Vipul, Author at Saavan's Posts

जमाने बीत गए जिनको भुलाये हुए आजफिर हैं क्यो याद वही आये हुए कितने बेरुखी से तोड़े थे वो दिल को दिल के टूकड़ो को हैं हम सम्भाले हुए सोचते थे न आएगी क़यामत कभी ये क्या हुआ वो हैं दर पे आये हुए जिसे छूने की चाहत में उम्र गुज़ार दी ज़नाज़े को मेरे हैं वही गले से लगाये हुए जिन्दा था तो तन्हाई ने मार डाला,मौत पे अपने तो ठीक दुश्मन भी रोते हैं आये हुए “विपुल कुमार मिश्र” »

मुक्तक

यूँ ही रोशनी नही होती, मोम को जलना पड़ता है यूँ ही चाहत नही मिलती इश्क़ की हद से गुज़रना पड़ता है “विपुल कुमार मिश्र”   »

ग़ज़ल

अक्सर खुशी का रिश्ता ग़म से होता है इसीलिए हँसी में भी आँख नम होता है   मेरे हाल पर हँसने वालों ज़रा गौर करो वक़्त ही तो है हरदम बदल रहा होता है सुना है दर्द हद से गुज़रे तो लफ्ज़ होता है तो लिखो किताब यहां पूरी ग़ज़ल होता है जिंदगी के फ़लसफ़े से गुजरे तो जाना जिंदगी है,खेल इसका भी अजीब होता है   हर दिल मे कोई न कोई ग़म होता है खैर छोड़ो सबका अपना राज़ होता है “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~ &... »

तू तो नही पर तेरी कहानी याद आयी सबको भूले पर तेरी जफ़ा याद आयी तेरे लिक्खे सब ख़तों को जला दिए पर तुझपे लिखी वो ग़ज़ल याद आयी “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~ »

मुक्तक

गुमशुम,मदहोश,खामोश कहाँ रहते हो वो क्या कहते है,हाँ मोहब्बत में रहते हो वो सुर्ख होंठ,क़ातिल नज़र बला की अदा एक दीद में क़त्ल का सामान रखते हो “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~ »

ग़ज़ल

वो लोग भी एक खास ही जगह रखते है जो वक़्त पर मेरे सामने आईना रखते है   कोई क्या लगाएगा मेरे वफ़ा का अंदाज़ा हम तो दिल भी किसी के पास रखते है   गर देखना हो कभी अश्क़ों की सुनामी तो दरिया क्या हम समंदर भी आँख में रखते है   तुझे लिखने का गुनाह तो अब कर दिया है सज़ा दो कदमो में तेरे पूरी ग़ज़ल रखते है “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~ »

मुक्तक

आज भी मुझमे कही तुम रहते हो मै तो अनपढ़ हूँ, तुम लिखते रहते हो धड़कनो के सुर पे जब साज़ लगते है मै तो खामोश होता हू तुम गाते रहते हो #VIP~ »

इश्क़ का मज़ा तो सिर्फ बिछड़ने से आये वो आशिक़ी ही क्या जिसमे शादी हो जाये ‘विपुल कुमार मिश्र »

चलो दर्द में भी मुस्कुराते हैं यादो के साथ टकराते है तुम आओ तो सही मिलकर दर्द को आंख दिखाते है #VIP~ »

अक्सर हंसी का रिश्ता ग़म से होता है इसीलिए खुशी में भी आँख नम होता है #VIP~ »

Page 1 of 212