Yogesh Chandra Goyal, Author at Saavan's Posts

आफत की बारिश

इन्द्र देव इस बार कुछ, ज्यादा ही तबाही कर रहे हैं क्रोधित किसी अप्सरा ने किया, हम पर बरस रहे हैं कहीं पे सूखा पड़ा हुआ है, कहीं पे कहर बरपा रहे हैं अपनी हरकतों से ना जाने क्यों बाज नहीं आ रहे हैं सीमित जगह में मूसलाधार बारिश, ये कैसा न्याय है और कहीं बस आँखें दिखाकर भाग जाना, अन्याय है बादल फट रहे है कहीं भूस्खलन कहीं बाढ़ आ रही है कहीं आफत की बारिश से, लोगों की जान जा रही है यातायात बंद, दुकानें बं... »

खटखटाते रहिये दरवाजा

खटखटाते रहिये दरवाजा एक दूसरे का मुलाकातें ना सही, आहटें आती रहनी चाहिये »

बरबादी का शौक है

आतंकी जवानों को रोज गोली मार रहे हैं जनता द्वारा चुने नेता देश को खा रहे हैं ढोंगी बिना वजह ही, मुद्दे खड़े कर रहे हैं स्वार्थ सिद्धि को खुदा को रिश्वत दे रहे हैं आरक्षण के भोग इतने आकर्षक हो चुके हैं सवर्ण भी ‘मैं पिछड़ा’ का शोर कर रहे हैं आज हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहाँ पेट खाली है, योग करवाया जा रहा है जेब खाली, खाता खुलवाया जा रहा है घर नहीं, शौचालय बनवाया जा रहा है आटा महंगा और डाटा सस्ता हो... »

व्यव्हारिकता के साइड इफेक्ट्स

व्यवहारिक” शब्द सुनते ही मीठा सा भान होता है व्यवहारिक इंसान का समाज में बड़ा मान होता है इन्हें सामाजिक परम्पराओं का खासा ज्ञान होता है ऐसे इंसान को अपने मान पर बड़ा गुमान होता है समाज में मान बनाये रखने पर पूरा ध्यान होता है लेकिन, व्यवहारिकता के साइड इफेक्ट्स से अनजान होता है व्यवहारिक इंसान असुविधा की नहीं सोचता है बिना बताये अस्पताल में हाल पूछने चला आता है अस्पताल में लाख वर्जित हो, घर का खाना... »

कुछ अपने बारे में

स्वछन्द प्रकृति का इन्सान हूं लेकिन नहीं चाहता मेरे कारण कोई रोये मुझे अपने ढंग से जीना पसंद है, बंधनों में बंधने की मेरी आदत नहीं थोडा मुंहफट हूँ, सोच समझ कर जवाब कम, प्रतिक्रिया ज्यादा देता हूँ कोई मेरी निजता में झांके, मेरे भीतर टटोले, ये मुझे कतई बर्दाश्त नहीं सदियों से प्रचलित सामाजिक परम्पराओं का अनुकरण मुझसे नहीं होता परिवर्तन में अगाध विश्वास है मेरा, आँखें बंद रखना मेरी फितरत नहीं अपने, र... »

बरगद आजकल

अटल, अडिग, विशाल बूढ़े पेड़ को देख कर लगता है जैसे कोई ज्ञानी ध्यानी बाबा, आसन जमाकर बैठा है पेड़ की कुछ झूलती जटायें जो जमीन से जुड़ गयी हैं ऐसा लगता है जैसे कोई दाढ़ी जमीन में घुस गयी हैं सन्तान प्राप्ति के लिये, हिन्दुओं का पूजनीय बरगद स्वच्छ वायु, छाँव, चिड़ियों का बसेरा, थके को डेरा कट कर भी कितना काम आता, कितनी देह जलाता कभी किसी से कुछ नहीं लेता, सिर्फ देना ही जानता बरगद जो मिट्टी से जुड़कर, अपना ... »

बुढापे का मज़ा लीजिये

जीवन की आपाधापी में, चैन का एहसास कीजिये बेवजह की चिंता छोड़कर, बुढापे का मज़ा लीजिये शरीर पर झुर्री, बालों में चांदी, है तो होने दीजिये चलने को हाथ में छड़ी आ गयी, तो आने दीजिये गपशप कभी संगीत कभी, चाय पर चर्चा कीजिये कभी ताश, कभी फिल्म, बुढापे का मज़ा लीजिये कोई परेशानी हो तो दोस्तों या परिवार में कहिये अपेक्षा करो ना उपेक्षा, स्वयं पर भरोसा कीजिये शरीर ने खूब काम किया है थोडा आराम दीजिये कब तक यूं ... »

बुढापे का मज़ा लीजिये

जीवन की आपाधापी में, चैन का एहसास कीजिये बेवजह की चिंता छोड़कर, बुढापे का मज़ा लीजिये शरीर पर झुर्री, बालों में चांदी, है तो होने दीजिये चलने को हाथ में छड़ी आ गयी, तो आने दीजिये गपशप कभी संगीत कभी, चाय पर चर्चा कीजिये कभी ताश, कभी फिल्म, बुढापे का मज़ा लीजिये कोई परेशानी हो तो दोस्तों या परिवार में कहिये अपेक्षा करो ना उपेक्षा, स्वयं पर भरोसा कीजिये शरीर ने खूब काम किया है थोडा आराम दीजिये कब तक यूं ... »

ए बादल इतना बरस

ए बादल इतना बरस कि सारी नफरतें धुल जांयें इंसानियत तरस गई है, मोहब्बत के सैलाब को »