मातृ दिवस

MAAF KARNA ASIFA

सिर्फ एक तसवीर है , एक चेहरा है जानता नहीं हूँ कि कौन थी वो , पर आँखों में नूर देख यकीन से कहता हूँ कि जो भी थी , जैसी भी थी अच्छी थी वो , गैरों के हाथ पकड़ साथ चल पड़ी रूह से पाक दिल से सच्ची थी वो , इन्सानियत में छुपी हैवानियत देख न पायी हाँ अभी अकल से कच्ची थी वो , लेकिन तुम तो सियाने थे , पढ़े -लिखे थे , मासूमियत ही देख लेते शैतानो ! आठ साल की नन्ही बच्ची थी वो । लेकिन गलती उसी की थी ग़ैर -हिन्दू ... »