Yogi Nishad's Posts

तस्वीर

इक तस्वीर है इस दिल के पास। फिर क्यु दिल है उदास – उदास।। माना की तु दुर है सदियों से मगर, तेरी यादे है मेरे दिल के आसपास।। वो लरजते होठो से मेरे गीतो का गाना, उन गीतो को आज भी है तेरी तलास।। “योगेन्द्र” देखना मिल जायेगी मोहब्बत, इसलिये तो दिल मे बसी है इक आस।। योगेन्द्र कुमार निषाद १०.०१.२०१८ »

बदलते हुए

चलते हुए कदमो के निशां को बदलते हुए देखा हमने। हर रिस्ते नातों को आज बदलते हुए देखा हमने। जो कभी टूट कर चाहा करती थी जमाने हमें, आज उसे ही छोड़ जमाने , जाते देखा हमने। मौसम तो वही है जो था फिजाओं मे कभी, पर मौसम का तेवर आज बदलते देखा हमने। कहते है ख्वाब ऊची रख्खों तो मंजिल भी ऊची होगी, पर अक्सर नींद संग ख्वाब टुटते देखा हमने। देख ली सारी जिन्दगी ,देख ली “योगी” कि दिल के अरमा को सरे राह... »

कविता

कविता ***************************** ये जीवन सरिता ,तुम युं ही बहते रहना। कल कल कर मधुर नांद सै बहते रहना। गर.. लाख मुस्किलें हो राहो मे पर भी, एक लक्ष्य बना ,और आगे बडते रहना । गर ठहरे पल भर को कहीं, रह जाओगें बंध कर वही कें वही। ठान लो समय अनुरुप बढ़ना है आगे, सोच, यही मंजिल तो होगी कही न कही। तुम सघर्ष से घबराकर, कही पथ भ्रष्ट न हो जाना। यह सघर्ष ही जीवन है, इससे तुम कभी न डर जाना। निर्भय होकर स... »

एैसा श्रंगार कर

कुन्दन सा बदन को एैसा श्रृंगार कर । जो भाये पिया मन एैसा श्रृंगार कर । सरगम पे सुर नया कोई झंकार कर, जो गुंज उठे हर मन के द्वार द्वार पर। रीझाती सपनों को अपना सकार कर, जो तु बना सके बना ले जीत या हार कर। तारूण्य मन झुमे एैसा नयन वार कर, तडफे हर मन एैसा वशी मंत्र संचार कर। सावन बन प्रेम का रिमिझम फुहार कर, दु:ख का बोझ हो तो चल यही उतार कर। हुक की सरीता हो ह्रदय में फिर भी प्यार कर, यही सुरम्य है जी... »

एैसा श्रंगार कर

कुन्दन सा बदन को एैसा श्रृंगार कर । जो भाये पिया मन एैसा श्रृंगार कर । सरगम पे सुर नया कोई झंकार कर, जो गुंज उठे हर मन के द्वार द्वार पर। रीझाती सपनों को अपना सकार कर, जो तु बना सके बना ले जीत या हार कर। तारूण्य मन झुमे एैसा नयन वार कर, तडफे हर मन एैसा वशी मंत्र संचार कर। सावन बन प्रेम का रिमिझम फुहार कर, दु:ख का बोझ हो तो चल यही उतार कर। हुक की सरीता हो ह्रदय में फिर भी प्यार कर, यही सुरम्य है जी... »

एै रुपसी

भुज पे आई कहा से,एै रूपसी, नेह निश्छल निर्मल लिये प्यारी। स्वरों की हो,शायद तुम जादुगरी। रीझाती उर-उर तुम क्यों हमारी। तितली की सी लगती,होतुम बागो की, वादियों मे दहकने लगी,देख तुम्हे सुर्ख सुमन बावरी। री! तु कौन, क्यु तडफये शु-मन हमारी। »

दर्द

तेरी यादों का समन्दर कभी सुखता नही। आँखों में खुशी है मगर दर्द मिटता नही। चौमासें सावन सा बरसता गम है सीने में, जुदा-ए-सनम तुम बीन दिल अब लगता नही। लाख बोई फस्लें आरजुओं की दिल-ए-जमां पे, पर विरान -ए-दिल मे बहारें खुशीयॉ पलता नही। जिन्दगी के हर पहलू से गुजर देखा मैनें, जो प्यार तुमने दिया वो, कही अब मिलता नही। कहां ढुढूं तुमसा और प्यार तेरा सा……., तू तो लाखो में थी तुमसा कही अब मिलता न... »

एक योषिता

एक योषिता, नाम योगिता मनमोहक – मनहरण है उसकी रूप सुन्दरता। सागर की सी शूतलता, मेघों की सी चंचलता, बागों में इठलाती खेलती तितली सी, है उसकी सतरंगी छटा। एक योषिता – नाम योगिता। सपनो की है सेज सजाती, निशावर को नीस आकर जाती, माधवी राग मै चपके-चुपके, वह प्रेम गीत सुनाती। प्रकृति हो उन्मुक्त स्वरो की जादु से बहाती नव सरगम सरीता। एक योषिता – नाम योगिता। यक्ष कामनी देख शरमाएँ, स-स्पर्श स... »

मुक्तक

मुक्तक दस्तक क्युँ करते हो बार बार, बिहड़ मन उपवन के सुने द्वार। न छेड़ो प्रेमागम की तार को, चुभत है दिल पे इनकी झनकार। »

कविता

ऐ चाँदनी रीतें तुम__ युँ ही एैसे ही रहना। टिमटिमातें -जगमगीतें, झिलमिल सपना तुम लाना। हलकी – हलकी, शीतल – शीतल, पुरवाईयों का तुम संग बहना। इक चॉह जगा देती है……, सागर मे हो पानी जीतना। महकी-महकी अधखीली कलियों संग, रातों मे तुम-का बातें करना। सुमनों का खुशबु बिखरीना। और कहना है फुलो का, तुमसा नही कोई जग मे, तुम अम्बर का हो गहना। एै चाँदनी रातें……एैसे ही रहना। »

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