शहीदी काव्य प्रतियोगिता

Martyr’s Day Contest: Reply to Saavan team’s request

Dear All, This is in reply to Saavan team’s request to share the ways I used for promotions of my poem for Martyr’s Day Contest.  It was a joint effort of me, my daughter and my younger brother. I run a personal blog by the name – Jeevan Dhara, which has an active viewership of 5k people and also, I am an active contributor to various fb poetry pages. For the contest, I tried to ... »

Dear Saavan Team, I wanted to take a moment to extend my most sincere thanks for choosing my poem first in martyr contest. I received a message regarding 2.2k like on my poem. I want to assure all of you there is full transparency. I am research scholar in BHU where approx 35k studetns.So it is possible. Hope you understand it. I also extend my thanks to all BHU students and others for liking and ... »

शहीदी

शहीदी

लगे मैले हर साल, मालायें भी पहनायी फूलों की पथरायी मूर्तियों को कई बार मगर पत्थर की मूरत कभी मुस्कुराई नहीं कभी एक भी बार पता नहीं क्यों!     Please like & share my poem »

कैद आजादी

कैद अपने ही घरों में हमारी आजादी रही थी, सूनी परिचय के बिन जैसे कोई कहानी रही थी, आसमाँ खाली रहा हो परिंदों की मौजूदगी के बगैर, कुछ इसी तरह मेरे भारत की जवानी रही थी, हिला कर रख देने में फिर वजूद ब्रिटिश सरकार के पीछे, तब भगत सिंह और राज गुरु संग कई क्रांतिकारियों की कुर्बानी रही थी॥ राही (अंजाना) »

शहीदी

कुछ मेरी औकात नहीं , कि तुझ पर कलाम चलाऊं मैं कुर्बानी तेरी करे बयां , वो शब्द कहाँ से लाऊं मैं नाम तेरा लेने से पहले पलकों को झपकाउं मैं भूल गए जिन पन्नो को हर्फ़ों से आज सजाऊँ मैं जब भारत माँ का आँचल लगा चीर-चीर होने गोरे बसने आये जैसे नागिन आयी हो डसने जब भारत का सूरज भी त्राहिमाम चीखा था तब खटकड़ में एक सिंहनी की कोख से सूरज चमका था भारत माँ बोली कि मैं गद्दारों पर शर्मिंदा हूँ चीख पड़ा सरदार माँ... »

शहीदों की होली

शहीदों की होली

“एक ये भी होली है एक वो भी होली थी जो शहीदों ने खेली थी, देश को आज़ाद कराने की ख़ातिर…मेरी कविता 23 मार्च पर शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों को नमन करती है…..” रंगों का गुबार धुआँ बन कर, उठ रहा है मेरे सीने में……………. वो रंग जो ‘आज़ादों’ ने भरा था, आज़ादी की जंग में, वो रंग जो निकला था आँखों से, चिनगारी में, वो रंग जिससे लाल हुई थी, भारत माता, इन्हीं रंगों का ... »

शहीद हुए मतवाले

। भगत सिंह और राजगुरु के संघर्षों बलिदानों की, ये धरती है वीर बहादुर चौड़ी छाती वालों की, ब्रिटिश राज को धूमिल कर मिट्टी में मिलाने वालों की, माँ के आँचल को छोड़ तिरंगे की शान में मिटने वालों की, ये कविता नहीं कहानी है उन माँ के प्यारे लालों की, खोकर अपनी हस्ती को भी अमर हुए जवानों की, झुककर नमन करने फिर आँखों में अश्रु आने की, लो फिर से आई है बेला याद करें हम, देश की खातिर लड़ते लड़ते जो शहीद हुए उन ... »

वो माटी के लाल

वो माटी के लाल

वो माटी के लाल हमारे, जिनके फौलादी सीने थे, अडिग  इरादो ने जिनके, आजादी के सपने बूने थे, हाहाकार करती मानवता, जूल्मो-सितम से आतंकित थी जनता, भारत माता की परतंत्रता ने उनको झकझोरा था, हँसते-हँसते फाँसी के फँदे को उन्होंने चूमा था, वो माटी के लाल हमारे, राजगुरू, सुखदेव,भगतसिंह , जैसे वीर निराले थे , धधक रही थी उनके, रग-रग में स्वतंत्रता बन कर लहू, वो दीवाने थे, मतवाले थे, भारत माता के, आजादी के परवा... »

“शहीदों” की “शहीदी”

हुए बहुत लोग शहीद मेरे देश को बचाने को, पर उन “शहीदों” की “शहीदी” आज खुद शहीद सी लगती है। देश में हो रहे हंगामो में खुद कही गुम सी लगती हैं। जिस दिन औरत-आदमी का सामान अधिकार हो जायेगा, यकीन मानो उस दिन “शाहिदो” की “शाहीदी” को सलाम हो जायेगा।।।। जिस दिन निर्भया जैसी लडक़ी सरेआम बेआबरू होने से बच जायेगी, उसी दिन मेरे देश की शाहिदो की शाहीदी अमर हो जायेग... »

आओ कर दे हम आजादी भगत सिंह के नाम |

अंग्रेज रूपी कंश हेतु वह तो कृष्ण कलेवर था , करतूश को भोजन माना फंशी को जेवर था , वतन के लिये डर न पाया जेल की काली रातो से, उसका वर्णन करू मैं कैसे कलम की अपनी बातो से , दे दी हमें आजादी लेकर खुद पर वो अंजाम , आओ कर दे हम आजादी भगत सिंह के नाम | »

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