Sufi, Author at Saavan's Posts

“यही मैं सोच-सोचकर हैरान!!!! “….

ऐक हजारों धरती माता, ऐक ही आसमान, मजहब के झगड़ों में क्यूँ उलझ रहा इंसान, यही मैं सोच -सोचकर हैरान, यही मेै सोच-सोचकर हैरान, भारी -भारी पत्थर लेकर मंदिर रोज बनाते हैं, उस पत्थर में चूना मिलाकर, मस्जिद रोज चुनाते है, इन दोनों में प्रेम से रहते, अल्लाह और भगवान, अरे अल्लाह और भगवान, यही मैं सोच-सोचकर हैरान, यही मैं सोच-सोचकर हैरान, मंदिर -मस्जिद तोड़ने वाले हाथ तेरे क्या आयेगा, देश को आग लगाने वाले,... »

“भागीरथ जी प्रकट हो”

पाकिस्तान की औखात को देखकर ये भाव उठे, कोई गलती हो तो क्षमा करना — जल जला उठा वो सैनिक, जिसमें जान बाकी है, लहु से श्रंगार कर दुंगा, बस यही अहसान बाकी है, काफूर हो उठा हिमगिरी,यह जवां अविनाशी है, महक उठा ये कश्मीर, खुश हो रहा काशी है, किसको क्या फांसी दी,तुम ये क्युँ बतलाते हो, कईयों को मार दिया, क्युँ अब रूह जलाते हो, तुम क्या पाकिस्तानी गोदियों में पले-बढ़े हुए हो, जो ऐक याकूबी मुर्दे पर स... »

मैं आर देख रहा था, मैं पार देख रहा था…

मैं आर देख रहा था, मैं पार देख रहा था, बंद लतीफों की खड़े -खड़े मल्हार देख रहा था, सोचा था तंग आकर लिखूंगा ये सब,मगर ये क्या, कागज के टुकडों में दफन विचार देख रहा था, मैं आर देख रहा था, मैं पार देख रहा था, पग भारी है उनके, जिनके किस्सों की भरमार देख रहा था, मैं यहीं कहीं लड़की का चलता-फिरता बाजार देख रहा था, कोशिश मत करो तुम सरकार-ए-आलम बात छुपाने की, जब तुम्हारी ही कली को, बागों में शर्मसार देख र... »