Barbarta

Barbarta

Note: एक छोटी सी कविता यह दर्शाते हुए की किस तरह एक भीड़ दंगो का रूप ले लेती है और कौन उसे इतना भड़काता है


बर्बरता


वोह बोले हमसे वार करो,

न चुप बैठो प्रहार करो,

जो औरत, बूड़े, बच्चे आये,

टूकड़े तुम हज़ार करो ।

आतंकी रथ सवार करो,

और मृत्यु का प्रचार करो,

यमलोक भी थर-थर कांप उठे,

ऐसा भीषण नरसंहार करो ।

असुरो को त्यार करो,

और मानवता की हार करो,

धरती का धड़ चीर-फाड़ के,

नर्क का तुम आविष्कार करो ।

विवेक का भहिष्कार करो

बर्बरता का विस्तार करो

सत्ता पर हम जड़े जमा लें,

सपना तुम साकार करो ।

-पियूष निर्वाण


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 
यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|
 

Related Posts

8 Comments

  1. Profile photo of Megha Trivedi

    Megha Trivedi - June 7, 2016, 9:53 pm

    Awesome 🙂

  2. Profile photo of Alok Kumar

    Alok Kumar - June 7, 2016, 8:59 pm

    behtareen piyush ji

  3. Profile photo of Pritam Chaturvedi

    Pritam Chaturvedi - June 7, 2016, 8:50 pm

    nice one …

  4. Profile photo of Raj Kumar

    Raj Kumar - June 7, 2016, 3:46 pm

    Bahut khoob piyush ji 🙂

Leave a Reply