शहीदी काव्य प्रतियोगिता

“शहीदों” की “शहीदी”

हुए बहुत लोग शहीद मेरे देश को बचाने को, पर उन “शहीदों” की “शहीदी” आज खुद शहीद सी लगती है। देश में हो रहे हंगामो में खुद कही गुम सी लगती हैं। जिस दिन औरत-आदमी का सामान अधिकार हो जायेगा, यकीन मानो उस दिन “शाहिदो” की “शाहीदी” को सलाम हो जायेगा।।।। जिस दिन निर्भया जैसी लडक़ी सरेआम बेआबरू होने से बच जायेगी, उसी दिन मेरे देश की शाहिदो की शाहीदी अमर हो जायेग... »

आओ कर दे हम आजादी भगत सिंह के नाम |

अंग्रेज रूपी कंश हेतु वह तो कृष्ण कलेवर था , करतूश को भोजन माना फंशी को जेवर था , वतन के लिये डर न पाया जेल की काली रातो से, उसका वर्णन करू मैं कैसे कलम की अपनी बातो से , दे दी हमें आजादी लेकर खुद पर वो अंजाम , आओ कर दे हम आजादी भगत सिंह के नाम | »

शहीद

शहीद

जब जब भारत के इतिहास के पन्ने पलटे जायेंगे, भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु के नाम भी लिए जायेंगे ! ये वो हैं जिन्होंने अंग्रेजों की ईंट से ईंट बजा दी थी, भारत माँ के लिये अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी !! माह सितंबर पंजाब में एक वीर ने जन्म लिया था, अंग्रेजों के अत्याचारों का बोझ उसने कम किया था ! अंग्रेजों के साथ इन्होंने खून की होली खेली थी, भारत माता की जय हो ये ही उनकी तब बोली थी !! सुखदेव,आजाद,राजगु... »

शहीद

शहीद

जब जब भारत के इतिहास के पन्ने पलटे जायेंगे, भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु के नाम भी लिए जायेंगे ! ये वो हैं जिन्होंने अंग्रेजों की ईंट से ईंट बजा दी थी, भारत माँ के लिये अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी !! माह सितंबर पंजाब में एक वीर ने जन्म लिया था, अंग्रेजों के अत्याचारों का बोझ उसने कम किया था ! अंग्रेजों के साथ इन्होंने खून की होली खेली थी, भारत माता की जय हो ये ही उनकी तब बोली थी !! सुखदेव,आजाद,राजगु... »

माँ के लाल

भगत सिंह, शिव राज गुरु, सुखदेव सभी बलिदान हुए, इस धरती माँ की खातिर कितने ही अमर नाम हुए, ब्रिटिश राज की साख मिटाने को एक जुट मिटटी के लाल हुए, कभी सीने पर गोली खाकर कभी फांसी पर लटक काल के गाल हुए, इंकलाब के नारों से भगवा रंग मिलकर लाल हुए, तिरंगे को लहराने की चाहत में शहीद माँ के लाल हुए॥ राही (अंजाना) »

शहीदों की होली

शहीदों की होली

“एक ये भी होली है एक वो भी होली थी जो शहीदों ने खेली थी, देश को आज़ाद कराने की ख़ातिर…मेरी कविता 23 मार्च पर शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों को नमन करती है…..” रंगों का गुबार धुआँ बन कर, उठ रहा है मेरे सीने में……………. वो रंग जो ‘आज़ादों’ ने भरा था, आज़ादी की जंग में, वो रंग जो निकला था आँखों से, चिनगारी में, वो रंग जिससे लाल हुई थी, भारत माता, इन्हीं रंगों का ... »

उनके सपनों का भारत

उनके सपनों का भारत

वज़न उठता नहीं तुमसे दो मण भी कहां गई शक्ति तुम्हारे यौवन की और कहां है अभिव्यक्ति तुम्हारे मन की।   चलो ये वज़न तो तुम भारी कह सकते हो इससे इंकार भी कर दो तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन तुम तो वो वज़न भी उठाने को तैयार नहीं जो होता है देश के प्रति कुछ प्रण का और जो दायित्व है तुम्हारे इस युवानपन का।   उन्होंने तो अपना बलिदान देकर तुम्हें ये भारत सोंपा लेकिन तुमने कितना योगदान देकर देश के बारे में ... »

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