मुशायरा

मुशायरा 1

मुशायरा 1

मुशायरा महीन अहसासों को बुनता हुआ, अल्फ़ाजों को सहजता हुआ एक ऐसा कारवां है जहां हर शख्स, हर शब्द अपने वजूद को महसूस करता है| यहां कुछ ऐसा ही कारवां बन जाये तो क्या बात हो| इसके लिये आपके सहयोग व योगदान की जरूरत होगी; उम्मीद है यह कारवां बढता ही जायेगा, अहसासों के साथ…आसमां से भी आगे| आगाज करने वाली पंक्ति: लफ़्ज कभी खत्म ना हो, बात से बात चले मैं तेरे साथ चलूं, तू मेरे साथ चले| मुशायरे का विजेता ... »