मातृ दिवस

मां

खामोशी को समेटकर कुछ अल्फाजो का पिटारा लाया हूं, उस ख़ुदा से भी बढ़कर है वो जिसके बारे में आपको कुछ बताने आया हूं। उसकी हिदायतों से मैने जिंदगी के हर रंग में रंगना सीखा है, उसका आशीर्वाद पाकर हर चुनौती से लड़ना सीखा है। हमारी छोटी सी चोट को देखकर ही बड़ी आसानी से रो देती है, शायद इसलिए हर इंसान के लिए उसकी मां भगवान से भी बढ़कर होती है। वो मुझे जानती थी भी नहीं थी जब नौ महीने उसने मुझे अपनी कोख मे... »

माँ की गाली Mother’s Day से पुरानी है,

मुझे पता है , माँ की गाली Mother’s day से पुरानी है, Matricide का केस Charles Lamb जैसे की फैमिली में भी हो सकता है, दूसरे की माँ ,माँ नहीं एक औरत हो जाती है.. मैं जानता हूं, माँ के इतिहास में एक लड़की भी आती है, संज़ीदगी और swagger भी , इश्क़ और हुस्न के कश्मश , ख़्वाहिशों का जमघट, रिवायत भी ,बग़ावत भी… मन में आता है, तुम्हारे sacrfices को सलाम कर , मातृत्व ख़ातिर स्त्रीत्व के गला घोंटने को... »

झुर्रियां

उस दिन घर पर, कंघी में पहले से उलझे काले लंबे बालों के बीच दो -चार सफ़ेद बालों को देखकर झटका-सा लगा .. तुरंत, आँगन में आकर माँ के चेहरे पर गौर किया देखा ,झुर्रियाँ दस्तक दे चुकी हैं … तभी महसूस हुआ कि माँ की उम्र बुढ़ापे की दहलीज़ पर पग रख दी है.. मैं वहीं का वहीं ठिठक गया चेहरा भी उतर गया .. इसी बीच, माँ मुझे कंघी के संग सफ़ेद बालों को जकड़े हुए देख लीं। मुझे निहारते हुए, नजदीक आकर ,पुचकारत... »

तुम कब आओगी

शाम हो गई तुम्हे खोजते माँ तुम कब आओगी जब आओगी घर तुम खाना तब ही तो मुझे खिलाओगी, रात भर न सो पाई करती रही तुम्हारा इंतजार सुबह होते ही बैठ द्वार निगाहें ढूंढ रही तुम्हे लगातार, पापा बोले बेटा आजा अब माँ न वापिस आएगी अब कभी भी वह तुम्हे खाना नहीं खिलाएगी, रूठ गई हम सब से मम्मी ऐसी क्या गलती थी हमारी छोड़ गई हम सबको मम्मी ऐसी क्या खता थी हमारी, ढूंढ रही हर पल निगाहे न जाने कब मिल जाओगी इक आस लिए दि... »

जब मैं तुम्हे लिखने चली

जमाने में रहे पर जमाने को खबर न थी ढिंढोरे की तुम्हारी आदत न थी अच्छे कामों का लेखा तुम्हारा व्यर्थ ही रह गया हमसे साथ तुम्हारा अनकहा सा कह गया जीतना ही सिखाया हारने की मन में न लाने दी तो क्यों एक पल भी जीने की मन में न आने दी हिम्मत बांधी सबको और खुद ही खो दी दूर कर ली खुदा ने हमसे माँ कि गोदी दिल था तुम्हारा या फूलों का गहना अब जुदाई को तुमसे सदा ही सहना रोता रहा दिल आँखों ने साथ न दिया फैसले क... »

इतने हैं तेरे रूप के मैं सबको गिना नहीं पाउँगा,

इतने हैं तेरे रूप के मैं सबको गिना नहीं पाउँगा, खोल कर रख दी पल्लू की हर एक गाँठ तुमने, मैं तुम्हारे प्रेम का किस्सा सबको सुना नहीं पाउँगा, डर कर छिप जाता था अक्सर तेरे पीछे,, आज इस भीड़ में भी मैं तुझको भुला नहीं पाउँगा।। राही (अंजाना) »

जो ऊँगली पकड़ चलाती है

जो ऊँगली पकड़ चलाती है, जो हर दम प्यार लुटाती है, जो हमको सुलाने की खातिर, खुद भूखी ही सो जाती है, खेल खिलौने कपड़े लत्ते जो हमको दिलवाती है, खुद एक ही साड़ी में जो सारा जीवन जीती जाती है, अपने सपनों को तज कर जो हमको सपने दिखलाती है, कोई और नहीं कोई और नहीं वो बस एक माँ कहलाती है॥ राही (अंजाना) »

माँ की दुआ

माँ हो साथ मेरे तो दुआ भी साथ देती है जब तक हाथ सर पे है खता भी साथ देती है जाने क्या असर है माँ के हाथो में खुदा जाने ममता से खिला दे तो दवा भी साथ देती है कुछ भी हो नही सकता भले तूफान हर सू हो माँ जब सामने हो तो हवा भी साथ देती है फैलेगीं हवाओं में बहारें इस कदर तेरे माँ के साथ होने से फ़िजा भी साथ देती है रहमत जान ले तू भी ‘लकी’ माँ की दुआओं की सर पे हाथ रखते ही कजा भी साथ देती है »

माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फिर नहीं दोहराउंगी…

माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फिर नहीं दोहराउंगी मैं अपने बेटों को औरत की इज़्ज़त करना सिखाऊंगी माँ,मैं तुम्हारी गलतियों को फ़िर नहीं दोहराउंगी औरत होने का मतलब डरना नहीं मैं अपनी बेटियों को सिखाऊंगी माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फिर नहीं दोहराउंगी मैं अपने बच्चों को आत्म निर्भर बनना सिखाऊंगी जीवन का मतलब सिर्फ़ बिताना नहीं जीवन अमूल्य हैं, उन्हें समझाऊँगी, माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फ़िर नहीं दोहराउंग... »

माँ

तू जो होती माँ मैं कभी ना रोती माँ मैं भी स्कूल में सबके साथ तेरे बनाए पराठे खाती..माँ सब बच्चो की तरह मैं भी ठहाके लगाती..माँ तू जो होती माँ मैं कभी ना रोती.. माँ जब भैय्या मुझे चिढ़ाते तुम उसे डाँटती..माँ मेरी पढ़ाई के लिए पापा से तुम,लड़ जाती..माँ तु जो होती माँ मैं कभी न रोती माँ मेरा बचपन खिल जाता तेरा प्यार जो मिल जाता माँ तु जो होती माँ मैं कभी ना रोती माँ ज़िंदगी इतनी दुश्वार ना होती अगर तू हो... »

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