Sukhmangal, Author at Saavan's Posts

“सहपाठी मिले “

फिर वही संगी हमारा फिर वही साथी मिले हो जनम यदि पुनः तो, मुझे फिर वही सहपाठी मिले | लड़ता ही रहता है वह हर समय हर मोड़ पर संघर्ष में संग रहता सदर ,जाता न मुझको छोड़ कर | हिम्मत -हौसले में है ,उसका तो शानी नहीं एक सच्चा मित्र है वह ,चलता सबको जोड़कर | उसका संग वैसे ही जैसे ,बृद्ध बृद्ध को लाठी मिले हो जनम यदि पुनः ,तो मुझे फिर वही सहपाठी मिले || एक रिस्ता है जुड़ा वर्षों पुरानी दोस्ती का, जिंदगी का एक र... »

अभियान नवगीत “

अभियान नवगीत ” ———————— बांधे सर पे मस्त पगड़िया राह कठिन हो,चलना साथी दुराचार ख़तम करने अब उतार चलो काँधे की गाँती आन ,बान और शान हमारे अच्छे- सच्चे हैं वनवासी दिलों – दिलों को दर्द बताने महफिल – महफिल खड़ी उदासी आँखें भर – भर उठती हैं मां जब अपनी कहर सुनाती बांधे सर पे ……………. जोते – बोये ,कोड़... »

रिश्तों का सम्मान

भांप गया सत्य बात ,जो मानता नहीं सच कहे ‘मंगल ‘देश में,दुश्मन बड़ा वही ! भूख – प्यास जकड़न भल ,भरमता कहा सही पूजी मिली प्यार की ,ठुकराता चला कहीं | सम्मान रिश्तों का नहीं ,उड़ान आकाशे बही पास फेसबुक साथ लिए ,हताश जिंदगी रही ! मंगल रिश्तों का सम्मान ,निभाया जिसने नहीं रचनात्मकता फीकी पड़ी,वह टिकता नहीं कही|| -SUKHMANGAL SINGH “ »

नव वर्ष

“नव वर्ष की शुभकामनाएं ” ————————— नव वर्ष की शुभकामनाएं / बच्चों में उत्साह जगाएं | प्रांगन मंदिर संस्कृति अपनाएँ / देवी को सुमधुर गीत सुनाएँ || भगवा ध्वज की पताकायें | तिलक चन्दन टीका लगाएं ? नव वर्ष धूम से मनाएं | देवी को सुमधुर गीत सुनाएँ || शंख ध्वनि मृदंग बजाएं / पुरुषोत्तम राम को याद दिलायें | विक्रमादित्य का विक्रमी मनाएं / ... »

“चिड़िया”

“चिड़िया” चीं चीं करती चिड़िया आती अम्बर ऊपर घोसला बनातीं | पानी जहां पर वहाँ मडरातीं औ जमी से उड़ -उड़ जाती | »

”भौरे गायें “

अब गीत कुसुम कमनीय सूना मंद -मंद मत मुस्का रंग -चित्र रच -रच के इठला और बल खा | तेरी -मेरी गढ़ी कहानी उल्लासों से भरी जवानी कविता में आ गई रवानी हुआ सबेरा अब कुछ सोचो क्षणिक विभव है पानी -पानी | विमल धरा का रूप रंग रस भू पर पैर की रही निशानी | रसिक रसीले भौरे आते प्रीति-प्रतीति पथ दिखलाते यहाँ वहाँ उपभोग में लेकर छले-डाले कहाँ तुम जाते ? बन कोमल कमनीय- कलेवर देवों के भी मन को भाते | रसिकों का श्रृं... »

“हलाला देती बरबादी ?”

“हलाला देती बरबादी ?” मुद्दा तलाक का तीन तलाक लाना | बिना विचार किये महिला को हटाना || हजरत उमर का था वह रहा ज़माना | तीन तलाक पर चालीस कोड़ा लगाना || किस्सा था पुराना जब दुल्हन का लाना | खोलकर नकाब उसका घर उसे लौटाना || मजहवी बहाना करता रहा है मनमाना | महिला को अधिकार जनता को दिलाना || उपयोग की वस्तु नही! बदला नव ज़माना | तरक्की पसंद जहां है कुछ करके दिखाना || आओ मिल बैठकर परिवार को है ब... »

“मैहर वाली माई”

मैहर वाली माई के , मनावै के होई | जागि जागी जगत के , देखावै के होई | दुनिया में माई  को , बतावै के होई | नारियल माला फूल , चढ़ावै के होई | माँ की ममता गितिया , सुनावै के होई | निमिया दरिया पालना , झुलावै के होई | माई के चुनरी , चढ़ावै के होई | »

ताला कहाँ लटकता

ताला कहाँ लटकता

ह्रदय में ताला कहाँ लटकता ,मन में केवल भ्रम पलता है | आश्वासन में दुनिया चलती ,आमंत्रण मरण मात्र बेचैनी | नजरें मंजिल पर टिकी हुई ,संवाद हकीकत हो जाता है | स्याही सूख गई हों तो भी ,यह दिल तो एक समंदर सा है || »