखव रे

छत्तीसगढीया बघवा पीला मन दहाड़ेल सीखव रे »

//बेजा कब्जा// (नवगीत)

नाचत हे परिया गावत तरिया घर कुरिया ला, देख बड़े । सुन्ना गोदी अब भरे दिखे आदमी पोठ अब सब झंझट टूट गे सुन के गुरतुर गोठ सब नरवा सगरी अउ पयडगरी सड़क शहर के, माथ जड़े । सोन मितानी हे बदे, करिया लोहा संग कांदी कचरा घाट हा देखत हे हो दंग चौरा नंदागे, पार हरागे बइला गाड़ी, टूट खड़े । छितका कोठा गाय के पथरा कस भगवान पैरा भूसा ले उचक खाय खेत के धान नाचे हे मनखे बहुते तनके खटिया डारे, पाँव खड़े ।। .रमेश चौहान »

हमर जिनगी ल बनाये खातिर

हमर जिनगी ल बनाये खातिर

Cमोर महतारी अऊ मोर ददा कईसन मेहनत करत हे हमर जिनगी ल बनाये खातिर अपन सरीर ल भजथे भिनसहरे ले उठ के दुनो पानी कांजी भरत हे आट परसार अऊ खोर दुवार महतारी सब ल लिपत हे गरुआ भैंइसा के चारा दाना ददा के भरोसे हे गोरस दुह के वो बिचारा दू पइसा म बेचत हे अपन शउख के बलि देके हमर बर पइसा जोरत हे हम पढ़ लिख जाबो कुछ बन जाबो इहि सोच के मरत हे बासी पसिया खा के ददा खार म जांगर पेरत हे घाम छाह अऊ बादर पानी सबो म नां... »