नया साल

कहानी – हर साल की

जनवरी आता है , नयी उम्मीदों को पंख लगाता है, फरवरी फर्र फर्र न जाने कब बीत जाता है , मार्च सुहाना मौसम लेकर आता है, उम्मीदों को परवाज देते देते पहला तिमाही गुजर जाता है। अप्रैल में चहुँओर फूल खिल जाते है , मई में सूरज देवता आग बरसाते है , जून का महीना पसीना पोछने में बीत जाता है, आधा साल यूँ ही रीत जाता है। जुलाई में रिमझिम मानसून बरसता है , अगस्त में नदी – नालो में उफान होता है , सितम्बर नय... »

नव

नव

नभ के अरुण कपोलों पर, नव आशा की मुस्कान लिए, आती उषाकाल नव जीवन की प्यास लिए, दिनकर की अरुणिम किरणों का आलिंगन कर, पुष्प दल मदमस्त हुए,डोल रहे भौंरे अपनी मस्ती में, मकरन्द का आनंद लिए, नदियों के सूने अधरों पर ,चंचल किरणें भर रहीं , नव आकांक्षाओं का कोलाहल, जीव सहज हीं नित्य नवीन​ आशाओं के पंख लगाकर भरते उन्मुक्त गगन में स्वपनों की उड़ाने, नये-नये नजरिए से भरते जीवन में नव उन्माद सारे , चकित और कोर... »

Naya saal

नये साल की पवन बेला पर पहुचे तुम्हे बधाई.. देश प्रेम है धर्म हमारा,हम सब हैं भाई भाई .. मान और सम्मान बढे,जीवन हो श्रेष्ठ शिखर पर.. मानवता हो कर्म हमारा,हर जाती धर्म से बढ़कर.. भेद भाव और छुआ छूत का नाम ना हो वसुधा पर .. हिन्दू मुसलिम सब साथ रहे, देश बढे उन्नति के पथ पर .. आपस में हम गले मिले है रूत मिलने की आई .. देश के कोने कोने में नारी को अब सम्मान मिले .. हर बाला लक्ष्मी बाई हो, हर बेटी को शिक... »

नया साल

नया साल

पल महीने दिन यूँ गुजरे, कितने सुबह और साँझ के पहरे , कितनी रातें उन्नीदीं सी, चाँदनी रात की ध्वलित किरणें, कितने सपने बिखरे-बिखरे, सिमटी-सिमटी धुँधली यादें, कुछ कर जाती हैं आघाते , कभी सहला ,कर जातीं मीठी बातें, हौले-हौले साल यूँ गुजरा, जाते-जाते रूला गया, नये साल की नयी सुबह से, दामन अपना छुड़ा गया, कितने सपने दिखा गया । नये साल की नयी सुबह के , दहलीज पर आ गए हम, अनगिनत उम्मिदें बाँध खड़े हम, कित... »

नया साल

ये नये साल का मौसम भी खुशगवार नही ऐसा लगता है मुझे अब किसी से प्यार नही कई सालो से मुझे ग़म बहुत सताते है कई सालो से मेरे साथ में ग़मख्वार नही जान दे दूँ उसे तोहफे में नये साल को मै उससे मिलने के मगर कोई भी आसार नही बदलते साल से तो ज़ख्म नही भरते है और फिर मै भी पिघल जाऊं वो लाचार नही बहुत जल्दी से गुजरता है यहाँ हर साल और कदमों में मिरे पहली सी रफ्तार नही खरीद लूँ मै ‘लकी’ इक खुशी तेर... »

कविता

नव वर्ष आया,नील गगन मे नव सुरभि बिखराया। शीतल शीतल ये हवाए,कह रही है खुशियॉ आया। »

नया साल और मेरा प्यार

अब तो तुम मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो, मोहब्बत का सफर नये साल पे छोड़ दो ! आने लगी है प्यार की खुश्बू मेरे शर्ट से , जो मुझसे न हो उस सवाल पे छोड़ दो !! राह से गुजरने वाली को बेतहाशा देखते हैं, मेरी बर्बादी का कुछ लोग तमाशा देखते हैं ! स्वप्न का मेरा महल अब खंडहर हो गया है, इन्तजार करते अब शाम से सहर हो गया है !! हर रात मेरे सपने में तुम यूँ आया न करो, खामखाँ मेरा दिल तुम यूँ दुखाया न करो ! कैसे बताउँ त... »

नव वर्ष आने को है

नव वर्ष आने को है, कुछ भुलाने को है कुछ याद दिलाने को है, सच कहूँ तो बहुत कुछ सिखाने को है, छुप गई थीं जो बादल के पीछे कहीँ, उन उम्मीदों से पर्दा हटाने को है, नया वर्ष आने को है, सपनों की हकीकत बताने को है, नए रिश्तों के चेहरा दिखाने को है, टूट गई थी कभी जो राहें कहीँ, उन राहों पर पगडण्डी बनाने को है, नव वर्ष आने को है, उड़ने को काफी नहीं पंख देखो, हौंसलो के घने पंख फैलाने को है, बीती बातों का आँगन... »

नव वर्ष

आया है नव वर्ष साथ लाया है नई उम्मीदें नया हर्ष »

नव वर्ष आई

गुजं उठी चहू दिश नव वर्ष की नव शहनाई। करवट बदलती आसमां पे छाई, नव किरण लै पुरवाई आई। उमंगों भरा उत्सव गीत आज, चहकती चहचहाती चिडि़यों ने गाई। नव वर्ष देख बागों की, खिल उठी मादक पुष्पाई। रवि लिये नया सबेरा, स्वर्णिम किरण बिखराई। नव वर्ष आई- नव वर्ष आई, गुजं उठी नव शहनाई। योगेन्द्र कुमार निषाद ,घरघोड़ा ( छ.ग.) »

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