शहीदी काव्य प्रतियोगिता

सरहद के शहीद

वीर थे अधीर थे सरहद के जलते नीर थे, इस देश के लिए बने तर्कश के मानो तीर थे, भगतसिंह राज गुरु सहदेव ऐसे धीर थे, बारूद से भरे हुए ये जिद्दी मानव शरीर थे। इंकलाब से हिलाये दिए अंग्रेज चीर थे, स्वतंत्रता संग्राम में फूँके सहस्र शीष थे, इतिहास के पटल पे छोड़े स्वर्णिम प्रीत थे, तिरंगे में लिपटके बोले वन्दे मातरम् गीत थे।। राही अंजाना »

शहीदों को नमन

नमन आज़ादी के परवानों का। वंदन क्रांति वीर जवानों का।। भगत, सुखदेव क्रांति वीरों के, इंक़लाब का डंका बजता था। ‘तिलक’ के विचारों का तिलक, राजगुरु के भाल सजता था। आज़ाद भारत का सपना, दिलों में इनके बसता था। स्वराज के अधिकार को पाना, ख़्वाब आज़ादी के अरमानों का। नमन आज़ादी के परवानों का। वंदन क्रांति वीर जवानों का।। अंग्रेजी हुकूमत हिला डाली, क्रांतिकारियों की टोली। फिरंगी डर से कांपते, स... »

अभियान नवगीत “

अभियान नवगीत ” ———————— बांधे सर पे मस्त पगड़िया राह कठिन हो,चलना साथी दुराचार ख़तम करने अब उतार चलो काँधे की गाँती आन ,बान और शान हमारे अच्छे- सच्चे हैं वनवासी दिलों – दिलों को दर्द बताने महफिल – महफिल खड़ी उदासी आँखें भर – भर उठती हैं मां जब अपनी कहर सुनाती बांधे सर पे ……………. जोते – बोये ,कोड़... »

Martyr’s Day Contest: Reply to Saavan team’s request

Dear All, This is in reply to Saavan team’s request to share the ways I used for promotions of my poem for Martyr’s Day Contest.  It was a joint effort of me, my daughter and my younger brother. I run a personal blog by the name – Jeevan Dhara, which has an active viewership of 5k people and also, I am an active contributor to various fb poetry pages. For the contest, I tried to ... »

Dear Saavan Team, I wanted to take a moment to extend my most sincere thanks for choosing my poem first in martyr contest. I received a message regarding 2.2k like on my poem. I want to assure all of you there is full transparency. I am research scholar in BHU where approx 35k studetns.So it is possible. Hope you understand it. I also extend my thanks to all BHU students and others for liking and ... »

शहीदी

शहीदी

लगे मैले हर साल, मालायें भी पहनायी फूलों की पथरायी मूर्तियों को कई बार मगर पत्थर की मूरत कभी मुस्कुराई नहीं कभी एक भी बार पता नहीं क्यों!     Please like & share my poem »

कैद आजादी

कैद अपने ही घरों में हमारी आजादी रही थी, सूनी परिचय के बिन जैसे कोई कहानी रही थी, आसमाँ खाली रहा हो परिंदों की मौजूदगी के बगैर, कुछ इसी तरह मेरे भारत की जवानी रही थी, हिला कर रख देने में फिर वजूद ब्रिटिश सरकार के पीछे, तब भगत सिंह और राज गुरु संग कई क्रांतिकारियों की कुर्बानी रही थी॥ राही (अंजाना) »

शहीदी

कुछ मेरी औकात नहीं , कि तुझ पर कलाम चलाऊं मैं कुर्बानी तेरी करे बयां , वो शब्द कहाँ से लाऊं मैं नाम तेरा लेने से पहले पलकों को झपकाउं मैं भूल गए जिन पन्नो को हर्फ़ों से आज सजाऊँ मैं जब भारत माँ का आँचल लगा चीर-चीर होने गोरे बसने आये जैसे नागिन आयी हो डसने जब भारत का सूरज भी त्राहिमाम चीखा था तब खटकड़ में एक सिंहनी की कोख से सूरज चमका था भारत माँ बोली कि मैं गद्दारों पर शर्मिंदा हूँ चीख पड़ा सरदार माँ... »

शहीदों की होली

शहीदों की होली

“एक ये भी होली है एक वो भी होली थी जो शहीदों ने खेली थी, देश को आज़ाद कराने की ख़ातिर…मेरी कविता 23 मार्च पर शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों को नमन करती है…..” रंगों का गुबार धुआँ बन कर, उठ रहा है मेरे सीने में……………. वो रंग जो ‘आज़ादों’ ने भरा था, आज़ादी की जंग में, वो रंग जो निकला था आँखों से, चिनगारी में, वो रंग जिससे लाल हुई थी, भारत माता, इन्हीं रंगों का ... »

शहीद हुए मतवाले

। भगत सिंह और राजगुरु के संघर्षों बलिदानों की, ये धरती है वीर बहादुर चौड़ी छाती वालों की, ब्रिटिश राज को धूमिल कर मिट्टी में मिलाने वालों की, माँ के आँचल को छोड़ तिरंगे की शान में मिटने वालों की, ये कविता नहीं कहानी है उन माँ के प्यारे लालों की, खोकर अपनी हस्ती को भी अमर हुए जवानों की, झुककर नमन करने फिर आँखों में अश्रु आने की, लो फिर से आई है बेला याद करें हम, देश की खातिर लड़ते लड़ते जो शहीद हुए उन ... »

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