Lalit Kumar Mishra, Author at Saavan's Posts

बाबुषा कोहली के साथ एक शाम

बाबुषा कोहली के साथ एक शाम बात ये 2017 की थी मैं साहित्य की साइटें खोज रहा था गूगल को खूब टटोल रहा था मिली मुझे फिर इसमें सफलता अच्छी रचनाओं का था उसमें छत्ता रसास्वाद करते करते अच्छे लेखकों से मिलते मिलते बाबुषा कोहली का पेज फिर आया प्रेम गिलहरी दिल अखरोट पूरा पढ़ने से रोक न पाया इच्छा हुई आगे बढ़ने की उनको शुभकामनाएं देने की सोचा थोड़ी सी चर्चा भी होगी बहुत सी बातें सीखने को मिलेगी तभी वहां उनका नम... »

तुम निश्चित ही सम्मान की हकदार होती पद्मावती

तुम निश्चित ही सम्मान की हकदार होती पद्मावती तुम निश्चित ही सम्मान की हकदार होती पद्मावती बशर्ते तुमने सीता और अहिल्या की बजाय द्रौपदी का अनुसरण किया होता रानी झांसी की तरह लड़ा होता माना कि नहीं थे तुम्हारे पास पांडव जैसे अजेय तीर माना कि नहीं थीं तुम रानी झांसी जैसी वीर पर यौवन तो था न तुम्हारे पास पद्मावती जिसने राजा रतन सिंह को भरमाया था जिसने खिलजी को ललचाया था इसी यौवन रूपी अमृत को विष में बद... »

पहचान

पहचान बड़ी कोशिशें की खुद को जानने की पहचानने की ज्ञानियों से चर्चा की पोथियाँ पढ़ी ध्यान लगाया पर आज जब बाजार गई तो समझ आया कि मैं ब्लाउज और पेटीकोट हूँ इससे अधिक कुछ नही »

वर्जिन

वर्जिन मैं वर्जिन हूँ विवाह के इतने वर्षों के पश्चात् भी मैं वर्जिन हूँ संतानों की उत्पत्ति के बाद भी। वो जो तथाकथित प्रेम था वो तो मिलन था भौतिक गुणों का और यह जो विवाह था यह मिलन था दो शरीरों का मैं आज भी वर्जिन हूँ अनछुई, स्पर्शरहित। मैं मात्र भौतिक गुण नहीं मैं मात्र शरीर भी नहीं मैं वो हूँ जो पिता के आदर्शों के वस्त्र में छिपी रही मैं वो हूँ जो माँ के ख्वाबों के पंख लगाये उड़ती रही मैं वो हूँ ... »

सुनो अमृता!

सुनो अमृता! सुनो अमृता! अच्छा हुआ जो तुम लेखिका थी क्योंकि अगर तुम लेखिका न होती तो निश्चित तौर तुम्हें चरित्रहीन और बदलचलन की श्रेणी में रखा जाता। अच्छा हुआ तुम असाधारण थी क्योंकि साधारण स्त्रियों की ज़िंदगी में तीन-तीन पुरुषों का होना वैश्यावृत्ति माना जाता है अच्छा हुआ अमृता तुम बोल्ड थी इसीलिए तुम्हारे मुंह पर किसी ने कुछ न कहा किन्तु यह भी सत्य है आज इमरोज की कामना करने वाली कोई भी स्त्री अमृत... »

वह बच सकती थी!!!

वह बच सकती थी!!!

वह बच सकती थी!!! वह बच सकती थी अगर वह चिल्ला सकती उस दिन जब खेल खेल में किरायेदार अंकल उसे गोद मे उठा दुलारने लगे और वह दुलार जब तकलीफदेह होने लगा तब वह अगर चिल्ला पाती तो वह बच सकती थी संभवतः उसे पता ही नहीं था कि चीख भी एक अस्त्र है वह बच सकती थी बार-बार अतिक्रमित होने से अगर वह कहना जानती उस दिन जब देर रात घर वाले अंकल की उंगलियां उसके अंगों पर भयंकर तांडव करने लगीं वह रोक सकती थी यह तांडव अगर ... »