Yogi Nishad, Author at Saavan's Posts

जवां धडकनो को धड़कने दो यारों

//ग़ज़ल// जवां धडकनो को धड़कने दो यारों। जरा आशिकी औऱ बढ़ने दो यारों।१ महकता रहे गुल चमन प्यार का ही, फि़जा रुत सुहानी बहकने दो यारों ।२ करें प्यार इतना …समन्दर से गहरा, मुहब्बत जरा और …बढ़ने दो यारो।३ सवरता रहे …..प्यार दोनों दिलो मे, इशारों इशारों मे….. कहने दो यारों।४ कसम है सदा…. प्यार करते रहेंगें, वफा कर वफाई ..दिखाने दो यारो।५ जले गर जमाना जलने दो “योगी&... »

आदमी में घमंड इस कदर हैं चढ़ा

आदमी में घमंड इस कदर हैं चढ़ा।, छोड़ इंसानियत,खुन……. बहाता रहा। हौसला रंजिशों का ….बढ़ा हर तरफ । माँ बहन से न रिस्ता …..न नाता रहा।, खाब को क्या कहूँ?, नींद भी डर गया , हर जगह कत्ल का ….काम बढ़ता रहा। पैतरा साजिशों का ……….सरेआम है, आदमी गिरके ही, खुद …..गिराता रहा। खुद ही “योगी” सभल जा, राह में आग है, चाँदनी रात में, चाँद है …... »

“मैं ढूंढता रहा”

“मैं ढूंढता रहा” :::::::::::::::::: मैं ढूंढता रहा, उस शून्य को, जो मिलकर असंख्य गणना बनते । मैं ढूंढता रहा , उस गाथा को , जिस की अमर प्रेम हर दिशाओं में गूंजते । और मैं ढूंढता रहा , उस मेघ चंचल मन को जो अमृत बन वर्षा है करते । मैं ढूंढता रहा , उस पवन को जो कलियों की महक ले उन्मुक्त बिचरते । मैं ढूंढता रहा , उस बावरी चंचल मन को , जो मन में बसा प्रीत है करते । अंततः मैं ढूंढता रहा स्वयं... »

हे!री सखी कैसे भेजूं

“गीत” :::::::::::: हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। दूर देश विदेश भय हैं वो मन का मेरे प्रिय साजन। हे! री सखी कैसे करू मै, स – श्रृंगार मन यौवन। हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। सावन आ कर बहक गया, दामनि लगे है मोहे डरावन। हे! री सखी कैसे पाऊँ मै, साजन का वो प्रिय आलिंगन। हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। जब – जब देखूं मैं दर्पण होता मन ... »

मेरें दामन मे दर्द का सिलसिला है

वज़्न – 122 122 122 122 अर्कान – फऊलुन फऊलुन फऊलुन फऊलुन बह्र – बह्रे मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम काफ़िया – आ (स्वर) रदीफ- है। मेरें दामन मे दर्द का सिलसिला है। रहा हर सफ़र जिन्दगी की सज़ा है। वफा जिन्दगी भर किया धड़कनों का, न जीना सका मैं, न आया मजा हैं। कदम जब मेरा हौंसला कर उठा तो, ड़गर साँस, काटें चुभाता सदा है। जिधर देखता हूँ उधर नफरतें है, मुहब्बत पे अब और पहरा लगा है। फ़ि... »

गीत

“गीत” :::::::::::: हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। दूर देश विदेश भय हैं वो मन का मेरे प्रिय साजन। हे! री सखी कैसे करू मै, स – श्रृंगार मन यौवन। हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। सावन आ कर बहक गया, दामनि लगे है मोहे डरावन। हे! री सखी कैसे पाऊँ मै, साजन का वो प्रिय आलिंगन। हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। जब – जब देखूं मैं दर्पण होता मन ... »

नयन अश्कों से भिगोता रहा हूं मैं जिन्दगी भर

नयन अश्कों से भिगोता रहा हूं मैं जिन्दगी भर । गजल उनको ही सुनाता रहा हूं मैं जिन्दगी भर । दरख्ते उम्मीद अब है कहां लगतें तेरे जमी पर रकीबों सा अब तड़पता रहा हूं मैं जिन्दगी भर। दुआओं का रुख बदलता रहा ताउम्र,गिरगिटों सा, मुबारक फिर भी से करता रहा हूँ मैं जिन्दगी भर। फ़िकर अब किसको रहा है जमाने में देख दिलवर, दरद अपनी अब भुलाता रहा हूं मैं जिन्दगी भर। मुकद्दर भी कब सही था हमारा इस दौर “योगी... »

कदम दर कदम मै बढाने चला हूँ।

कदम दर कदम मै बढाने चला हूँ। सफर जिन्दगी का सजाने चला हूंँ। खुशी-ए-जमाना तुझे सौप कर मैं, सफल जिन्दगी को बनाने चला हूँ। मुहब्बत से ज़्यादा ये कुछ भी नही है, ग़ज़ल प्यार मैं गुनगुनाने चला हूँ। दिखा दो वफाई वफा कर सनम तू, दिलो मे तुझे अब बसाने चला हूँ। पिछा रौशनी का रहा है जहाँ पे, तुफानों मे दीया जलाने चला हूँ। मुखातिब तराना बनाना तु “योगी”, भजन जिकड़ी अब लगाने चला हूँ। योगेन्द्र कुमार ... »

प्यार का इज़हार होने दीजिए

प्यार का इज़हार होने दीजिए। गुल चमन गुलजार होने दीजिए। खास हो एैसा ही, कोई पल दे दो, वक्त को हम – राज होने दीजिए। हो सदा वचनों में इक नव सादगी , प्यार काे अनुराग होने दीजिए। कर करम एैसा भी कोई तो यहां, मसखरा अब तुम न होने दीजिए। दिल मिले हसरत हे योगेन्द्र मेरी हो सके तो प्यार होने दीजिए। योगेन्द्र कुमार निषाद घरघोड़ा,छ०ग० 7000571125 »

मुक्तक

प्यार का इज़हार होने दीजिए। गुल चमन गुलजार होने दीजिए। खास हो एैसा ही, कोई पल दे दो, वक्त को हम – राज होने दीजिए। योगेन्द्र कुमार निषाद घरघोड़ा ,छ०ग० »

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